पीएमसीएच में 22 दिन के बच्चे की सफल सर्जरी

BY — August 23, 2022

दुर्लभ बीमाारी एच टाइप-टीईएफ (ट्रेकियो एसोफैगल फिस्टूला)
उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल, भीलों का बेदला में 22 दिन के नवजात बच्चें के एच टाइप टीईएफ ( ट्रेकियो एसोफैगल फिस्टूला ) नामक जटिल बीमारी की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवनदान दिया। ढाई घण्टे तक चले इस सफल आॅपेरशन को अंजाम दिया बाल एवं नवजात शिशू सर्जन डाॅ. प्रवीण झंवर, ऐनेस्थिशिया विभाग के डाॅ. प्रकाश औदिच्य, डॉ. समीर गोयल एवं डाॅ.आशुतोष की टीम ने।

दरअसल 22 दिन के नवजात बच्चें को जन्मजात यह समस्या थी जिसके चलते बच्चे को दूध पिलाते ही बच्चे का कलर नीला पड जाता और श्वास लेने में परेशानी के चलते हास्पिटल में भर्ती कराना पडता। परिजनों ने बाल एवं नवजात शिशू सर्जन डाॅ.प्रवीण झंवर को दिखाया। जाॅच करने पर पता चला कि बच्ची की श्वास नली एवं आहार नली आपस में जुडी हुई है जिसका कि आॅपरेशन से ही इलाज सम्भव था। इस आॅपरेशन में नवजात की श्वास नली को आॅत से अलग किया गया व खाने की नली बनाई गयी।
बाल एवं नवजात शिशू सर्जन डाॅ. प्रवीण झंवर ने बताया कि इस तरह की बीमारी के इलाज के लिए नवजात ब्रोन्कोस्कोपी की आवश्यकता होती है, जो वास्तव में बहुत कम स्थानों पर उपलब्ध है,लेकिन डॉ.कपिल ब्यास रेडियोलॉजिस्ट के मार्गदर्शन में डॉ.भरत और डॉ.इकबाल ने नवजात शिशु में वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी करके फिस्टुला का सही स्थान निश्चित किया जिससे आॅपरेशन करना आसान हो सका।
इस दौरान वाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ.रवि भाटिया एवं पिडियाट्रिक क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डाॅ.पुनीत जैन एवं उनकी टीम की देख रेख में दो दिन तक बच्चें को वेन्टीलेटर पर रखा गया एवं उसका पूरा ख्याल रखा जिसके चलते वह बहुत जल्दी से रिकवर हो सका।
डाॅ.प्रवीण झंवर ने बताया कि एच टाइप ट्रेकियो एसोफैगल फिस्टूला (ज्म्थ्) एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है जिसमें श्वासनली जो फेफड़ों को हवा पहुंचाती है और भोजन नली जो पेट में भोजन पहुंचाती है, आपस में जुडी होती है । गर्भावस्था में कभी-कभी विकास के दौरान ये दोनों नलियां पूरी तरह से अलग नहीं होती हैं, और एक छोटे मार्ग से जुड़ी रह जाती हैं। जिसकें कारण नवजात में निमोनिया और सांस लेने में समस्या हो जाती है।
डाॅ. झंवर ने स्पष्ट किया कि गर्भधारण के दौरान महिला के गर्भ में पानी की अधिकता इस बीमारी को इगिंत करती है। अगर इस तरह की समस्या हो तो डिलेविरी ऐसे हाॅस्पिटल में करानी चाहिए जहाॅ पर बाल एवं नवजात शिशू सर्जन की सुविधा उपलब्ध हो जिससें की नवजात शिशु की जान बचाई जा सकती है। बच्चा अभी पूरी तरह से स्वस्थ्य है और उसको छूट्टी दे दी है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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