Header Banner

बीमारियों की जड़ है गाजरघास : सक्सेना

BY — September 17, 2014

उन्मूलन के लिए संयुक्त हो प्रयास

170904उदयपुर। नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव सक्सेना ने कहा कि इन दिनों वायरल से रोगियों की संख्या में तीव्रता देखने को मिल रही है। इसके पीछे एक कारण खाली पड़े भूखण्डों एवं शहर में बारिश के बाद तेजी से पनपती गाजरघास भी है। तेजी से फैल रहे रोगों की मुख्य जड़ गाजरघास है। इसके उन्मूलन के लिए चित्तौेड़ पालिका की तर्ज पर एक रुपए प्रति किलो गाजर घास खरीदने जैसी किसी योजना पर काम करना चाहिए जिससे आमजन को राहत मिले। इसके लिए क्लब, निजी या सरकारी स्तर पर समिति बनाई जानी चाहिये।

वे कल रोटरी क्लब एलिट द्वारा मौसमी बीमारियां विषयक आयोजित बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। पारथेनियम हिस्टेरोफोरम यानि गाजरघास परिवार का फूल देने वाला एक प्रकार का पौधा है जो प्रतिवर्ष बारिश के बाद तेजी से हानिकारक पतवार के रूप में विकसित होता है। अमेरिका, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया व एशिया के देशों में बहुतायत में पाये जाने वाले इस पौधे से अदृश्य परागकण निकलते है जो मनुष्य के सम्पर्क में आते ही उस पर नाक एवं आंखों से पानी निकलना, लगातार छींके आना, आंखों का लाल हो जाना, गले में खराश आना, गले में कांटे चुभना, कान में खुजली आना, अस्थमा का अटैक आने के अतिरिक्त चमड़ी पर खुजली चलने जैसे लक्षण प्रभाव डालते हैं जो साधारण दवाओं से ठीक नहीं होते है।
उन्होंने बताया कि गाजरघास से बचाव के लिए व्यक्ति अपने चारों पनपी गाजरघास को जड़मूल से नष्ट करें और समय-समय पर निगरानी कर इसको नष्ट करते रहना चाहिये। खाली भूखण्डों में पायी जाने वाली इस घास के इर्द-गिर्द रहने वालों को चेहरे पर मास्क लगाकर रखना चाहिये। साथ ही चिकित्सक से उचित परामर्श कर उपचार लेना चाहिये। डॉ. सक्सेना ने बताया कि विभिन्न देशों में इसके निर्मूलीकरण के लिए सरकार की ओर से अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे है। पंजाब व हरियाणा सरकार ने इसके निर्मूलीकरण के लिए प्रोजेक्ट बनाया हुआ है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की भी राय लेनी चाहिये। उन्होंने बताया कि चित्तौडग़ढ़ नगर परिषद ने गाजरघास के निर्मूलीकरण के लिए जनता को प्रोत्साहित करने हेतु गाजरघास लाने पर प्रतिकिलो एक रूपया दे रही है ताकि शहर से न केवल गाजरघास का सफाया हो वरन् शहरवासी स्वस्थ रह सकें। गाजरघास एकत्रित करने के बाद इसे जलाया जाता है। क्लब अध्यक्ष पुनीत सक्सेना ने बताया कि जनता को स्वस्थ एंव तंदुरूस्त रखने के लिए क्लब गाजरघास के निर्मूलन के लिए हरसंभव सहयोग करने को तैयार है। इस अवसर पर सचिव बसंत सागर ने भी विचार व्यक्त किए।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

One Response

  1. मेरे हाथ मे फफोले और बहुत ज्यादा खुजली होने लगी है, लाल लाल दाने भी निकल आये है, दो दिन पहले मैने गाजर घास को उखाडा़ था उसी दिन से मुझे ये तकलीफ शुरू हुई है, कृपया इसका ईलाज बताये,,, अगर ईलाज संभव ना हो तो खुजली कम करने का भी कोई ऊपाय बताये, मै काफी परेशान हु..

Leave a Reply