मैं शिक्षक हूं, सौदागर नहीं

BY — May 3, 2012

उदयपुर। जनूभाई जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में साहित्यिक सप्ताह के तहत गुरूवार को लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के तिलक सभागार में जनूभाई द्वारा रचित कविताओं की प्रतियोगिता हुई। कविता प्रतियोगिता में छात्राओं द्वारा मेरे सपनों के द्वारा, मैं शिक्षक हूं सौदागर नहीं, बंशी नित बजती जाती, तेरा आदि और तेरा अंत, मुझे क्या चाहिए इसका मुझे पता नहीं, एक सपना जिन्दगी को जीये जा रही है जिन्दगी, सत् ही है सत सत्य आदि प्रमुख कविताए छात्र—छात्राओं ने प्रस्तुत की।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशि चितौड़ा ने बताया कि  कविता प्रतियोगिता में रश्मि उपाध्याय प्रथम, मीना द्वितिय तथा सुमन तृतीय रही। इन कविताओं के माध्यम से पं. नागर के आदर्श मूल्यों को आत्मसात करने तथा विचारों को मस्तिष्क में संग्रहित करने का संदेश देती है। अंत में विजेताओं को पारितोषिक वितरण किया। संचालन तन्मगय पालीवाल तथा धन्यवाद रेणु हिंगड़ ने दिया।

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