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उदयपुर ने ठाना है, साइबर क्राइम को हराना है

BY — August 3, 2026

मेवाड़ बचाओ मंच की डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ अनूठी पहल
उदयपुर। मेवाड़ बचाओ मंच की तीसरी मुहिम उदयपुर ने ठाना है, साइबर क्राइम को हराना है को उदयपुर की जनता को अपार समर्थन मिल रहा है। मंच की ओर से साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उदयपुर में अनूठी जन-जागरूकता मुहिम शुरू की गई है जिसमें पारंपरिक तकनीकी प्रशिक्षण से अलग हटकर भारतीय संस्कृति, आत्मसंयम और व्यवहार परिवर्तन को साइबर सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय बताया गया है। इस अभियान के तहत शहर के कई व्यापारियों, विद्यालयों, सामाजिक संगठनों, कोचिंग सेंटर्स, चौराहों , सार्वजनिक स्थानों पर लोगों बातचीत करके उन्हें समझाया जा रहा है कि साइबर अपराधी पहले मोबाइल नहीं, बल्कि इंसान के मन और भावनाओं को हैक करता है। सत्रों के दौरान यह भी बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें तथा सरकारी बेवसाईट पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से धन वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इससे पूर्व भी मेवाड़ बचाओ मंच की ओर से “उदयपुर का पैसा उदयपुर में” और “व्यापारी 2.0 का वादा दाम कम, सम्मान ज्यादा मुहिम” सफलतापूर्वक पूर्ण की गयी हैं।

मेवाड़ बचाओ मंच के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि मुहिम के अंतर्गत लायंस क्लब, आर्ट ऑफ लिविंग, यूनिवर्सिटी मॉर्निंग योगा क्लब तथा विभिन्न विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में 10 से 12 जागरूकता सत्र आयोजित किए गए हैं, इन सत्रों के माध्यम से 1000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से साइबर क्राइम के बारे में जागरूक किया गया है और इससे बचने के उपाय बताये गये हैं। प्रत्येक सत्र में वास्तविक साइबर फ्रॉड के उदाहरणों के साथ यह बताया गया कि लालच, भय, भावनात्मक कमजोरी और जानकारी का अभाव जैसी मानवीय त्रुटियां ही साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार हैं। किसी भी अनजान लिंक, फर्जी निवेश, लॉटरी, ओटीपी, क्यूआर कोड या त्वरित भुगतान के दबाव में आने से पहले सोचने और सत्यापन करने की आदत विकसित करना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
चूंकि अपराध डिजिटल माध्यम से हो रहे है इस कारण अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लांच किया गया और इसे लेकसिटी में व्यापक समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों पर इस पहल को लगभग 10 लाख लोगों ने देखा और करीब 2 लाख लोगों तक इसका संदेश प्रभावी रूप से पहुँचा है।
पांडेय ने बचाव के कुछ उपाय बताए जिनमें ओटीपी या पिन या फिर पासवर्ड किसी से साझा न करना, हर लिंक की पुष्टि करना, टू स्टेप एंड फेक्टर ऑथेंटिकेषन का उपयोग करना, केवल आधिकारिक ऐप डाउनलोड करना, मजबूत पासवर्ड रखना और किसी भी अनजान क्यू आर कोड को स्कैन न करना जैसी महत्वपूर्ण सावधानियाँ शामिल हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग के सिद्धार्थ पांडे ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस जानकारीप्रद सत्र के बाद साइबर क्राइम और सुरक्षा को लेकर मेरा सोचने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब मैं अपने सामान्य व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव करके भी साइबर अपराधों से आसानी से बच सकता हूँ और अपने परिवार के साथ दूसरों को भी जागरूक कर सकता हूँ। वहीं लायंस सिटी क्लब के अध्यक्ष दीपक वाही ने कहा कि यदि साइबर अपराध से प्रभावी ढंग से लड़ना है तो सबसे पहले अपनी बुनियादी आदतों और मूलभूत सावधानियों को मजबूत करना होगा। मजबूत बेसिक्स ही सबसे बड़ी साइबर सुरक्षा हैं। मंच की ओर से इस मुहिम को लम्बे समय तक चलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सके।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.