उदयपुर। लेकसिटी में चल रही तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन नवीन व पारंपरिक उपचारों को मरीज़ की समस्या के अनुरूप अपनाने के विचार के साथ संपन्न हुई। ट्रेंड्स ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन इन ऑन्कोलॉजी कॉन्फ्रेंस में देश विदेश के 100 से अधिक कैंसर रोग विशेषज्ञों ने अपनी प्रैक्टिस के अनुभव, उपचार को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किये।

कॉन्फ्रेंस चैयरमेन डॉ. मनोज महाजन ने बताया कि आखिरी दिन गैस्ट्रोईसोफेगल कैंसर पर केंद्रित सत्र में विशेषज्ञों ने सीएलडीएन 18.2, एचइआर 2 जैसे लक्षित एंटीजन पर आधारित कार टी और टी से आर थेरेपी की नवीनतम खोजों पर चर्चा की व सीटी डीएनए की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। यह तकनीक अब कैंसर की पहचान, रोग की प्रगति और उपचार की प्रतिक्रिया को ट्रैक करने में अहम साबित हो रही है। सत्र के अंत में उन्नत मामलों पर केस डिस्कशन हुआ जिसने चिकित्सकों को व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किया। डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि तकनीकी सत्र में गायनोकोलॉजिक कैंसर जैसे ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें कार टी, टीसीआर, और टीआईएल थेरेपी की संभावनाओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी। साथ ही, रोग की प्रारंभिक पहचान, पुनरावृत्ति की निगरानी और सही समय पर उपचार शुरू करने की रणनीतियों पर बातचीत हुई। पैनल चर्चा ने इन सभी पहलुओं को समेटते हुए चिकित्सकों को एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया।
समापन में डॉ. महाजन ने तीन दिनों की चर्चा, शोध और उपलब्धियों को साझा किया और प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने सत्रों के बारे में बोलते हुए कहा कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में सेलुलर थेरेपी, लिक्विड बायोप्सी और इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक ऑन्कोलॉजी विषयों पर गहन चर्चा हुई। पहले दिन कार टी थेरेपी के वर्तमान परिदृश्य, इसके अनुमोदित उपयोग, बायोमार्कर आधारित चयन और इसके दुष्प्रभावों जैसे सीआरएस और आईसीएएनएस पर चर्चा हुई। इमर्जिंग फ्रन्टीयर्स सत्र में ड्यूल टारगेट कार्स और जीन एडिटेड सेल्स की बात हुई। दूसरे दिन ब्रेस्ट, लंग, हेड-नेक, रीनल और प्रोस्टेट कैंसर में सेलुलर थेरेपी की भूमिका पर चर्चा हुई। सीटीडीएनए और सीटीसीएस की मदद से रोग की निगरानी और उपचार की प्रतिक्रिया को समझने की तकनीकों को विस्तार से समझाया गया। साथ ही कार टी सेल यूनिट स्थापित करने पर एक कार्यशाला भी आयोजित की गई। तीसरे दिन, गैस्ट्रोईसोफेगल और गायनोकोलॉजिक कैंसर पर केंद्रित सत्रों ने सम्मेलन को एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। सम्मेलन ने चिकित्सकों को नवीनतम शोध, तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ते हुए कैंसर उपचार के भविष्य की दिशा को स्पष्ट किया।












