राज्य भर के लेखकों को प्रकाशन के लिए आर्थिक मदद

BY — December 31, 2012

55 पांडुलिपियों के लिये 5.85 लाख रु. का प्रकाशन सहयोग

writersUdaipur. राजस्थान साहित्य अकादमी की ’पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग‘ योजनान्तर्गत इस वर्ष 55 पांडुलिपियों पर उनके लेखकों को कुल 5.85 लाख रु. का प्रकाशन सहयोग स्वीकृत किया गया है।

अकादमी अध्यक्ष वेद व्यास ने अवगत कराया कि इस वर्ष 55 पांडुलिपियों पर 5.85 लाख रु. का सहयोग स्वीकृत किया है। मन कहता है (सुमन गौड़, वनस्थली), कवि संध्या (दीप मेहरोत्रा, जयपुर), …. मगर देख रहा हूंॅ (असद अली ’असद‘, बीकानेर), नटखट नन्ही (सुधा कुलश्रेष्ठ, जयपुर), सतरंगी आकाश (शहनाज फातमा, टोंक), हे मनु! (मधु आचार्य, बीकानेर), अंधेरे का दरख्त (गोकुल गोस्वामी, जयपुर) प्रत्येक को 15000-15000 रु. का सहयोग स्वीकृत किया गया है।
श्री व्यास ने बताया कि कविता (डॉ. नटवर लाल माथुर, जोधपुर), सूर्पणखा (ओम प्रकाश गर्ग,  बाडमेर), थोडी़ सी रोशनी के लिए (इस्माईल निसार, डूंगरपुर), अंजुरी भर प्रीति (रजनी मोरवाल, जयपुर), वन स्पंदन (डॉ. राधिका लढ्ढा, उदयपुर), गहरे घाव (अब्दुल समद राही, सोजत सिटी), कब कहता है सूरज मुझको देखो (डॉ. रामावतार शर्मा, अलवर), मन मुक्तक (किरण बाला जीनगर, उदयपुर), नुमाईश-ए-गजल (प्रतापचन्द्र, बाडमेर), लोग मिले हैं (बनवारीलाल खामोश, चूरू), कल्पवृक्ष (हेमन्त गुप्ता, कोटा), कवि होने की जिद में (डॉ. सत्यनारायण सोनी, परलीका), पलाश की पाती पर (घनश्याम सिंह भाटी, बाँसवाडा), दौर-ए-हालात (आनन्द वि. आचार्य, बीकानेर), घूंघट से झांकती शायरी (मुन्नी शर्मा, अजमेर), हँसो भी … हँसाओ भी (हलीम आईना, कोटा), तपती रेत पर (अलका भटनागर, जयपुर), मैं अभी कहां बोला (जाकिर अदीब, बीकानेर), डॉ. कैलाश मण्डेला, शाहपुरा की पुस्तरक, एक शिव के दो परिणाम (अर्चना बंसल, भरतपुर), हरी हरी खुशबू और काली गौरैया (मोनिका गौड, बीकानेर), फूल भी, कुछ शूल भी (खुर्शीद नवाब, उदयपुर), झर झर निर्झर (किरण राजपुरोहित, जोधपुर), शाम फिर क्यूं उदास है दोस्त (डॉ. कुमार गणेश, जयपुर), जिन्दगी तुम (डॉ. वीणा अग्रवाल, कोटा), मेरे हिस्से की धूप (भारती, सीकर),अभी बस इतना (आनन्द विद्यार्थी, जयपुर), मासूम ख्वाहिशें (स्वाति, कोटा), बीते दिनों के छूटे पन्ने (लोकेश शुक्ल, जयपुर), भीड़ में तन्हाइयाँ (डॉ. रमेश अग्रवाल, अजमेर), उठती उर्मियां (कुमुद पोरवाल, उदयपुर), झरोखे झाँकते बादल (मनोरमा शर्मा, जयपुर), लिखना कि जैसे आग (श्री विजय सिंह नाहटा, जयपुर), चलते-चलते (डॉ. राजेन्द्र तेला, अजमेर), अनहदनाद (पुष्पा गोस्वामी, जयपुर), एक रुका हुआ फैसला (प्रेम कोमल बूलियां, उदयपुर), एक समंदर रेत का (अब्दुल रशीद, उदयपुर), बहू की खुशी एवं अन्य कहानियाँ (डॉ. करुणा दशोरा, उदयपुर), उन्हा-थ्री तथा अन्य कहानियाँ(डॉ. संदीप अवस्थी, अजमेर), एक भूल (मधु खण्डेलवाल, अजमेर),शिक्षाप्रद मनोरंजक कहानियां (नारायणसिंह सिसोदिया, पाली), मिट्टी की दीवार (श्री प्रभात, सवाई माधोपुर), मार्निंग वाक (पुरुषोत्तम पंचोली, कोटा), आधा आकाश (रणवीर सिंह राही, जयपुर), मंथन की बूंदें (तन्मय पालीवाल, नाथद्वारा), भारत में नाट्य विकास (ओम जोशी, बाड़मेर), शब्दों में डूबने का आनन्द (डॉ. गोविन्दशंकर शर्मा, जयपुर), फिर कभी बतलायेंगे (माधव नागदा, राजसमन्द), प्रत्येक पांडुलिपि पर 10000-10000 रु. का सहयोग स्वीकृत किया गया है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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