बेणेश्वर धाम पर उमड़ी आस्था

BY — February 7, 2012

लाखों श्रद्घालु जुटे

मेले में एक साधु।

udaipur. जनजाति अंचल के महाकुम्भ और वागड़ प्रयाग बेणेश्वरधाम पर माही तथा सोम-जाखम सलिलाओं के पवित्र संगम तीर्थ पर मंगलवार को आयोजित मुख्य मेले में मंगलवार को समीपस्थ गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के लाखों श्रद्घालुओं ने मेले में शिरकत की। हिन्दुस्तान भर में यह आदिवासियों का सबसे बडा मेला है और इसी कारण इसे ‘वनवासियों का महाकुम्भ’ कहा जाता है।

सीसीटीवी से नजरें रखते पुलिस अधिकारी।

मंगलवार सायं तक मेला स्थल पर  लाखों की तादाद में मेलार्थी मेले की विभिन्न लोक रस्मों और देव-दर्शनादि में हिस्सा लेते हुए इसके विशालता का अहसास कराया। मेला मंगलवार रात भर चलेगा और इस दौरान लोग मौजमस्ती करते हुए मेले का लुत्फ उठाएंगे।
अस्थि विसर्जन : माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर हजारों मेलार्थियों ने अपने मृत परिजनों की मुक्ति की कामना से आबूदर्रा स्थित संगम तीर्थ में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ अस्थियों का विसर्जन किया। इसके अलावा मेले में कल रात से ठहरे हुए मेलार्थी नर-नारियों ने माघ पूर्णिमा का पुण्य कमाने पवित्र जल में डुबकी लगाई। दिन भर मेलार्थियों के संगम तीर्थ की पवित्र जलराशि में डुबकी लगाने का क्रम बना रहा। इन लोगों ने स्नान कर पापमुक्ति तथा आरोग्य की कामना की।
मेले का लुत्फ : मेलार्थियों ने परिजनों के साथ सामूहिक स्नान एवं भोज के बाद बेणेश्वर शिवालय, राधा-कृष्ण मन्दिर, वाल्मीकि मन्दिर, ब्रह्मा मन्दिर, हनुमान मंदिर आदि देवालयों में जाकर देव-दर्शनादि, महंत से आशीर्वाद ग्रहण आदि धार्मिक क्रियाकलापों से फुर्सत पाकर मेला बाजारों से खरीदारी की, प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और करतब देखे, रंगझूलों में बैठकर हवा में तैरने का आनन्द लिया और मेले का पूरा-पूरा लुत्फ उठाया।
शाही स्नान रहा आकर्षण : मेले का मुख्य आकर्षण निष्कलंक भगवान एवं महन्त की पालकी यात्रा एवं संगम पर शाही स्नान रहा। मावजी महाराज की जन्मस्थली साबला के हरि मन्दिर से मंगलवार सवेरे गाजे-बाजे और ढोल-नगाडों के साथ निष्कलंक भगवान एवं महंत अच्युतानंद की पालकी यात्राएं निकली।
खरीदारी की बूम : बेणेश्वर धाम पर मेला बाजारों में मंगलवार को भारी भीड़ उमड़ी। मेला बाजार में वागड़ अंचल के लघु उद्योगों एवं कुटीर उद्योगों की जीवन्त झांकी दिखाई दी।  मेलाबाजारों में छोटे-बड़े भोजनालय, जलपान गृह, मनिहारी, बर्तन, गन्ने के रस, लोहा, काष्ठ, दूध, किराणा, खिलौनों, प्लास्टिक सामग्री, चाय, पाषाण सामग्री, खादी वस्त्र, साज-सज्जा, श्रृगार, जूते-चप्पल, सिले-सिलाए वस्त्र, खाने-पीने का सामान आदि की दुकानों पर भारी भीड़ छायी रही। मेले में ग्रीष्म ऋतु के आगमन से पूर्व मटकों तथा मिट्टी के बर्तनों की खरीदारी का जोर रहा।
सीसी टीवी कैमरों से मॉनिटरिंग : मुख्य मेले को देखते पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी व्यवस्थाओं पर नजरे रखे हुए थे। मेला मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस उपाधीक्षक गजानंद वर्मा आज दिनभर  मेलास्थल पर रहे और व्यवस्थाओं पर न$जर रखी। मेले में सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 16 सीसीटीवी कैमेरों के माध्यम से मेले के विभिन्न भागों पर नज़र रखी गई।
मेलार्थियों के रही व्यवस्थाएं : प्रशासन द्वारा मेले में आने वाले श्रद्घालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष  व्यवस्थाएं की गई हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर मेला मार्गों को पूर्व निर्धारित योजनानुसार चौड़ा रखा गया है और दोनों पुलों पर रैलिंग भी लगाई गई है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस विभाग द्वारा विशेष रूप में साबला से आने वाले रोड पर जगह-जगह ऊची मचाने बनाई गई है जिन पर पुलिसकर्मी मुस्तैदी से सारे मेले पर नजर रख रहे हैं।

मेला स्‍थल का विहंगम द्श्‍य।
भास्‍कर के आगमन पर जलार्पण करते लोग।
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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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