Udaipur. पहले पिता और अब पुत्र भी। पिता ने देहदान किया तो पुत्र ने भी उन्हीं की राह पर चलकर देहदान का संकल्प किया और उसकी मृत्यु के बाद उनकी देह मेडिकल कॉलेज को सौंप दी गई।
मामला उदयपुर के ख्यातनाम बंशी उस्ताद और उनके पुत्र रामेश्वरलाल सोनी का है। बंशी उस्ताद हेमराजजी का अखाड़ा के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। उनकी देह 1998 में मेडिकल कॉलेज में दान की गई थी। बुधवार को किडनी फेल हो जाने से उनके पुत्र रामेश्वरलाल की भी मृत्यु हो गई। वे 64 वर्ष के थे। मेडिकल कॉलेज के सम्बन्धित विभाग को उनकी देह सौंपी गई। वे रसद विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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