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बच्चों ने दौड़ाए कल्पनाओं के घोड़े

BY — October 7, 2015

विद्यापीठ : राष्ट्रीय पुस्तक मेले का पांचवां दिन  
– बच्चों ने विज्ञान कथा लेखन के गुरू सीखे

071005उदयपुर। विज्ञान को सच से जोड़ो, कल्पनाओं के घोड़े दौड़ाओ और उसमें थोड़ी सी मन की बात जोड़कर कहानी लिखो। अपने किरदार खुद बनाओ, उनके सहारो कुरीतियों, सामाजिक विद्रूपताओं पर प्रहार करो, समस्याओं को सुलझाने के नए क्षितिज खोलो।

जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि उदयपुर पुस्तक मेले के पांचवें दिन मेला प्रांगण में सुबह 11 से 1 बजे तक ‘आओ विज्ञान आधारित कहानी लिखें’ कार्यशाला में शहर के विभिन्न स्कूलों से आये बच्चों को यह गुर देवेन्द्र मेवाड़ी (नई दिल्ली) एवं उदयपुर के डॉ. कुंजन आचार्य ने बताए।
कार्यशाला में शामिल शहर के विभिन्न स्कूलों के 300 से अधिक बच्चों ने विज्ञान आधारित कहानियां लिखीं। देवेन्द्र मेवाड़ी ने बच्चों को बताया कि हर चीज के पीछे कोई न कोई विज्ञान छिपा होता है, बच्चों को अंधविश्वास से दूर रह कर अच्छी कहानियों के माध्यम से ज्ञानवर्धन करना चाहिए। डॉ. आचार्य ने बताया कि बच्चों के कोमल मन पर कहानियों का बहुत गहरा असर होता है। विज्ञान की कथाओं में काल्पनिक पात्रों के माध्यम से अच्छा इन्सान बनने और जीवन में हमेशा सकारात्मक रहने का संदेश दिया जाना चाहिए। बच्चों ने एलियन, रोबोट ओर अन्य काल्पनिक पात्रों के माध्यम से सुंदर कहानियों का लेखन किया। एनबीटी के संपादक द्विजेन्द्र कुमार ने बताया कि श्रेष्ठ कहानी को एनबीटी की पुस्तकों में प्रकाशित किया जाएगा। मेले में शाम को ख्यातनाम काटूनिस्ट आबिद सूरती और देवेन्द्र मेवाड़ी ने कार्टून विधा सहित कहानी लेखन व अन्य विधाओं के बारे में बताया।
071006बड़ी संख्या में पहुंचे कद्रदान : रजिस्ट्रार प्रो. सीपी अग्रवाल ने बताया कि मेले के पांचवें दिन भी बड़ी संख्या में पुस्तकों के कद्रदान पहुंचे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी अध्यापकों के साथ मेला प्रांगण पहुंचे मनपसंद पुस्तकों को खरीदा।
कला प्रेमियों के लिए भी है खास : कला प्रेमियों के लिए ललित कला अकादमी दिल्ली, ललित कला प्रकाशन, हिन्दी साहित्य एवं ग्रन्थ अकादमी सहित अन्य प्रकाशकों की की कई संग्रहणीय पुस्तकें भी उपलब्ध हैं।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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