जीवंत हुए लावणी नृत्य और मछुआरा संस्कृति

BY — December 22, 2011

महाराष्ट्र दिवस पर मराठी संस्कृति के दिखे रंग

दही हांडी, नारेली पूर्णिमा, सौंगी मुखवटे ने जमाया रंग

udaipur. हवाला स्थित शिल्पग्राम में ‘‘शिल्पग्राम उत्सव—2011’’ के दूसरे दिन ‘‘महाराष्ट्र दिवस’’ पर महाराष्ट्र प्रांत के त्यौहारों की झलक देखने को मिली जिसमें कोळी नृत्य, लावणी, सौंगी मुखवटे नृत्यों में मराठी जन जातीय और मछुआरा संस्कृति का उत्कृष्ट व सालोना प्रदर्शन किया गया। रंगमंच पर अन्य राज्यों की कलाओं ने भी अपना रंग बिखेरा।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय उत्सव में गुरूवार शाम रंगमंच पर ‘‘माझा महाराष्ट्र’’ की झांकी देख दर्शक अभिभूत हो गये। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय के विशेष दल उदयपुर बुलाया गया जिसने वहां की आदिम एवं लोक संस्कृति को अनूठे अंदाज में दर्शाया। मुक्ताकाशी रंगमंच ‘‘कलांगन’’ पर कार्यक्रम की शुरूआत गुजरात के राठवा आदिवासियों के नर्तन से हुई। गुजरात के छाटा उदयपुर से आये इस दल की महिलाओं व पुरूषों ने ढोल तथा वंशली की लय पर वृत्ताकार करते हुए आकर्षक रचनाएं बना कर दर्शकों को मत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात हरियाणा की बालाओं ने खोडिय़ा नृत्य में ठुमकों से दर्शकों को रिझाया।
रंगमंच पर महाराष्ट्र दिवस की शुरूआत गणपति वंदना से हुई इसके बाद मराठी नव वर्ष गुड़ी पाड़वा, गणपति उत्सव, दही हांडी आदि त्यौहारो का आनन्द देखने को मिला। कार्यक्रम में नारेली पूर्णिमा पर समुद्र को स्वर्ण नारियल भेंट करने की परंपरा का प्रदर्शन दर्शकों को रास आया। इसके बाद कलाकारों ने समवेत स्वर में महाराष्ट्र का गीत ‘‘जय जय महाराष्ट्र माझा, गरजा महाराष्ट्र माझा…’’ की स्वर लहरियाँ बिखेरी। कोंकणा जनजाति के आदिवासियों ने ‘‘सौंगी मुखवटे’’ नृत्य से आदिम संस्कृति की अनूठी छाप छोड़ी। प्रस्तुति में दो कलाकारों ने सिंह का रूप धारण कर अपनी अठखेलियों से दर्शकों को अभिभूत कर दिया।
महाराष्ट्र में मछुआरा समुदाय की संस्कृति होने से शिल्पग्राम के रंगमंच पर कोळी नृत्य की प्रस्तुति सहावनी पेशकश बन सकी। इस प्रस्तुति में मछुआरों का पारंपरिक परिधान धारण किये नर्तकों ने आपसी सामंजस्य से प्रस्तुति को दर्शनीय बनाया। कार्यक्रम में ही उड़ीसा का गोटीपुवा नृत्य दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र रहा जिसमें बाल गोटीपुवाओं ने दैहिक संयोजन व भंगिमाओं से दर्शकों में रोमांच का संचार किया।
महाराष्ट्र से जुड़े गोवा प्रदेश के कलाकारों ने इस अवसर पर समई नृत्य प्रस्तुत किया। गोवा के कला एवं संस्कृति निदेशालय के इस दल ने पीतल के बने दीप स्तम्भ को अपने शीष पर धारण कर विभिन्न नृत्य मुद्राएँ बना कर दर्शकों को गोवा की लोक संस्कृति से रूबरू करवाया। इस अवसर पर ही उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने चरकुला नृत्य पेश कर मथुरा वृंदावन की याद ताजा करवाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर किये जाने वाले इस नृत्य में नर्तकिया अपने सिर पर दीप रख कर नृत्य करती है जिसमें उल्लास उमंग और सौन्दर्य का अनूठा मिश्रण समाहित था। कार्यक्रम में इसके अलावा मिजोरम का सरलामकाई, केरल का ओप्पाना, कालबेलिया तथा गुजरात का डांग नृत्य उल्लेखनीय है।

हाट बाजार में जुटने लगे लोग

यहां शिल्पग्राम में आयोजित शिल्पग्राम उत्सव के दूसरे दिन हाट बाजार में लोगों की आवाजाही प्रारम्भ हुई वहीं मेले में आने वाले लागों ने शिल्प बाजार में शिल्पियों के कलात्मक उत्पादों की टोह ली व मेले का लुत्फ उठाया।    दस दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन गुरूवार को दोपहर में लोगों की आवाजाही प्रारम्भ हुई इनमें कई विदेशी पर्यटक भी मेले को निहारने व लोक संस्कृति के नजारे को दिल में संजोने के लिये शिल्पग्राम पहुंचे। कई सैलानियों ने लोक नृत्यों की झलक को अपने कैमरों में कैद किया वहीं कुछ एक ने मुख्य द्वार के समीप लोक नर्तकों के साथ ठुमके भी लगाये। हाट बाजार में शाम को लोगों के आने का क्रम जारी रहा। हाट बाजार के अवलोकन के साथ—साथ लोगों ने विभिन्न खान—पान की वस्तुओं का भी आनन्द उठाया।

गोवा दिवस शुक्रवार को

शुक्रवार को यहां गोवा दिवस मनाया जायेगा। अरब सागर के तट पर बसा गोवा प्रदेश एक ओर जहाँ अपने सुंदर बीच के लिये विख्यात है वहीं यहां की संस्कृति का अपना अनूठा रंग है। रजत जयन्ती वर्ष के अंतर्गत उत्सव के तीसरे दिन शिल्पग्राम में कला एवं संस्कृति निदेशालय गोवा सरकार के सौजन्य से कला दल अपनी प्रस्तुति देगा।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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