‘कड़वी दवा‘ के नाम पर जनता को ‘जहर‘!

BY — June 23, 2014

रेल भाडे़ में बढ़ोतरी पर माकपा का प्रदर्शन

230610उदयपुर। केन्द्र सरकार को देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर जनता को कड़वी दवा के बजाय जहर देकर उन्हें् मारने पर उतारू बताते हुए इसके विरोध में रेलवे स्टेशन पर माकपा कार्यकर्ताओं ने चेटक एक्सप्रेस के सामने प्रदर्शन किया। ट्रेन को करीब 10 मिनट तक रोका गया।

उन्होंने भाजपा के नेताओं द्वारा रेल किराया बढ़ाये जाने के लिए पिछली यूपीए सरकार के प्रस्ताव को लागू कर रेल किराया बढ़ाने का समर्थन करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश की जनता ने भाजपा को यूपीए की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ वोट देकर देश की बागडोर उनके हाथों में दी, लेकिन वही भाजपा सरकार यूपीए सरकार की नीति को किस मुंह से लागू कर रही है? सिंघवी ने कहा कि देश को बचाने एवं अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए आखिर कब तक आम जनता की ही कुर्बानी ली जाएगी।
माकपा पार्षद राजेश सिंघवी ने कहा कि भाजपा ने ’अच्छे दिन आने वाले है‘ का जनता से वादा कर वोट लिये, लेकिन अब वह यात्री किराया एवं मालभाड़ा बढ़ा जनता पर भारी कहर ढा रही है। उन्होंने कहा कि अब भाजपा द्वारा धोखा देकर वोट लिये जाने पर भाजपा सहित देश के वोटर अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया, जिसे ’काला दिन‘ नाम से याद किया जाता है, उसी तरह 25 जून 2014 को भी ’एक और काला दिन‘ नाम से याद किया जाएगा।
इस अवसर पर ठेला व्यवसायी एकता यूनियन के सचिव चन्द्र किशोर वर्मा ने कहा कि मोदी जी ने देश की जनता के सामने चाय बेचने वाले की भावुक अपील कर वोट लिये, अब वही मोदी जी देश की जनता को पान वाले की तरह चूना लगा, उनके जख्मों को गहरा कर रहे हैं। इस अवसर पर भीम सिंह सिसोदिया, ललित मीणा, रामचन्द्र राव, गुमान सिंह, के.आर.सिद्दीकी, इब्राहिम खेरादी, अतर सिद्दीकी, मुनव्वर खां, शमशेर खां, कच्ची बस्ती फैडरेशन के प्रताप सिंह देवड़ा, नूर खां, टेम्पो चालक यूनियन के वजीर बेग, प्रेमचन्द शर्मा, महिला समिति की श्रीकान्ता श्रीमाली, केसर बाई, ठेला व्यवसायी एकता यूनियन के निजाम, आवास अधिकार समिति की सुमन गमेती, भूरी बाई, तुलसी बाई, सहित सैंकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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