असली रत्न ही शरीर के लिए प्रभावी

BY — July 21, 2012

उदयपुर। मेवाड़ टेस्टिंग लेबोरेट्री के जेमालोजिस्ट मनीष धर्मावत ने कहा कि वर्तमान में लगभग सम्पूर्ण ज्योतिष रत्नों पर ही टिका हुआ है और ऐसे में जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए रत्नों को जांच परख कर ही पहनना चाहिए क्योंकि नकली या सिन्थेटिक रत्न पहनने पर वे शरीर की परेशानियों को दूर नहीं पाते है जो कि असली करते है।

वे कल रोटरी क्लब एलिट द्वारा होटल गोरबन्ध में आयोजित रत्नों से होने वाले चमत्कार विषयक वार्ता में बोल रहे थे। उन्होनें कहा कि गत 5 वर्षो में बाजार में सिन्थेटिक रत्नों का प्रचलन काफी बढ़ा है क्योंकि वे इतनी उच्च गुणवत्ता वाले होते है कि उनके सामने असली रत्न भी फीके दिखाई देते है। जनता असली रत्नों की जांच को लेकर अब जागरूक होने लगी है। टेस्टिंग लेबोरेट्रीज में प्राकृतिक रत्नों की जांच तो होती ही है साथ उन्हें उसके ट्रीटमेंट व उसके ओरिजन के बारें मे भी बताया जाता है।
धर्मावत ने कहा कि यदि रत्न उच्च गुणवत्तायुक्त प्राकृतिक हो तो निश्चित रूप से वे जीवन में आने वाली परेशानियों से निजात दिलाते है। इसके अलावा प्राकृतिक रूद्राक्ष भी जीवन को काफी प्रभावित करता है। पिछले 5 वर्षो में भी इस क्षेत्र में काफी परिवर्तन आया है। जनता आज भी कम कीमत पर श्रेष्ठ वस्तु की चाह रखती है लेकिन वह यह भूल जाती है कि सस्ती वस्तु असली नहीं हो सकती है।
इससे पूर्व क्लब सचिव पुनीत सक्सेना ने कहा कि रत्नों को जंाच परख कर ही पहनना चाहिये ताकि असली के चक्कर में नकली नहीं पहन लें। क्लब उपाध्यक्ष यशवन्त मण्डावरा ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रारम्भ में अंजली दुबे ने ईश वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर पर दिलीपसिंह,आशीष चेर्डिया,आनन्द दमानी,लवकुश जवेरिया,निधि सक्सेना, प्रवीण गंाधी सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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