व्यवसायीकरण के कारण हुआ नैतिक पतन: शर्मा

BY — September 10, 2016

उपभोक्ता अधिकार संगठन की राज्य इकाई में निर्मल पोखरना अध्यक्ष मनोनीत

100905उदयपुर। उपभोक्ता अधिकार संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवीन शर्मा ने कहा कि व्यवसायीकरण एक हद तक जरूरी भी है लेकिन इसके कारण आज नैतिक और चारित्रिक पतन होने लगा है। न सिर्फ खाने-पीने की चीजों बल्कि दवाओं तक में मिलावट की जाने लगी है।

वे शनिवार को संगठन की राज्य इकाई के लांचिंग समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में संगठन के मध्यप्रदेश इकाई अध्यक्ष अतुल अरोड़ा, गुजरात इकाई के अध्यक्ष दीपेश जैन, वन अधिकारी आरके जैन प्रमोद सामर, सेवानिवृत्त अधिकारी एसएल नागदा, आशीष वेगड, अरविंद पोखरना आदि भी मौजूद थे।
100906उन्होंने कहा कि उपभोक्ता को आज बाजार का राजा कहा जाता है लेकिन असलियत में उपभोक्ता आज भी ठगा जा रहा है। जब तक कंज्यूमर बिहेवियर मंे बदलाव नहीं आएगा, तब तक यह परेशानी हमेशा रहेगी। केन्द्र, राज्य, जिला सहित पूरे प्रशासनिक स्तर पर इतना बड़ा ढांचा होने के बावजूद हम जैसे संगठनों को आगे आना पड़ता है। उजाला बनाया जा सकता है लेकिन धूप नहीं। तरक्की, तकनीक से बाजार में व्यावसायिकता हावी हो गई है। 20 रूपए में पानी की बोतल देना हमारी 70 साल की प्रगति नहीं है बल्कि 70 सालों में हम निशुल्क पानी तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं, यह हमारी नाकामयाबी दिखाती है।
नवमनोनीत राज्य अध्यक्ष निर्मल पोखरना ने कहा कि अब जिम्मेदारी मिली है तो निश्चय ही उपभोक्ता के लिए प्रयास करेंगे। उसे उसका हक मिलना ही चाहिए। जिम्मेदार लोगों को जोड़कर अपना काफिला बढ़ाएंगे।
सामर ने कहा कि शहर के लिए गर्व की बात है कि निर्मल पोखरना को राज्य इकाई का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उपभोक्ता अधिकार के साथ हमें दोनों ओर देखना होगा। कई जगह सिर्फ कार्ड बन जाते हैं जो टोल टैक्स से लेकर हर दुकान पर अपने हित के लिए काम में आते हैं। हम सही करने भी जाते हैं लेकिन छोटी सी आपराधिक छवि वाला समूह बहुत हावी हो जाता है। ऐसे मंे ध्यान रखना होगा कि बिना डरे काम करें। ऐसे संगठनों की बहुत आवश्यकता है।
मध्यप्रदेश के राज्य अध्यक्ष अतुल अरोड़ा ने कहा कि उपभोक्ता क्या और कौन है? हर पैदा होने वाले बच्चे से लेकर अंतिम शैय्या पर पड़ा वह व्यक्ति उपभोक्ता है जो वस्तु का उपभोग करता है और उसके उपभोग के बदले कुछ मूल्य चुकाता है। उपभोक्ता के मूल रूप से छह अधिकार जानने, सुनने, उसे शिक्षा प्राप्त करने, क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार है।
गुजरात इकाई के अध्यक्ष दीपेश जैन ने कहा कि उपभोक्ता के लिए विश्व में सबसे कड़क कानून भारत में है फिर भी उपभोक्ता परेशान है। यह एकमात्र संगठन है जो उपभोक्ता को जागृत कर रहा है। 25 राज्यों में संगठन कार्य कर रहा है। लोगों को वस्तुएं बताकर जागरूक करते हैं। सिर्फ विज्ञापन देने से नहीं अवेयरनेस के लिए उपभोक्ता के पास जाना होगा।
वन अधिकारी आरके जैन ने कहा कि 1986 में उपभोक्ता संरक्षण कानून बना लेकिन अब तक कानून और उसके लाभ के बारे में उपभोक्ता को पता तक नहीं है। उसे अवेयर करना जरूरी है। जब भी संगठन को जरूरत होगी, तनम न से उसके साथ खड़े होंगे, यह विश्वास दिलाते हैं।
कार्यक्रम के आरंभ में दीप प्रज्वलन के बाद अतिथियों का माल्यार्पण कर उपरणा ओढ़ा बुके भेंटकर स्वागत किया गया। संचालन आलोक पगारिया ने किया। धन्यवाद संगठन के उदयपुर नगर अध्यक्ष नाहरसिंह पड़ियार ने दिया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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