झीलों में जलकुंभी ने बिछाया जाल

BY — December 1, 2012

झीलों की सतत सफाई की आवश्यकता

udaipur. उदयपुर की झीलों की सुन्दरता एवं जलीय गुणवत्ता को बनाये रखने के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमारियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित वार्ता में झीलों में गिरने वालें नालों,  सीवरेज तथा जलकुंभी तथा जलीय घास के विस्तार पर चिन्ता व्यक्त की गई।

झील संरक्षण समिति के सयुंक्त सचिव अनिल मेहता ने कहा कि कुम्हारिया, रंग सागर, स्वरूप सागर तथा पिछोला की सतत् सफाई की जरूरत है। इन झीलों में पनप रहीं जलकुंभी और जलीय घास को तत्काल रोकनें की जरूरत है। चान्दपोल नागरिक समिति के तेजशंकर पालीवाल ने कहा कि सीवरेज के मेन हाल से प्रदूषित हो रही पिछोला को बचाने की जरूरत है। झीलों की सफाई के लिये झील आधारित सफाई की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिये। ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने कहा कि झीलें शहर का प्रमुख पेय जलस्त्रोत है। पानी की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिये प्रशासन को झील सोन्दर्यकरण के साथ ही जलीय गुणवत्ता बनी रहे उस प्रयासों की जरूरत है। संयोजन करते हुये नितेश सिंह कच्छावा ने बताया कि एकलव्य कॉलोनी से आने वाले नाले पर जब तक सीवरेज व्यवस्था पुक्ता हो जाये तब तक अस्थाई सीवर पम्प लगाना उचित होगा।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

One Response

  1. Do we have enough resources to clear the lakes or prevent pollution? If the mechanism of natural purification is provided by nature then why to remove it? This species develops only when there is sufficient nutrients in the water body. The water experts should highlight the alternative (mechanical or other natural) mechanisms which replaces the ability to purify the water of the water bodies of Udaipur.

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