पाहेर विश्वविद्यालय में नाद योग पर एकदिवसीय कार्यशाला
पाहेर विश्वविद्यालय के योगिक साइंस विभाग द्वारा नाद योग विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के समग्र विकास, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति को ध्यान में रखते हुए आयोजित की गई। कार्यक्रम में योग विभाग के लगभग 50 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और नाद योग के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पहलुओं को गहराई से समझा। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि से किया गया, जिसमें अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री महिमा शाकद्वीपी उपस्थित रहीं।उनके साथ योग प्रशिक्षक मोहित साहू भी उनके साथ रहे।महिमा जी ने अपने संबोधन में नाद योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान तनावपूर्ण जीवनशैली में नाद योग मन और मस्तिष्क को शांत करने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि ध्वनि के माध्यम से साधना करने से व्यक्ति अपने आंतरिक स्वरूप से जुड़ पाता है और आत्मिक शांति का अनुभव करता है।

संचालन कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शुभा सुराना द्वारा अत्यंत कुशलता और सुव्यवस्थित ढंग से किया गया।विषय विशेष महिमा ने प्रतिभागियों को नाद योग की मूल अवधारणाओं, तकनीकों और अभ्यास विधियों से परिचित कराया। उन्होंने यह भी बताया कि नाद योग केवल एक योगिक अभ्यास ही नहीं, बल्कि आत्मा और चेतना के बीच सेतु का कार्य करता है। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. जसवंत मेनारिया ने कार्यशाला के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त बनाती हैं। पूरा कार्यक्रम डॉ. तेज प्रकाश अमेटा के निर्देशन एवं निरीक्षण में आयोजित किया गया। उनके नेतृत्व में योग विभाग निरंतर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। डॉ. अमेटा ने अपने संदेश में कहा कि नाद योग भारतीय योग परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो ध्वनि और स्पंदन के माध्यम से व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतुलन प्रदान करता है।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को नाद योग के सिद्धांत, इतिहास और वैज्ञानिक आधार के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, उन्होंने आंतरिक ध्वनियों को सुनने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों ने इन सत्र में गहरी रुचि दिखाई और उत्साहपूर्वक अभ्यास किया। विद्यार्थियों ने कार्यशाला के अनुभव को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उनके लिए नए अनुभव लेकर आते हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होते हैं। कई विद्यार्थियों ने यह भी व्यक्त किया कि नाद योग के अभ्यास से उन्हें मानसिक शांति, एकाग्रता और आत्मिक संतुलन प्राप्त हुआ। इस प्रकार पाहेर विश्वविद्यालय में आयोजित यह एक दिवसीय नाद योग कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए न केवल एक शैक्षणिक अनुभव रही, बल्कि यह उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुई।















