विशेषज्ञों ने स्पर्म एनालिसिस, क्रायोप्रिजर्वेशन और एडवांस्ड स्पर्म सलेक्शन पर रखे विचार
उदयपुर। इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर) और पेसिफिक मेडिकल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ’स्पर्मः द साइलेंट हाफ’ विषय पर दो दिवसीय मास्टरक्लास का शुभारंभ शनिवार को लाभगढ़ पैलेस रिसॉर्ट एंड स्पा में हुआ। मास्टरक्लास का आयोजन पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य की चुनौतियों और तकनीकी समाधानों पर आधारित था। इस मास्टरक्लास का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य अतिथि डॉ.लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, विशिष्ट अतिथि पीएमयू चेयरपर्सन राहुल अग्रवाल,प्रीति अग्रवाल,आईएसएआर अध्यक्ष डॉ.अमित पटकी,सचिव डॉ.आशा बक्शी,एम्ब्रायोलॉजी चेयर डॉ. चारुदत्त जोशी, पीएमयू प्रेसिडेंट डॉ. एम.एम.मंगल तथा पेसिफिक आईवीएफ की डायरेक्टर एवं मास्टरक्लास की आयोजक डॉ.मनीषा वाजपेयी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि डॉ.लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि वर्तमान समय में पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर चर्चा और शोध अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और यह विषय केवल चिकित्सकों तक सीमित न रहकर आमजन तक पहुंचता है।

पीएमयू चेयरपर्सन राहुल अग्रवाल ने कहा कि पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी हमेशा ऐसे नवाचारी और शोधपरक आयोजनों के लिए तत्पर रही है। यह मास्टरक्लास आने वाले समय में पुरुष प्रजनन चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।”’ आईएसएआर के अध्यक्ष डॉ.अमित पटकी ने कहा कि पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। अब समय आ गया है कि इसे समान महत्व दिया जाए। ‘स्पर्मः द साइलेंट हाफ’ के माध्यम से हम इस चुप्पी को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों में देशभर से आए विशेषज्ञों ने स्पर्म एनालिसिस, क्रायोप्रिजर्वेशन, एडवॉस्ड स्पर्म सेलेक्शन टेक्नोलॉजीज, एवं पुरुष बांझपन के उपचार में नवीनतम तकनीकों पर अपने विचार साझा किए।
मास्टरक्लास की आयोजक डॉ.मनीषा वाजपेयी ने बताया कि पहले दिन देशभर के प्रजनन विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने पुरुष प्रजनन क्षमता से जुड़े नवीनतम शोध, तकनीकों और चिकित्सकीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। मास्टरक्लास के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ.राजीव मेहता ने सिमेन एनालिसिस टू स्पर्म प्रिपरेशनः फ्रॉम डब्ल्यूएचओ बेसिक्स टू वॉशिंग इट राइट”’ पर व्याख्यान देते हुए बताया कि सही तकनीक से स्पर्म की तैयारी करना सफल निषेचन की पहली शर्त है। डॉ.माधुरी पाटिल ने ’फंक्शनल स्पर्म टेस्ट टू क्लिनिकल प्रैक्टिसः डू दे रियली इम्पैक्ट प्रेग्नेंसी आउटकम’ विषय पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आधुनिक परीक्षण विधियां गर्भधारण की संभावना का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मास्टरक्लास के दूसरे तकनीकी सत्र में पुरुष इनफर्टिलिटी के गूढ़ पहलूओ पर चर्चा करते हुए विशेषक्षो ने अपने विचार रखे। इस दौरान डॉ.गौरव मजूमदार ने ’चूज़िंग द चैपिंयनः एडवांस्ड स्पर्म सेलेक्शन’ विषय पर आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी और बताया कि कैसे सही स्पर्म का चयन गर्भधारण की सफलता बढ़ाता है। डॉ.आशा बक्सी ने ’अनएक्सप्लेंड इन्फर्टिलिटीः इज द मेल फैक्टर इन डिसगाइज’ विषय पर बोलते हुए बताया कि अक्सर बिना कारण समझे जाने वाले मामलों में पुरुष कारक छिपा होता है, जिस पर और शोध की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित ’इंटरैक्टिव पैनल डिस्कशन’ में देशभर के प्रख्यात विशेषज्ञों ने लैब और क्लिनिकल प्रैक्टिस के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।












