Header Banner

तीन दिवसीय जिनबिम्ब वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव कल से

BY — April 16, 2018

उदयपुर। अन्तर्मना मुनि श्री, मुनि पीयूष सागर के निर्देशन में 18 से 20 अप्रेल तक होने वाले श्रीमद जिनबिम्ब वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ होगा। 18 अप्रेल को अक्षय तृतीया व मुनि पिहूश सागर महाराज का छठां दीक्षा महोत्सव पर सर्वऋतु विलास जैन मंदिर में समारोह होगा।

अन्तर्मना मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि संत के प्रवचन से लोग प्रभावित नही बल्कि उसके आचरण से प्रकाशित होते हैं। आचरण के आचार्य बहुत कम मिलेंगे। जिनके पास आचरण था, उन्होंने कोई उपदेश नही दिया। भगवान राम, हनुमान, ने कोई प्रवचन नही दिए। खाने के लिए जीने वाले आदमी को कुछ भी दे दो, उसका पेट नही भरता।
वे सोमवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भोजन का सम्मान करें। जिसने भोजन का सम्मान किया है, भोजन ने उसको सम्मानित किया है। मालिक लौकी का ज्यूस पीता है और नौकर रसगुल्ला खाता है। जिनके पास अरबों है क्या वो सुखी हैं? हर गरीब अमीर बनना चाहता है। अमीर सुंदर होना, कुंवारी विवाह करना और विवाहित मर जाना चाहता है। सुख का मार्ग धन, सन्यास नही है। जो प्रोजेक्ट लेकर चल रहे हैं, सन्यास का मार्ग भीतर की यात्रा का है। हर व्यक्ति के पास समस्या है। गरीब सोचता है कि क्या खाऊं? अमीर सोचता है कि क्या क्या खाऊं? कोई भी खुश नही है।
मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने 2014 में नागपुर में चातुर्मास के दौरान 32 उपवास किये थे। जैन समुदाय में तप का प्रावधान है इसलिए सभी जैन तीर्थ पहाड़ों पर स्थित है। तुझको तपना होगा, तुझको तजना होगा। 10 जुलाई से 11 जनवरी तक में 33 दिन आहार किया बाकी उपवास किये। सभी साधु सन्यासी बाहर की ओर दौड़ रहे हैं। अंदर की ओर जाना है। भगवान बनने का यही मार्ग है।
आज भोजन न मिले तो जीव तरस जाता है। दिन भर ठूंस ठूंस कर खाने वाले भी मर जाते हैं। उसके बाद हमारी क्या अहमियत है एक मुट्ठी राख की। ऐसा कुछ करो जिएवँ में जो देश, समाजहित में हो। हमारी उपाधि पिच्छी और कमण्डल है।
संत लक्ष्मी और सरस्वती पुत्र दोनों हैं। बड़े बड़े अरबपति संतों के आगे पीछे घूमते रहते हैं। पत्रकार सरस्वती पुत्र हैं। तप सभी रहे हैं लेकिन सभी के तरीके अलग अलग हैं।
मुनि श्री पीयूष सागर ने कहा कि आज लोगों का विश्वास संतों, न्यायालय और सर्वाधिक समाचार पत्रों पर है। इतने न्यूज स्रोत बनने के बाद प्रिंट और ई मीडिया का ही प्रभाव है। लोगों को संस्कारों की ओर लौटने के लिए अन्तर्मना प्रभावित करते हैं। 5 वर्ष बाद यहां वापस प्रवेश किया है। 2013 में सर्वरितु विलास में वर्षायोग किया था। राखी यानी मिट्टी, वो जमीन हो या कलाई की, उसकी रक्षा होनी चाहिए यानी संस्कारों की रक्षा करनी चाहिए। भ्रूण हत्या पर रोक लगनी चाहिए। इन्होंने इस सम्बंध में अद्भुत प्रयास किया। जब जब नमसकार किया है, तब तब चमत्कार हुए हैं। जहां नमस्कार है, वहां प्रेम, शीतलता, स्नेह है। यह हमें झुकना सिखाता है। यह अहंकार को मिटा देता है। पूरा जगत नमस्कार को स्वीकार कर रहा है। उपवास की आराधना की ताकि कोई भूखा न मरे। संसार में खाकर मरने वालों की संख्या ज्यादा है। महीने में एक बार उपवास करना चाहिए। इस रिसर्च पर 2017 में जापान के डॉक्टर को नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया। नाथद्वारा में पहली बार दिगम्बर जैन संत पहुंचे और लोगों को आशीर्वचन प्रदान किया। संत सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जो पसन्द है, उसे प्राप्त करो जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है। थोड़ा झुकना सीखें, सहन करना सीखें और सुनना सीखें।
इससे पूर्व समाज के अशोक शाह ने कहा कि प्रसन्न सागर महाराज ने एक हजार लोगों को निशुल्क सम्मेदशिखर जी की यात्रा करवाई गई थी। टाउनहॉल जाने के बाद विश्वशांति महायज्ञ का कार्यक्रम है। 29 वां दीक्षा महोत्सव इस वर्ष है। 85 हजार किमी की पदयात्रा कर चुके हैं। 186 दिन में सिर्फ 33 दिन पारणा किया। बाकी उपवास रखे। भगवान महावीर के बाद जैन समुदाय में सिर्फ अन्तर्मना प्रसन्न सागर महाराज ने ये इतिहास रचा है।
मुनिश्री को मिली भारत गौरव की उपाधि-ब्रिटिश पार्लियामेंट में गत 13 अप्रेल को संस्कृति युवा संस्थान ने मुनि श्री को भारत गौरव की उपाधि प्रदान की। वियतनाम में भी मुनि श्री को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। उनके प्रतिनिधि के रूप में जयपुर से चार लोग गए थे। प्रतिदिन 30 किमी मुनिश्री चलते हैं।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

Leave a Reply