हिन्दुस्तान जिंक के शिक्षा संबल कार्यक्रम में इस वर्ष लाभान्वित हो रहे 1500 विद्यार्थी

BY — May 25, 2023

अंग्रेजी, गणित और विज्ञान में पारंगत होने के साथ ही सर्वागिण विकास पर बल
महीने भर चलने वाले ग्रीष्मकालीन शिविर में उदयपुर में आयोजित 3-आवासीय शिविर और 6 स्थानों – जावर, देबारी, दरीबा, चन्देरिया, आगुचा और अजमेर के 12 गैर-आवासीय शिविर है शामिल

गर्मी की छुट्टियों में घूमने फिरने या फिर सिर्फ खेलकूद के बजाय पहली बार घर से दूर रहने और वह भी एक माह के लिए, 24 घण्टें अनुशासन, अध्ययन, खेलकूद, व्यक्तित्व निखार जैसे विषयों के लिए जाना हो तो स्वाभाविक तौर पर 200 से अधिक बच्चें एकमत नही हो सकते। लेकिन जावर, चित्तौडगढ़, आगुचा, दरीबा, देबारी, कायड और पंतनगर से इस शिविर में बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और आत्मविश्वास इस बात को साबित करने के लिए अनुकुल थे कि उन्हें पढ़ाई मे रूचि के साथ साथ अपने गुरूजनों से अभिभावकों जैसा व्यवहार और मार्गदर्शन उन्हें घर से दूर घर सा ही वातावरण दे रहे है जो कि उनके भविष्य की नींव के लिए अमूल्य है।

हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चलायें जा रहे शिक्षा संबंल कार्यक्रम के अन्तर्गत ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविरों में उत्तराखंड के पंतनगर सहित राजस्थान के 5 जिलों उदयपुर, राजसमंद, चित्तौडगढ़, भीलवाड़ा, अजमेर के राजकीय विद्यालयों के 8वीं 10वीं एवं 12वीं कक्षा के 1500 से अधिक बच्चें एवं पंतनगर राज्य से 17 बच्चे उत्साह से भाग ले रहे है। इस ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविरों में 66 शिक्षा सम्बल स्कूलों के लगभग 1500 से अधिक बच्चे लाभान्वित होंगे। इन प्रशिक्षण शिविरों में बच्चों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों के साथ ही शारीरिक, खेलकूद, बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियांे से जोडकर उनके सर्वागिंण विकास की और अग्रसर किया जा रहा है।
हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा विद्या भवन सोसायटी उदयपुर के सिनियर सैकण्डरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में आर.एस.सी.ई.आर.टी. की निदेशक श्रीमती कविता पाठक, आर.एस.सी.ई.आर.टी के सहायक निदेशक श्री शिवजी गौड़,कंपनी की सीएसआर हेड अनुपम निधि, संयुक्त निदेशक (शिक्षा) श्री पुष्पेन्द्र, श्री अजय मेहता, अध्यक्ष विद्याभवन सोसायटी, श्री अनुराग प्रियदर्शी-सीईओ विद्याभवन सोसायटी एवं अन्य अतिथिगण उपस्थित थे।
इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अरूण मिश्रा ने बताया कि ‘‘हम शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास करते हैं और यह शिविर युवा प्रतिभाओं को पोषित करने और उन्हें उज्जवल भविष्य के लिए सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साध नहीं है बल्कि एक ऐसी कुंजी है जो अनेकों अवसरों के द्वार खोलती है। शिक्षा संबल समर कैंप युवा दिमागों को अपनी क्षमता का पता लगाने, अपने जुनून को प्रज्वलित करने और हमेशा विकसित होने वाली दुनिया में फलने-फूलने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने के लिए एक मंत्र के रूप कार्य करता है। प्रतिवर्ष शिक्षा सम्बल कार्यक्रम द्वारा 6वीं से 12र्वी कक्षा के 8000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे है। 6 वर्ष पूर्व प्रायोगिक तौर पर शुरू किये गये इस आवासीय शिविर की सफलता उनकी बढ़ती हुई संख्या से सिद्ध होती है। परिणामों को बेहतर बनाने और शिक्षा की पद्धति इस कार्यक्रम और शिविरों की अद्वितीय खासीयत है।

ये शिविर हिन्दुस्तान जिंक के साथ मिलकर ऐसा शैक्षणिक प्रयोग है जिससे संस्था और बच्चों का नाम रोशन हो। आवासीय शिविरों में यह प्रयास किया जा रहा है कि किस प्रकार शिक्षा को प्रासंगिक किया जा सके जिससे बच्चों को अधिकाधिक लाभ मिलें।
हिन्दुस्तान जिंक सदैव आगे बढ़कर ग्रामीण बच्चों के संपूर्ण विकास के लिये आगे आता रहा है शिक्षा संबंल कार्यक्रम के तहत् अध्यापन में अभाव महसूस कर रहे बच्चों के लिये 13 वर्षो से लाभान्वित किया जा रहा है। ग्रीष्मकलीन प्रशिक्षण शिविरों में शिक्षण के साथ ही कौशल विकास, व्यवहार तथा अन्य गतिविधियों जैसे खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमो से बच्चों में व्यक्तिगत और शिक्षात्मक सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा संबंल कार्यक्रम के तहत् हिन्दुस्तान जिंक द्वारा 9वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सरकारी विद्यालयों में जहा पद रिक्त है विज्ञान, गणित एवं अंगे्रजी के विषयध्यापकों द्वारा शिक्षा दी जा रही हैं। इस आवासीय प्रषिक्षण शिविर में 10वीं एवं 12 वीं कक्षा में इस वर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को विशेषज्ञ अध्यापकों द्वारा अध्यापन कराया जा रहा है जिससे वे इन विषयों के बारें में सामान्य जानकारी को रूचिकर तरिकों से सीख सकें। इस प्रकार के शिविर का आयोजन उदयपुर कोरोना काल के अलावा लगातार छः वर्षो से किया जा रहा है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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