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प्रीति सुप्रेक्षा तो सोनिया साध्वी सम्प्रेक्षा बनी

BY — November 9, 2014

राष्ट्रसंत गणेशमुनि ने करेमी भन्ते का पाठ पढ़ाकर दी दीक्षा

091112उदयपुर। श्री वर्धमान जैन श्रावक समिति उदयपुर द्वारा गुरू पुष्कर साधना केन्द्र के सानिध्य में रविवार को हिरणमगरी से. 4 स्थित विद्यानिकेतन स्कूल में दो मुमुक्षी बहिनों का जैन भगवती दीक्षा समारोह हुआ। श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने जहां दीक्षार्थी बहिनों को दीक्षा विधि ग्रहण कराई वहीं राष्ट्रसंत गणेश मुनि ने करेमी भन्ते का पाठ पढ़ाकर उन्हें सांसारिक जीवन से धार्मिक जीवन में प्रवेश कराया।

091110मुमुक्षी प्रीति जहां सुप्रेक्षा तो सोनिया सम्प्रेक्षा साध्वी बनीं। अब से ये दोनों नवदीक्षार्थी साध्वियां चारित्रप्रभाश्री की शिष्या साध्वी डॉ. राजश्री के सान्निध्य में रहेंगी। सौभाग्य मुनि ने प्रीति एवं सोनिया को वस्त्र परिवर्तन के बाद मांगलिक सुनाकर आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश कराया। राष्ट्रसंत गणेशमुनि ने कहा कि संयमित जीवन पर चलना बहुत कठिन है लेकिन एक बार चल जाने के बाद पथिक का सांसारिक तो मोह, माया से त्याग हो जाता है।
पाण्डाल से दोनों बहिनों के धर्म के माता-पिता अपनी गोद में उठाकर वस्त्र परिवर्तन के लिए ले गए। प्रारम्भ में गुरू पुष्कर साधना केन्द्र के अध्यक्ष श्याम झगड़ावत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जिसने इस नश्वर संसार के मोह रूपी बन्धनों को पहिचान लिया, वो ही इस संयमित जीवन के कांटों भरे मार्ग पर आसानी से चल पाता है।
091111समारोह को डॉ. राजश्री, पूर्वाश्री की शिष्या कुसुमलता, साध्वी सुलक्षणाश्री,उप प्रवर्तक निर्मल मुनि सहित समारोह के ध्वजारोहणकर्ता जैन कॉन्फ्रेन्स के राष्ट्रीय मंत्री निर्मल पोखरना, जैन कॉन्फ्रेन्स के गुजरात प्रान्त की महामंत्री निर्मला ओरडिय़ा ने भी संबोधित किया। दीक्षा पट्ट का अनावरण समाजसेवी फूलचन्द डागलिया ने किया। इस अवसर पर 9 बार सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया गया।
समारोह में कवि एंव गीतकार कुलदीप पारदर्शी ने दीक्षा गीत सुनाया। इस अवसर पर दोनों मुमुक्षी बहिनों ने सांसारिक जीवन को त्यागने से पूर्व अपने अंतिम उद्बोधन में कहा कि गुरूवरों द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने के लिए इस सांसारिक को जीवन को छोड़ा है।
091113कार्यक्रम में खटका राजस्थानी द्वारा रचित पुस्तक ‘राष्ट्रसंत की दिव्य कहानी’ तथा संजय भण्डारी द्वारा प्रकाशित ‘दीक्षा अनुमोदना-लघु त्याग, प्रत्याखना’ नामक पुस्तक का श्री वद्र्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र डंागी, अमर जैन साहित्य संस्थान के भंवर सेठ, संजय भण्डारी, श्याम झगड़ावत, निर्मल पोखरना ने विमोचन किया। दीक्षार्थी नामपट्ट का अनावरण सुराणा एवं लोढ़ा परिवार ने किया। समारोह में देश के विभिन्न कोनों से आए करीब 10 हजार श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे। इससे पूर्व सेक्टर 3 स्थित गुरू पुष्कर साधना केन्द्र से नवदीक्षार्थी बहिनों की वीर थाल व शोभायात्रा निकाली गई। जो विभिन्न मार्गों से होती दीक्षा स्थल पर पहुंची।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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