विश्व टीबी दिवस पर पीएमसीएच में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
उदयपुर। भारत को क्षय रोग (टीबी) से मुक्त करने के उद्देश्य से विश्व टीबी दिवस के अवसर पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के श्वसन रोग विभाग द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “हाँ! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं; देशों द्वारा नेतृत्व, लोगों द्वारा संचालित” रखी गई, जो इस बीमारी के उन्मूलन के लिए सामूहिक भागीदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति पर जोर देती है। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला क्षय अधिकारी डॉ. पीयूष सोनी, पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. यू.एस. परिहार, वक्ष एवं क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अतुल लुहाडिया एवं मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश वर्मा द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जिला क्षय अधिकारी डॉ.पीयूष सोनी ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की बारीकियों को समझाया और बताया कि कैसे सरकारी सहयोग और सही निगरानी से इस बीमारी पर लगाम कसी जा रही है।

पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. यू.एस. परिहार ने कहा कि टीबी का इलाज केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को मानसिक संबल और सही जानकारी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारा संस्थान विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सेमिनार के दौरान डॉ.सुनील कुमार ने टीबी मरीजों के प्रति समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि टीबी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि यह एक इलाज योग्य बीमारी है और सही समय पर उपचार लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। साथ ही उन्होंने इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के बारे में भी बताया।
इस अवसर पर डॉ.अतुल लुहाडिया ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को दो हफ्ते से अधिक खांसी, रात में पसीना आना, वजन कम होना या लगातार बुखार की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर इलाज मिलने से न केवल मरीज स्वस्थ हो सकता है, बल्कि समाज को भी टीबी जैसी बीमारी से बचाया जा सकता है। कार्यक्रम में एमबीबीएस के विधार्थीयों के लिए प्रश्नोत्तरी,रंगोली एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सेमिनार में चिकित्सा विशेषज्ञों सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लेकर टीबी उन्मूलन में अपनी भूमिका निभाने की शपथ ली।














