अति आवश्यक है इको सेंसिटिव प्लांटेशन

BY — April 4, 2014

पेसिफिक में पोस्‍टर व फोल्डर का विमोचन

040416उदयपुर। पेसिफिक विश्वविद्यालय पर्यावरण सहिष्णुता क्लब द्वारा नगर के नागरिकों एवं संस्थाओं में पर्यावरण सहिष्णु वृक्षारोपण (Eco-Sensitive Plantation) के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पोस्टर व फोल्डर का विमोचन पाहेर सचिव राहुल अग्रवाल ने किया।

विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित समारोह में इस पोस्टर के विमोचन अवसर पर आकाशवाणी केन्द्र निदेशक माणक आर्य, योग गुरु देवेन्द्र अग्रवाल एवं विश्वविद्यालय के प्रेसीडेण्ट भगवती प्रकाश शर्मा भी मौजूद रहे। पोस्टर का विमोचन करते हुए आर्य ने क्लब की पहल को सराहते हुए कहा कि आज जबकि हर तरफ से पर्यावरण सन्तुलन पर प्रदूषणकारी प्रहार हो रहे हैं, उस समय इस दिशा में किया जा रहा विश्वविद्यालय का यह प्रयास प्रासंगिक है।
पाहेर सचिव राहुल अग्रवाल ने कहा कि पेसिफिक विश्वविद्यालय हमेशा ही पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहा हैं और पेसिफिक विश्वविद्यालय पर्यावरण सहिष्णुता क्लब का गठन इसी उद्दद्देश्य से किया गया है।
प्रेसीडेन्ट शर्मा ने असंतुलित वृक्षारोपण के कारण बढ़ रहे पारिस्थितिकीय असन्तुलन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ज्यादातर संस्थाएं एवं नागरिक, पौधरोपण करते समय एक ही प्रकार के वृक्ष जैसे नीम, अशोक, अमलतास आदि का बडी संख्या में रोपण कर देते हैं। इससे क्षेत्र विशेष के पर्यावरण में असन्तुलन कायम हो जाता हैं। ऐसा करने से पक्षियों, पर्यावरण-मित्र कीटों व सूक्ष्मजीवियों को वर्ष भर आहार भी नहीं मिल पाता हैं। इसी कारणवश उनकी संख्या में भी निरन्तर गिरावट आ रही हैं।
क्लब सदस्यों ने अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला कि वृक्षारोपण करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी स्थान विशेष में सही सयोजन (Combination) करके ऐसे पौधे लगाए जाएं जो ऋतु चक्र से हर मौसम में फलते हैं। अनेक वृक्ष ऐसे है जो विविध पौधों में निषेचन (Pollination) के लिए सहयोगी कीटों को आश्रय व आधार प्रदान करते हैं। इसी प्रकार पलाश जैसे कई पेड़ मिट्टी की जल संधारण क्षमता को बढ़ाते हैं। अनेक वृक्ष व पौधे औषधीय महत्व के होते हैं। कई वृक्ष मिट्टी की उर्वरा शक्ति मे वृद्धि कर उसे ज्यादा उपजाऊ बनाते हैं। अमरूद, सीताफल, अनार, बेर, इमली, करौदा आदि वृक्ष ओैर पौधे-पक्षियों को आश्रय एवं आहार देने में अत्यन्त सहायक है। यह भी ध्यान रखने योग्य है कि कुछ पेड़-पौधे ऐसे भी हैं जो कार्बन डाइ ऑक्साइड के अलावा प्रदूषणकारी अन्य रसायनों को भी सीख कर पर्यावरण परिशोधन का काम करते हैं। पीपल, कदम्ब, बरगद, बेल, तुलसी आदि पौधे जिन्हें पवित्र माना गया है वे इसी श्रेणी में आते हैं। इस अवसर पर संकाय अधिष्ठाता प्रो. महिमा बिरला, क्लब संयोजक प्रो. नयना पोरवाल तथा क्लब समन्वयक प्रो. मनोज कुमावत ने भी विचार व्यसक्त  किए। कार्यक्रम में बडी संख्या में छात्र-छात्राएं, फैकल्टी सदस्य एवं अतिथि उपस्थित थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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