उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में स्थानीय व्यापार, रोजगार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए चल रहा मेवाड़ बचाओ मंच का बहुचर्चित जनआंदोलन “उदयपुर का पैसा उदयपुर में” अब नया मुकाम हासिल कर रहा है। व्यापारी 2.0 के नारे “दाम कम, सम्मान ज़्यादा” के साथ शुरू हुआ इस अभियान का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और अब फेज-3 के तहत मंच प्रशासन और सरकार के समक्ष ठोस मांगों के साथ दस्तक देने की तैयारी कर रहा है।

मंच के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि फेज-2 में मंच ने सीधा जनता को केंद्र में रखते हुए जागरूकता अभियान चलाया। इस चरण में युवाओं और महिलाओं पर विशेष फोकस रखा गया, क्योंकि युवा वर्ग इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और महिलाएं घर के बजट की मुख्य नियामक हैं। अभियान के दौरान करीब 5000 लोगों से ग्राउंड पर सीधा संपर्क किया गया, लगभग 8 लाख की ऑनलाइन रीच दर्ज की गई और 1 लाख से अधिक नागरिकों तक संदेश प्रभावी रूप से पहुंचाया गया। इसमें लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं सक्रिय भागीदार रहीं, जबकि 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी लगभग 35 प्रतिशत रही। इसमें व्यापारियों की दुकानों में जाकर हम ऑनलाइन से बेहतर के स्टीकर लगाए और कहा कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। फेज-2 से मिले फीडबैक और जमीनी अनुभव के आधार पर अब मंच ने फेज-3 में सरकार से सीधे संवाद का रास्ता चुना है। पांडेय ने कहा कि केवल व्यापारियों और नागरिकों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नीति-स्तर पर भी बदलाव जरूरी है। इसके लिए मेवाड़ बचाओ मंच ने तीन प्रमुख मांगें तय की हैं पहली, उदयपुर के व्यापारियों के लिए सरकार की ओर से संचालित “नो प्रॉफिट, नो लॉस” लोकल डिलीवरी ऐप की स्थापना, ताकि ई-कॉमर्स मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था के हित में काम करे; दूसरी, एफएमसीजी सेक्टर में ऐसी व्यवस्था, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भी वही थोक दरें मिलें जो बड़ी इंस्टेंट डिलीवरी कंपनियों को मिलती हैं; और तीसरी, गिग वर्कर्स और शहरवासियों की जान को खतरे में डालने वाली 10 मिनट जैसी अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी सेवाओं पर रोक लगाई जाए।
मंच के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि पहले चरण में शहर के 10 से अधिक बड़े बाजारों के व्यापारियों को जोड़ा गया था, जहां यूनिवर्सिटी रोड, ठोकर, सुभाष सर्किल, सेक्टर 14, चुंगी नाका, सूरजपोल, मालदास स्ट्रीट, टूटा दरवाजा, बोहरा गणेश जी और पहाड़ा सहित प्रमुख बाजारों के व्यापारियों ने “सही दाम, बढ़िया गुणवत्ता और आत्मीय व्यवहार” पर आधारित शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। कई व्यापारियों ने ग्राहकों को फ्री डिलीवरी देने की घोषणा भी की थी, ताकि उपभोक्ता स्थानीय बाजार को ऑनलाइन ऐप्स के बेहतर विकल्प के रूप में देख सकें। पांडेय ने कहा कि डार्क स्टोर्स और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स के बढ़ते प्रभुत्व ने स्थानीय व्यापार, छोटे किराणा कारोबार और रोजगार पर सीधी चोट पहुंचाई है। इन ऐप्स के छूट और ऑफर के पीछे छिपे हिडन कॉस्ट के कारण सामान अक्सर स्थानीय दुकानों की तुलना में महंगा पड़ता है, जबकि पैसा शहर से बाहर की जेबों में चला जाता है। उन्होंने दोहराया कि “यह सिर्फ बाजार की लड़ाई नहीं, मेवाड़ की आत्मा और स्थानीय रोजगार की रक्षा का अभियान है।” निधि गुप्ता और डॉ. शिखा दोषी के नेतृत्व में महिला टीमों ने फतेहसागर, सूरजपोल, सुभाष सर्किल, बोहरा गणेश जी, सिख कॉलोनी, ठीकर चौराहा, सुंदरवास, सेक्टर 14, सविना, यूनिवर्सिटी रोड, आयड़, मालदास स्ट्रीट, टूटा दरवाजा, केशव नगर, पायड़ा, आदर्श नगर और प्रताप नगर सहित अनेक क्षेत्रों में जनसंपर्क कर लोगों को अभियान से जोड़ा। लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस मुहिम को जबरदस्त समर्थन दिया और आम नागरिकों ने स्थानीय व्यापार के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया।
मंच संरक्षक सुरेन्द्र दोषी और पदाधिकारियों ने बताया कि फेज-2 के दौरान ग्राहकों से “समर्थन पत्र” भरवाने की पहल भी की गई, जिसमें उपभोक्ताओं ने यह प्रतिज्ञा की कि यदि स्थानीय व्यापारी उचित दाम, अच्छी गुणवत्ता और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखेंगे, तो वे ऑनलाइन ऐप्स की बजाय उदयपुर के व्यापारियों से ही खरीदारी को प्राथमिकता देंगे। मंच ने घोषणा की है कि फेज-3 के तहत शहर के विभिन्न बाजारों और आवासीय इलाकों में 10,000 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए जाएंगे और इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन व सरकार को ज्ञापन सौंपकर इन मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग करेगा। मेवाड़ बचाओ मंच का दावा है कि “उदयपुर का पैसा उदयपुर में” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सम्मानजनक उदयपुर के लिए सामूहिक सामाजिक-आर्थिक संकल्प है, जिसे फेज-3 के माध्यम से नीतिगत स्तर तक पहुंचाने की निर्णायक कोशिश की जाएगी।














