शिक्षा से ही अच्छे समाज का निर्माण संभव : नादिरा

BY — August 21, 2013

विद्यापीठ स्थापना दिवस पर ‘‘समाज विभूति व ‘‘उत्कृष्ट सेवा सम्मान से नवाजा

210802Udaipur. मशहूर थियेटर अभिनेत्री नादिरा बब्बर ने कहा कि जिस तरह कहानी के बिना नाटक की कामयाबी सम्भव नहीं होती, उसी तरह अच्छे समाज के निर्माण की जिम्मेदारी में शिक्षा की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

वे बुधवार को जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के प्रतापनगर स्थित कम्प्यूटर आईटी सभागार में विद्यापीठ के 77वें स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थी। उन्होंगने कहा कि नाटक दर्शक के लिए किया जाता है, स्वयं के लिए नहीं, यदि नाटक से कहानी गायब हो जाएगी तो उसकी कामयाबी मुश्किल है, उसी तरह देश ओर समाज को आगे बढा़ने हेतु मूल्यपरक शिक्षा की जरूरत है। यह मूल्यपरक शिक्षा हमारे युवाओं को मिलनी चाहिए, तभी शिक्षित तथा सभ्य समाज का निर्माण होगा।
210803नादिरा ने कहा कि थियेटर के लिए अब भी सम्भावनाएं मरी नहीं है। टीवी धारावाहिकों और फिल्मों के लिये आज भी नाटक परफेक्ट नर्सरी हैं। ये तो कलाकार को ही तय करना है कि वह किस दिशा में जाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि मन की सच्चाई व समर्पण भाव से कार्य करे तो युवा वर्ग थियेटर से जुड़कर फिल्मी दुनिया में भी जा सकता हैं। वहां उसे जगह न मिले तो टीवी धारावाहिकों में तो काम मिलेगा ही। यह बात सच है कि रंगमंच में पैसा कम है।
आरम्भ में ध्वजारोहण किया गया, अतिथियों से मॉच सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया। संस्था गीत कुम्भा कला केन्द्र के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
210804मूल्य बोध के लिये हुई स्थापना : समारोह का शुभारम्भ करते हुए कुलाधिपति प्रो. भवानी शंकर गर्ग ने कहा कि स्व. नागर ने साक्षरता, बेहतर शिक्षा तथा मूल्य बोध के लिये विद्यापीठ की स्थापना की। वे शिक्षा, स्ततंत्रता को लोकतंत्र के लिये जरूरी मानते थे। उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को साक्षर व प्रबुद्ध बनाने के लिए जीविकोपार्जन करने के लिये तैयार करना था लेकिन वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के सभी पहलुओं से व्यापक बनाना और विस्तृत करना था।
योजनाओं का क्रियान्वयन कर चुकाएं ऋण
प्रख्यात न्यूरो सर्जन डॉ. अनिरूद्ध पुरोहित ने कहा कि आदर्श, ममत्व, पितृत्व, मातृत्व तथा सहनशीलता के सभी गुण हमारे भारतीयों में है।  जन्नू भाई ने जो योजनाएं बनाई थी  उसके क्रियान्वयन को लेकर कार्यकर्ताओं को मुस्तैदी अपनानी चाहिये तभी गुरू शिष्य परम्परा के तहत हम जन्नू भाई का ऋण अदा कर सकेंगे। जन्नू भाई को ऐसे ही कुल पुत्रों से आस थी जो संस्था को समाजहित में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
सभ्यता व संस्कृति का वाहक है राजस्थान
सुप्रसिद्ध कवि पण्डित नरेन्द्र मिश्र ने कहा कि राजस्थान के कण कण में त्याग, तपस्या , बलिदान, गीत संगीत, भाषा, लोक कथाएं, इतिहास,  रचा बसा है। आज हमें पाश्चात्य संस्कृति को छोडकर हमारी भारतीय संस्कृति को अपनाना होगा।
करना है आत्म चिन्तन
अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने बताया कि यह दिवस बीते वर्षो में किये गए कार्यो का मूल्यांकन तथा नवीन दायित्व बोध का है और हमारी भूमिका को फिर से परिभाषित करने का है। संस्थापक जन्नू भाई का सम्पूर्ण ग्रामीण समुदाय के स्थान का जो सपना था, उसको आज हमें पूरा करना है। साथ ही प्रौढ़ शिक्षा, महिला एवं बाल शिक्षा, आंगनवाडी़, जनसंख्या शिक्षा, सामाजिक सरोकार, पर्यावरण तथा ग्रामीण समुदाय के लिए रोजगारोन्मुखी कार्यों का लाभ ग्रामीण समुदाय को देना है।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए पूर्व आयकर आयुक्त एस. सी. पारीख ने कहा कि विद्यापीठ की नई पीढी़ ने जन शिक्षण द्वारा समुचे मेवाड के ग्रामीण समुदाय के काम हाथ में लिये है उन्हें पूर्ण करना है, तभी पण्डित नागर का सपना पूरा होगा। विशिष्ट अतिथि राजीव गांधी जनजाति विश्वविद्यालय के कुलपति टी. सी. डामोर, कुलप्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने भी विचार व्यक्त किए। चांसलर संदेश का वाचन डॉ0 लक्ष्मी नारायण नन्दवाना ने किया। संचालन डॉ. हिना खान ने किया।
समाज विभूति सम्मान तथा उत्कृष्ट सेवा सम्मान
कार्यक्रम के दौरान कुलाधिपति प्रो. गर्ग, कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने समाज विभूति सम्मान नादिरा बब्बर, प्रो. के. के वशिष्ठा, कीर्ति डामोर, डॉ. अनिरूद्ध पुरोहित, कवि पण्डित  नरेन्द्र मिश्र, अम्पायर रघुवीरसिंह राठौड तथा चमनसिंह को प्रशस्ति पत्र, 11 हजार का चेक, शॉल तथा उपरणा से नवाजा गया। इसी तरह शेष कार्यकर्ता रतन सिंह, हीरालाल चौबीसा, डॉ. देवेन्द्र आमेटा, डॉ. सुनितासिंह, रंजना अग्रवाल और रजिस्ट्रार डॉ. प्रकाश शर्मा को को प्रशस्ति पत्र, 5 हजार का चेक, तथा शॉल तथा उपरणा से नवाजा गया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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