क्षमा करने से मिलती है आंतरिक खुशी

BY — October 1, 2018

श्री महावीर युवा मंच संस्थान का सामूहिक क्षमापना समारोह
20वां संहक विवाह 26 जनवरी को

उदयपुर। जीव को क्षमा करने से क्या मिलता है। भीतर की प्रसन्नता बढ़ती है। खुशी के लिए जो साधन जुटाने में लगा है वो खुशी वैसे ही मिल जाएगी। क्रॉनिक बीमारी को दूर करने की दवा है क्षमापना।

श्री महावीर युवा मंच संस्थान की ओर से रविवार को महाप्रज्ञ विहार में बनाये गए शिवाचार्य समवसरण में आयोजित सामूहिक क्षमापना समारोह में विभिन साधु-साध्वियों ने ये विचार व्यक्त किये।
आचार्य डॉ. शिव मुनि के कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है, कायरों का नही। चूहा कहे कि बिल्ली को क्षमा कर दिया तो क्षमा नही। प्रभु महावीर की क्षमा अतुलनीय है। 12 वर्षों की साधना में जो परिचय दिया, वो सोच भी नही सकते।
उन्होंने कहा कि खुद को पहचानो। हम आत्मवासी हैं, जैन हैं, एक हैं, महावीर एक है। हम सबसे पत्र लिखकर क्षमा मांगते हैं लेकिन जिससे मांगनी हो, उससे नही मांगते हैं। खाना, पहनना, रहना सब मांगकर फिर किस बात की गांठ बांधना। नाम के पीछे मत भागो, आत्मा को याद रखो।
शिरीष मुनि ने कहा कि क्षमा मांगनी है तो भाव दशा में जाकर आत्मा के ऊपर जो गांठें पड़ी है, उनको खोलो। ध्यान की एक सामायिक कर लो तो साल भर के कर्म बंधन से मुक्त हो जाते हैं। आत्मा की शक्ति है जो कायोत्सर्ग किया जा सकता है अन्यथा शरीर में इतनी ताकत नही।
युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने कहा कि कर्मों की, वैर की गांठ को दूर करें। उदारता के बिना क्षमा न तो ली जा सकती है और न ही दी जा सकती है। मनमुटाव वाले व्यक्ति से जब तक क्षमा नहीं मांग लें, तब तक भोजन नहीं करेंगे।
तेरापंथ धर्मसंघ की साध्वी श्री लक्ष्यप्रभा ने कहा कि हम सभी का मंत्र एक ही है। एक जौहरी की दुकान में मोती, मानक, हीरा अलग अलग कंटेनर में रखता है लेकिन वो अलग अलग नही रखे तो शायद उसकी दुकान नही चलेगी। ऐसा ही है। हम सभी का ध्येय वीतरागता ही है। किसी भी राह से पहुंचे, पहुंचना वहीं है। संवत्सरी एक होने के प्रयास चल रहे हैं और विश्वास है कि जल्द ही पुरे होंगे। दिमाग से दिल तक की यात्रा ही क्षमापना है। भीतर की क्रांति है जिसके लिए खुद को समर्पित होना होगा। हमें अपने विचारों को सागर बनाना होगा अन्यथा हम क्षमापना का आनंद नहीं ले पाएंगे।
आचार्य विजय यशोभद्र सूरीश्वर महाराज ने कहा कि हमें क्षमापना साल में एक बार याद आती है, रोज क्यों नहीं। यदि आज क्रोध आया है तो हाथों हाथ आज ही क्षमा मांग लें। भगवान से क्षमा मांगनी है तो बाद में मांग सकते हैं लेकिन इंसान से क्षमा मांगनी है तो हाथों हाथ मांग लें। मिथ्या आडंबर करते हैं लेकिन मन से मांगें। बाह्य वस्तुओं पर नहीं, आंतरिक साधना पर ध्यान दें। घृणा को प्यार से जीतना होगा।
सेक्टर 3 महावीर भवन में विराजित आचार्य रविदेव सूरीश्वर के शिष्य आगमप्रिय सूरीश्वर महाराज ने कहा कि 2600 साल बाद आज भी हम क्षमापना दिवस के लिए हम एक फॉर्मेलिटी करते हैं। किसी के मन को ठेस पहुंचाई हो तो सामने जाकर क्षमा की बजाय मोबाइल के माध्यम से क्षमा करते हैं। क्षमापना उसी से करनी है जिससे वैर हो उससे नहीं जिससे मित्रता हो। हम यही करते हैं कि जो फ्रेंड लिस्ट में है, उससे क्षमापना करते हैं।
संस्थान के सरंक्षक राजकुमार फत्तावत ने कहा कि पिछले 3 दशक से मैत्री कार्यक्रम किया जा रहा है। अविनय हुई हो तो सभी चारित्रात्माओं से खमतखमना करते हैं। जैन एकता का अर्थ कोई लसख्य नही सिर्फ सभी भाइयों के प्रति सद्भावना रखना है। हम सब आपस में एक हैं। संत की भावना जागृत हो। एक संकल्प करें कि समता का भाव रखेंगे। एक दूसरे जैन परिवार को सहयोग करेंगे। एक दिन निकले जिसमें सभी एक साथ पर्व मना सकें। 19 सामूहिक विवाह आयोजन किये जा चुके हैं। सामाजिक चकाचौंध के लिए एक आचार संहिता हो ताकि सभी उसका पालन कर सकें। इस अवसर पर 20वां सामूहिक विवाह 26 जनवरी 2019 को करने की घोषणा की।
स्वागत उदबोधन में कार्यक्रम संयोजक संजय भंडारी ने कहा कि 22 वर्षों से जैन समुदाय के सभी साधु भगवंतों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है।
संघ अध्यक्ष ओंकारसिंह सिरोया ने सभी संस्थाओं से पहुंचे पदाधिकारियों का स्वागत किया। चातुर्मास संयोजक वीरेंद्र डांगी ने प्रांगण में पहुंचने पर सभी साधु भगवंतों का आभार व्यक्त किया। भीलवाड़ा के अर्पित कोठारी का 30 उपवास करने पर अभिनंदन किया गया। लुधियाना से आई रजनी और पंकज भंडारी ने गीत प्रस्तुत किया।आरम्भ में महावीर युवा मंच संस्थान महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष विजयलक्ष्मी गलुण्डिया, सोनल सिंघवी आदि ने नमस्कार महामंत्र से मंगलाचरण किया। आभार संस्थान के मंत्री सुनील मारू ने व्यक्त किया। संचालन अध्यक्ष महेंद्र तलेसरा ने किया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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