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हिंदुस्तान जिंक में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता का इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत

BY — June 25, 2026

देबारी, राजस्थान में हाइब्रिड क्रेन की तैनाती से उत्सर्जन में कमी और ग्रीन इंडस्ट्री की ओर बड़ा कदम
कंपनी का नेट-जीरो लक्ष्य 2050 या उससे पहले हासिल करने का संकल्प मजबूत

उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी और शीर्ष सिल्वर उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड राजस्थान के देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर में भारत के पहले 250 मीट्रिक टन क्षमता की इलेक्ट्रिक क्रेन की शुरूआत की है। यह हाइब्रिड मशीन डीजल और बिजली दोनों पर चल सकती है और कंपनी के कम कार्बन ऑपरेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल कंपनी के ग्रीन रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने ऑपरेशन्स में क्लीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कई ग्रीन मोबिलिटी समाधान अपनाए हैं। इनमें भारत की पहली अंडरग्राउंड बैटरी इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रिक एवं एलएनजी लॉजिस्टिक्स फ्लीट शामिल हैं। ग्रीनलाइन मोबिलिटी के साथ मिलकर कंपनी ने राजस्थान का सबसे बड़ा ईवी बल्कर फ्लीट तैयार किया है, जिसमें 40 इलेक्ट्रिक बल्कर शामिल हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए 41 ग्रीन बसों के प्रोजेक्ट के तहत 2 इलेक्ट्रिक बसें भी शुरू की गई हैं। इससे पहले, कंपनी ने रामपुरा आगुचा खदान में 4 इलेक्ट्रिक लोडर भी शुरू किए थे।

इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, “हमारे लिए सस्टेनेबिलिटी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत का पहला 250 मीट्रिक टन इलेक्ट्रिक क्रेन शुरू करना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। हम स्वच्छ तकनीक अपनाकर इंडस्ट्री को ग्रीन और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” यह क्रेन साइट पर उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा। अनुमान है कि यह हर साल लगभग 250.8 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगा, क्योंकि यह पहले हर साल करीब 93,600 लीटर डीजल खपत करने वाले डीजल क्रेन की जगह लेगा। सैनी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, दीपक गर्ग ने कहा कि, “हिंदुस्तान जिंक ने हमेशा सस्टेनेबल माइनिंग में नेतृत्व दिखाया है। हमें इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर गर्व है। यह क्रेन ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा।” 2022-23 में हिंदुस्तान जिंक भारत की पहली कंपनी बनी जिसने सिंदेसर खुर्द खदान में अंडरग्राउंड बैटरी चलित इलेक्ट्रिक वाहन शुरू किए। वर्तमान में कंपनी के पास 250 से अधिक एजएनजी ट्रक हैं, जो खदान से स्मेल्टर तक सामग्री ले जाते हैं। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2050 या उससे पहले नेट जीरो लक्ष्य हासिल करना है। इसके लिए वह रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग बढ़ा रही है, जो अब लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कंपनी 2020 के स्तर के मुकाबले स्कोप 1 और 2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत और स्कोप 3 में 25 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखती है। हिंदुस्तान जिंक ने एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक इकोजे़न ब्रांड भी लॉन्च किया है। कंपनी को एसएण्डपी ग्लोबल कार्पोरेट सस्टेनेबिलिटी ऐसेसमेंट 2025 में लगातार तीसरी बार विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल और माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.