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नन्हें-नन्हें बच्चों ने की सामायिक

BY — May 28, 2016

280504उदयपुर। जैनाचार्य देवेन्द्र महिला मण्डल की ओर से भुवाणा स्थित देवेन्द्र धाम में आयोजित किये जा रहे दस दिवसीय धार्मिक नैतिक निर्माण शिविर के तीसरे दिन आज प्रात: से ही नन्हें-नन्हें बालक बालिकाओं ने समायिक कर इससे होने वाले लाभों के बारें में जानकारी प्राप्त की।

मण्डल की महामंत्री ममता रांका ने बताया कि सामयिक करने जैन समाज के संस्कार शिविर में बच्चों को प्राकृत भाषा पढना सिखाया जा रहा है। 150 बच्चें जैन आगम ग्रन्थ पढऩे व बोलने के लिए नीतू निवेदिता, मधु खमेसरा, ललिता बापना एवं निर्मला बड़ाला द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मण्डल की अध्यक्ष डॉ. सुधा भण्डारी ने बताया कि 5 जून तक चलने वाले इस शिविर की मुख्य विशेषता यह है कि 150 बच्चों को अर्धमागधी भाषा से प्राकृत भाषा पढने का अभ्यास कराया जा रहा है। इस भाषा को सिखाने के लिए बच्चों को भक्तामर स्तोत्र, प्रतिक्रमण, जैन आगम ग्रन्थ व लोक कथाएं, महापुरुषों की जीवन गाथाएं सुनाई जा रही हैं। इसके अलावा रोचक तरीके से जैन पहेलियां के द्वारा खेल-खेल में बच्चों में इस ज्ञान का बोध कराया जा रहा है। शिविर में जैन समाज के 7 से 18 वर्ष तक के 150 बच्चे शामिल है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जैन समाज की भावी पीढ़ी भाषा के साथ संस्कृति को नही भुला जाए, उसके लिए विगत 14 वर्ष से संस्कार शिविर चल रहा है जिसके तहत् अब तक 2000 बच्चें लाभान्वित हुए है।
बचपन से ही जोड़ रहे समाज की धारा से-मंत्री ममता रांका नेे कहा कि जब मण्डल ने वर्ष 2002 में शिविर लगाने की शुरूआत की तब मात्र 50 बच्चें थे। पिछले साल ये संख्या 130 पर पहुंच गई थी। इस बार लक्ष्य 150 बच्चों का था ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को बचपन में ही समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके।
मूल भाषा प्राकृत जरूर सीखें-कोषाध्यक्ष इन्द्रा चोरडिया ने कहा कि मण्डल का यह प्रयास रहता है कि समाज के बच्चे भले ही इंग्लिश अथवा हिंदी में पढ़े-लिखें, लेकिन मूल समाज की भाषा प्राकृत अवश्य सीखें।
शिविर में प्रार्थना से लेकर योग, संगीत भीं- शिविर का समय सुबह 6 से 1 बजे बजे तक है। शुरू के 10 मिनट प्रार्थना, उसके पश्चात् व्यायाम योग, प्राणायाम। इसके बाद महापुरुषों की जीवनी, कहानी बताई जाती। इस दौरान नाटक, नृत्य, इत्यादि प्रतियोगिता भी होती हैं। प्रात:काल नाष्ता व दोपहर का भोजन भारतीय संस्कृति से नीचे बिठाकर व पतल व ढोणे में खाना खिलाया जाताहै।
गुरुवंदन व गोचरी बहराना सिखाया जा रहा –उदयपुर क्षेत्र जैन धर्मावलम्बियों का बहुल क्षेत्र है इस दौरान 12 महीने जैन साधु – साध्वियों का आगमन शहर में होता रहता है इस दौरान बच्चों को साधु – साध्वियों को गुरुवंदन ‘तिखुतों के पाठ’ से कैसे किया जाता है सविधि सिखाया जा रहा व साथ ही गौचरी कैसे बहरानी व बहराते समय किन किन बातों का ध्यान रखना यह शिक्षा दी जा रहा है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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