हिन्दुस्तान जिंक के कर्मचारियों में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं

BY — March 2, 2026

भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक और एकमात्र उपलब्धि
मेटल और माइनिंग में महिलाओं को स्पॉटलाइट करने के लिए 25 दिन का ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन लॉन्च

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और चांदी के वैश्विक शीर्ष पांच उत्पादकों में से एक, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने जेंडर इंक्लूजन (लैंगिक समानता) की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी की वर्कफोर्स में अब 26.3 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक है यह एक ऐसा क्षेत्र जिसे पारंपरिक रूप से पुरुषों का काम माना जाता रहा है। कंपनी में अब 745 से अधिक महिलाएं कार्यरत है, जिनमें 314 से अधिक महिला इंजीनियर शामिल हैं। ये महिलाएं अंडरग्राउंड माइंस, स्मेल्टर और तकनीकी कार्यों जैसी प्रमुख भूमिकाओं में कार्य कर रही हैं। हिन्दुस्तान जिं़क ने महिलाओं को फ्रंटलाइन जिम्मेदारियों में शामिल कर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने पहली बार महिलाओं को खदानों के भीतर, नाइट शिफ्ट में और अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम में शामिल करने जैसी अनूठी पहल की है। रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 के उपयोग ने माइनिंग को और अधिक सुरक्षित बनाया है, जिससे महिलाएं इन तकनीकी क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर अपना करियर बना रही हैं।

कंपनी ने महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ावा देने के लिए 25 दिनों का एक खास कैंपेन शुरू किया है, जिसका नाम है “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” इस कैंपेन के जरिए कंपनी उन महिलाओं की कहानियों को सामने ला रही है जो माइनिंग और मेटल इंडस्ट्री में अपनी विशेषज्ञता और साहस से बदलाव ला रही हैं। इसमें विज्ञान की छात्राओं को भी माइनिंग ऑपरेशंस का अनुभव कराया गया है। इन ऑपरेशन्स को आत्मविश्वास और अनुभव के साथ लीड करने वाली असाधारण महिलाओं से मिला जा रहा है। यह ऑपरेशन्स में साइंस से कहीं अधिक है, यह साइंस में महिलाएँ हैं जो एक बदलाव की लहर जगा रही हैं, जो स्टेम स्टूडेंट्स को प्रेरित करने की नींव से बनी है। कैंपेन के मुख्य हिस्से में, कंपनी ने भारत के सबसे उत्कृष्ट साइंस कॉलेज से 15 से अधिक डाइनैमिक महिलाओं को एक इमर्सिव सोशल एक्सपेरिमेंट के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने हिन्दुस्तान जिं़क के माइनिंग ऑपरेशन्स में काम किया, लोगों की सोच को हकीकत से जोड़ा और मेटल्स और माइनिंग में आगे बढ़ने के लिए अपनी क्षमता को जगाया। इससे पहले, अलग-अलग स्टेम महिलाओं को अपने क्षेत्र में आत्मविश्वास से आगे बढ़ कर कार्य करते हुए अवगत कराया गया, साथ ही काम पर जिंक महिलाओं की जीवंत डे इन द लाइफ झलकियों को भी दिखाया, इंडस्ट्री के अनुभवों के साथ टेस्टिमोनियल्स भी दिखाए गये है। यह दिखाता है कि मेटल्स का भविष्य साइंस में महिलाओं पर क्यों निर्भर करता है, सिर्फ हिस्सा लेने के लिए नहीं, बल्कि इनोवेट करने, लीड करने और फील्ड को फिर से डिफाइन करने के लिए और इसका मकसद हैवी इंडस्ट्री और स्टेम करियर में महिलाएं क्या हासिल कर सकती हैं, इस बारे में सोच को फिर से परिभाषित करना है। इस बदलाव को हिन्दुस्तान जिंक की डिजिटल माइंस लीड कर रही हैं, जो टेली-रिमोट अंडरग्राउंड ऑपरेशन, ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस, रियल-टाइम एनालिटिक्स, रिमोट ब्लास्टिंग और ऑटोमेटेड सिस्टम जैसी अत्याधुनिक क्षमता से लैस हैं। इन इनोवेशन ने क्षमतावर्धन किया है और अधिक महिला प्रोफेशनल्स को माइनिंग में मीनिंगफुल, फ्यूचर-रेडी करियर बनाने के लिए बढ़ावा दिया है।
इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरूण मिश्रा ने कहा कि, माइनिंग में महिलाओं को सशक्त बनाना केवल समानता की बात नहीं है, यह हमारे भविष्य के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य है कि हर प्रतिभाशाली महिला को बढ़ने का मौका मिले। हमारा लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत जेंडर डाइवर्सिटी हासिल करना है, और हम एक ऐसा कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ लैंगिक समानता ही नवाचार का आधार हो। हिन्दुस्तान जिं़क में, हमने एक ऐसी संस्कृति बनायी है जहाँ महिलाएँ आगे रहकर लीड कर सकती हैं, चाहे वह अंडरग्राउंड माइंस की गहराई में काम करना हो, रोबोटिक ऑटोमेशन चलाना हो, या मेटलर्जी में सस्टेनेबिलिटी को आगे बढ़ाना हो। हमारा ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ कैंपेन हमारे विजन को दर्शाता है – पुराने नॉर्म्स को चैलेंज करना, पोटेंशियल को बढ़ावा देना, और यह सुनिश्चित करना कि हर प्रतिभावान महिला के पास आगे बढ़ने और कामयाब होने के लिए एक मंच हो।
हिन्दुस्तान जिंक सपोर्टिव वर्कप्लेस पॉलिसी को एक बड़ा आधार देता है, जिसमें स्पाउस हायरिंग पॉलिसी, चाइल्डकेयर के लिए एक साल का सब्बाटिकल और मेंटल और फिजिकल हेल्थ को प्रायोरिटी देने वाली ‘नो-क्वेश्चन आस्क्ड’ फ्लेक्सीबिलिटी पॉलिसी शामिल है। पॉलिसी के अलावा, एम्प्लॉई वर्ल्ड-क्लास टाउनशिप में रहते हैं, जहाँ प्लांट के पास सभी मॉडर्न सुविधाएँ मिलती हैं। इनमें स्कूल, हॉस्पिटल, डेकेयर सेंटर, क्रेच,, स्पोर्ट्स और रिक्रिएशनल सुविधाएँ जैसे स्विमिंग पूल, गोल्फ कोर्स और मूवी थिएटर शामिल हैं, जो वाइब्रेंट सोशल लाइफ को बढ़ावा देते हैं। लगातार स्किलिंग, मेंटरशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट के माध्यम से हिंदुस्तान जिंक ऐसी पॉलिसी को सपोर्ट करता रहता है जो महिलाओं के लिए सुरक्षित और समान माहौल बनाती हैं। कंपनी की प्रमुख पहल इंजीनियरिंग और ऑपरेशन्स में स्ट्रक्चर्ड ग्रोथ को आगे बढ़ा रही है, जो इसे इस सेक्टर में एक रोल मॉडल के तौर पर पेश करती है। यह कैंपेन 8 मार्च 2026 को एक खास कार्यक्रम के साथ समाप्त होगा, जिसमें कार्यक्षेत्र में बदलाव लाने वाली महिलाओं और छात्राओं की प्रेरक कहानियों को साझा किया जाएगा।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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