गीतांजलि मेडिसिटी में अब कैंसर का इलाज संभव

BY — September 2, 2012

कैंसर के रोगियों का सफल ऑपरेशन

उदयपुर। अब कैंसर के रोगियों को उदयपुर छोड़कर कहीं जाने की जरूरत नहीं। इसका इलाज उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल में भी उपलब्ध है। गत दिनों में यहां किए गए कई ऑपरेशनों में सफलता का रेशियो लगभग शत-प्रतिशत रहा है।

director Ankit Agarwal

गीतांजलि हॉस्पिटल परिसर में पत्रकारों से बातचीत में निदेशक अंकित अग्रवाल ने बताया कि अग्‍न्‍याशय से कैंसर की गांठ निकालने का साढे़ सात घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन, कंधे के कैंसर का ऑपरेशन, गले से कैंसर की गांठ आदि के भी यहां सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जनता में जागरूकता की जरूरत है। राजस्थान में कैंसर की कोई हिस्ट्री  नहीं है। इसी प्रकार कैंसर रोग के लिए कोई गाइड लाइन नहीं है। अमूमन ब्रेस्ट, सर्विक्स (बच्चेदानी के मुंह) तथा प्रोस्टेट कैंसर के अधिकतर मामले सामने आते हैं। इन्हें भी रोका जा सकता है अगर समय पर स्क्रीनिंग कराई जाए तो।

Dr. Ashutosh soni, plastic surgeon

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि भीलवाड़ा के राजाजी का करेड़ा के रेह निवासी 55 वर्षीय मदनलाल पेट दर्द से काफी परेशान थे। विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद वे काफी परेशान थे। यहां आने पर उनका ऑपरेशन किया गया। अग्‍न्‍याशय से कैंसर की गांठ निकाली गई। इसके लिए किया गया ऑपरेशन करीब साढे़ सात घंटे तक चला।

Dr. Prashant sharma

उन्होंने बताया कि कैंसर के मरीज नहीं बचने का कारण सिर्फ और सिर्फ जागरूकता का अभाव है। पुरुषों में 40 वर्ष एवं महिलाओं में 21 वर्ष की आयु के बाद अमूमन वर्ष में एक बार स्क्रीनिंग (जांच) करवानी चाहिए ताकि अगर कैंसर हो तो पता चल जाए और समय पर उसका उपचार किया जा सके। अमूमन अंतिम स्टेज पर पहचान होती है और मरीज आता है तब तक उसका इलाज मुश्किल हो जाता है। कंधे से निकाली गई कैंसर की गांठ में अमूमन आदमी को अपाहिज होना पड़ता है लेकिन कंधे की हड्डी निकालकर हमने यहां प्रोलीन मैश लगाया। यह एक प्रकार का जुगाड़ है। यह स्टील का इंस्ट्रूमेंट अगर लगाया जाता तो करीब डेढ़ लाख का आता है जबकि इलाज सहित करीब 40 हजार में यह पूरा केस निपट गया।
प्रेस वार्ता में मौजूद गीतांजलि के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन एवं बर्न विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष सोनी ने बताया कि जिस प्रकार कैंसर रोग विशेषज्ञ का काम है खराब चीज को हटाना वहीं साथ ही हमारा काम है हटाई गई चीज की जगह पुनर्निर्माण करना। गुजरात में एक खेत में कार्य करते समय हुए विस्फोसट से एक किसान का चेहरा पूर्णत: विकृत हो चुका था। उसे यहां लाया गया। उसके चेहरे की काफी उत्तिकाएं नष्ट हो चुकी थीं। करीब छह घंटे चले ऑपरेशन के बाद उसके चेहरे को नया आकार दिया गया। ऑपरेशन के बाद बिगड़े हुए अंगों का हम निर्माण करते हैं। इसमें कोई प्लास्टिक नहीं लगाया जाता बल्कि मरीज के शरीर के ही अन्य हिस्सों से त्वचा निकालकर उक्त अंग का निर्माण किया जाता है। प्रेस वार्ता में प्राचार्य डॉ. प्रमिला बजाज भी मौजूद थीं।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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