इको फ्रेंडली तरीके से भी हुआ विसर्जन
udaipur. डीजे के कानफोड़ू संगीत के बीच अनंत चतुर्दशी पर शनिवार को गणपति प्रतिमाएं विसर्जित करने के साथ ही गणपति महोत्सव की धूम थम गई। गणेश चतुर्थी के दिन शहर भर के कई इलाकों में गणपति महोत्सव के तहत प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।



अगले वर्ष जल्दी आने का न्योता देकर जुलूस के रूप में विभिन्न क्षेत्रों से गणपति प्रतिमाएं गणगौर घाट सहित गोवर्धन सागर व अन्य सरोवरों पर विसर्जित की गईं। कोई ढोल तो कोई डीजे के कानफोड़ू संगीत के साथ गणपति प्रतिमाओं को जुलूस के रूप में लेकर निकले। और तो और हिन्दू महासेना (टाइगर फोर्स) के कार्यकर्ता तो श्याम बाबा के नेतृत्व में तलवारें हाथ में लेकर निकले और जुलूस के रूप में प्रतिमा का विसर्जन किया।
श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह था। 
युवक-युवतियों का जोश और उत्साह शोभायात्रा की रवानगी से शुरू हुआ जो जलस्रोतों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही थमा। पूरे रास्ते भर गुलाल इतना उड़ी कि शोभायात्रा के रास्ते भी गुलाल से अट गए। यात्रा मार्ग गणपति मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ… के जयकारों से गूंज उठे। करीब एक घंटे की शोभायात्रा के बाद प्रतिमाओं को तालाब पर विसर्जन के लिए ले जाया गया। एएसपी कालूराम रावत के नेतृत्व में पुलिस जाब्ता तैनात रहा। विसर्जन करने वालों ने गंदगी व अन्य कचरा सामग्री वहीं घाट पर ही फेंक दी।


कई परिवारों द्वारा घरों में स्थापित प्रतिमाओं को टू व्हीलर पर और बड़े गणेशोत्सव आयोजनकर्ताओं द्वारा बड़ी झांकियों के रूप में गणेश प्रतिमाओं को झील किनारे ले जाया गया। अनंत चतुर्दशी पर घरों में भी पूजा अनुष्ठान हुए। महिलाओं ने व्रत-उपवास किए गए वहीं समाजों के सामूहिक रूप से उद्यापन के आयोजन भी हुए। शुक्रवार को रात्रि जागरण के बाद शनिवार सुबह प्रसादियों का दौर चला।
मात्स्यकी छात्रों का इको फ्रेन्डली गणपति विर्सजन
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौघोगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय के छात्र एवं छात्रओं ने गणपति स्थापना के आखिरी दिन गणपति विर्सजन का अनूठा उदाहण पेश किया । छात्र एवं छात्राओं ने फतहसागर की पाल पर इको फ्रेन्डली गणपति का फाईबर ग्लास के टैंक में फतहसागर के जल से जलाभिषेक किया। इसके बाद गणपति प्रतिमा को पुन: महाविद्यालय मे ले आये। मात्स्यकी महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं ने उदयपुर के समस्त झील प्रेमियों एवं यहां की जागरूक जनता से झीलों में गणपति प्रतिमा का विर्सजन इकोफ्रेन्डली तरीके से करने का आहवान किया। मात्स्यकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. विमल शर्मा ने छात्रों के प्रयास की सराहना करते हुए छात्रा-छात्राओं की झीलों के संरक्षण की पहल का स्वागत किया। गणेश प्रतिमा के निर्माण में काम आने वाले रंग पानी में घुलकर प्रदूषण छोड़ते हैं और पीने योग्य साफ पानी की झीलें प्र्रदूषित होती हैं।
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Pollution on the name of God…….