जैन ही नहीं, जन-जन के लिए काम किया आचार्य तुलसी ने

BY — July 5, 2015

19 वें महाप्रयाण दिवस पर हिरणमगरी सेक्टर 3 महावीर भवन में व्याख्यान

050702उदयपुर। आचार्य तुलसी ने जो अवदान दिए, वे न सिर्फ जैन समाज के लिए बल्कि आज जन-जन के लिए काम कर रहे हैं। भले ही वे सशरीर हमारे बीच न हों लेकिन उनके दिए सिद्धांत और अवदान जन जन के लिए काम कर रहे हैं।

ये विचार शासन श्री मुनि राकेश कुमार ने श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा और श्री महावीर वर्धमान जैन श्रावक समिति हिरणमगरी सेक्टर 3 के तत्वावधान में आचार्य तुलसी के 19 वें महाप्रयाण दिवस पर सेक्टर 3 स्थित महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी ने सबसे बड़ा काम संस्कार निर्माण का किया। वे अपने छोटे छोटे साधु संतों के बारे में भी सावचेत रहते थे।  नवदीक्षित साधुओं के लिए उन्होंने 22 पद्यों की गीतिका बनाई जो सभी को याद करवाई जाती थी। भौतिकवादी युग में उन्होंने दीक्षा से पहले संस्कार निर्माण कराए। उस समय न तो वक्ता थे और न ही साहित्य। बिना संप्रदायवाद के उन्होंने आगमों का उन्होंने हिन्दी में वर्णन कराया। उनका मानना था कि आदमी न तो हिन्दू है और न मुसलमान पहले वह इंसान है। राजा, देवता, गुरु के पास कभी खाली हाथ नहीं जाते लेकिन जब कोई उनके पास कुछ लेकर आता तो वे उससे कहते कि आपकी भक्ति के फूलों की भेंट चाहिए, और कुछ नहीं।
आचार्य तुलसी का कहना था कि बिना ध्यान के कषायों का हल्कापन नहीं होगा। स्वास्थ्य प्रेक्षा का प्रयोग करना चाहिए। जैन समाज की एकता के लिए भी उन्होंने बहुत काम किए। बहुत संतों से मिले। उनका कहना था कि दिमाग को सरल रखें। द्वेष होगा तो शास्त्र भी शस्त्र हो जाएंगे। संप्रदायों में उदारता हो। किसी भी संप्रदाय की निंदा नहीं करें। सभी के प्रति समान भाव रखें। दूसरों के दोष निकालने के बजाय खुद के दोष निकाल लें।
050703कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बांसवाड़ा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रकाश पगारिया ने कहा कि महापुरुष जीवन बदल देते हैं। मेरा भी आचार्य तुलसी के सान्निध्य में रहने का कई बार अवसर मिला। उनकी सभाओं में जैनों के साथ कई अजैन भी रहते थे। कई अजैनों ने अणुव्रत के नियम पाल रखे हैं। जो धर्म व्यावहारिक जीवन में नहीं उतरे, वह फलीभूत नहीं हो सकता। आचार्य का शरीर भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन वे आज भी जीवंत हैं। उनके गीत, विचार आज भी जीवित हैं। उनके बारे में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।
मुनि सुधाकर ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बदलना जरूरी है। अनैतिकता, भ्रष्टाचार, संयम का जहां अभाव होगा, वहां से बुराइयों का आरंभ हो जाएगा। संयम ही जीवन है और निज पर शासन फिर अनुशासन के आचार्य के दिए गए दो महती सूत्र हैं। नेता कानून निर्माता हैं लेकिन वे खुद उनकी पालना नहीं करते। आचार्य तुलसी ने सबसे पहले खुद पर नियम लागू किए। साधक और साधु के बीच की श्रमण श्रेणी को उन्होंने विलक्षण श्रेणी की उपाधि दी। महिलाओं की पर्दा प्रथा का उन्होंने ही विरोध किया।
मुनि दीप कुमार ने गीतिका के माध्यम से शुरूआत करते हुए कहा कि आचार्य आज भी अपनी कृतियों के माध्यम से हमारे बीच जीवित हैं। उनके संस्कारों ने उन्हें जीवित रखा हुआ है। ऐसा कभी लगा ही नहीं कि वे हमारे बीच नहीं रहे। 22 वर्ष की तरूणाई की अवस्था में उन्हें धर्मसंघ का कार्यभार संभालना पड़ा जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक करीब छह दशक तक किया और जैन धर्म को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाया। उनका साधना बल इतना मजबूत था कि वे बाहरी और भीतरी सुविधाओं से काफी दूर थे। उन्हें प्रमाद बिल्कुल पसंद नहीं था।
050704तेरापंथ युवक परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपक सिंघवी ने कहा कि जीते जी अपना पद छोडक़र शिष्य को धर्मसंघ का पद संभला दिया और स्वयं धर्म प्रचार की ओर निकल पड़े। 40-50 वर्ष पूर्व जैन समाज को दिए गए अवदान, अणुव्रत के नियम, ज्ञानशाला, नारी शक्ति आदि के अवदान समाज को आज भी दिशा प्रदान कर रहे हैं। सभा ने गत एक वर्ष आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया।
तेरापंथी सभाध्यक्ष राजकुमार फत्तावत ने कहा कि उदयपुर में जैन समाज की एकता का अनुपम उदाहरण हिरणमगरी सेक्टर 3 स्थित वर्धमान महावीर श्रावक समिति है जहां जैन समाज के साधु संतों, श्रावक-श्राविकाओं का वास है। आचार्य तुलसी ने जैन एकता की भगीरथी बहाई थी। जैन एकता में तुलसी का योगदान लिखित शासन श्री मुनि राकेश कुमार पुस्तक भी काफी चर्चित रही थी। उन्होंने बताया कि 9 जुलाई को यहां से विहार होगा। 12 जुलाई को आचार्य महाप्रज्ञ की जयंती है जिस पर सौ फीट रोड पर व्याख्यान होगा।
स्वागत उद्बोधन में सेक्टर 3 समिति के अध्यक्ष श्याम झगड़ावत ने कहा कि शासन श्रीमुनि राकेश कुमार के सान्निध्य में व्याख्यान सुनकर उपनगरीय श्रावक समाज आल्हादित है। जो धर्म गंगा उपनगरीय क्षेत्र में पिछले दिनों बही, वह अविस्मरणीय रहेगी।
आचार्य तुलसी पर आधारित गीतिका शशि चव्हाण आदि ने प्रस्तुत की। संगीता चपलोत व समूह ने मंगलाचरण किया। हिरणमगरी सेक्टर 3 समिति के राजमल चपलोत ने मुख्य अतिथि पगारिया का साहित्य भेंट कर सम्मान किया। संचालन सभा के मंत्री सूर्यप्रकाश मेहता ने किया। आभार सेक्टर 3 समिति के धनरूप बंबोरी ने व्यक्त किया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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