राजस्थान धीर, वीर और पीर की भूमि – मुरारी बापू

BY — November 5, 2016

रामदेवरा में रामकथा का आयोजन
रामकथा को नाम दिया – मानस रामदेव पीर

051107रामदेवरा। बाबा रामदेव मानस के आधार है। उन्होने हमेषा जनमानस में आपसी सामंजस्य और सेतु का संदेष दिया है इसलिए बाबा को पीर कहा गया है। रामा पीर को कृश्ण का अवतार भी माना गया है। यह विचार मुरारी बापू ने संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा के प्रथम दिन जन समुदाय को व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहें।

051108शनिवार को रामापीर की नगरी रामदेवरा प्रवेश द्वार के निकट स्थित जाट धर्मशाला के ग्राउण्ड में हजारों की संख्या में मौजूद जन समुदाय को व्यास पीठ से संबोधित किया। नौ दिवसीय रामकथा के तहत प्रथम दिन बापू चार बजे व्यासपीठ पर पहुंचे। व्‍यासपीठ व अपने गुरू को नमन कर जनमानस का अभिवादन स्वीकार करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि रामदेवरा की पावन स्थली, वीरों एवं धीरों की धरती पर कथा करने का मौका मिला है। यह राम कथा आध्यात्मिक एवं प्रेम यज्ञ है।
राजस्थान धीर, वीर और पीर की भूमि है : मुरारी बापू ने कहा कि राजस्थान धीर, वीर और पीर की पावन धरती है। छोटे बड़े चमत्कार तो विज्ञान भी कर रहा है लेकिन यहां जो ज्योति अवतरित हुई और उसने जो अस्पृष्ता को खत्म किया, वो चमत्कार आज पूजनीय बन गये है। बापू ने प्रथम दिन विष्व दर्षन से लेकर रामदेवरा दर्षन तक पीर को परिभाशित किया। बापू ने कहा कि रामचरित मानस में राम और देव षब्द कई बार आये है और पीर षब्द 18 बार आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बापू ने इस रामकथा का नाम मानस रामदेव पीर दिया। उन्होने कहा कि सार्वभौम की चर्चा पीर षब्द है। जो हमें डूबोंये नही बल्कि तारे, जो नख षीख से पवित्र व्यक्ति हो, उसे और साधू संत को भी पीर कहते है। उन्होने कहा कि आठो प्रहर उत्सव में रहने वाले, क्षमा करने वाले, निरन्तर सत्य के पथ पर चलने वाले तथा प्रत्येक व्यक्ति को मौहब्बत करने वाले को भी पीर की संज्ञा दी गई है। अच्छे मार्ग पर ले जाकर मार्गदर्षक करने वाले को पीर कहते है। बापू ने पाण्डाल में मौजूद भारतीय सेना के जवानों को इंगित करते हुए कहा कि ये नौजवान जो सब कुछ न्यौछावर करने को हर समय तैयार रहते है ये भी मेरे लिए पीर है। उन्होने कहा कि पीर की कोई गणवेष नही होती है और पीर का अर्थ संवेदना होता है। अखण्ड संयम का प्रतीक पीर होता है।
051109पृथ्वी पर जो भी है वह तीर्थ समान है
बापू ने मानस रामदेव पीर पर चर्चा करते हुए कहा कि मेरे मानस में रामदेव पीर कौन है और मेरे हद्य में रामदेव पीर कौन है इन्ही पर चर्चा की जायेगी। बापू ने कहा कि पृथ्वी को षास्त्र में गौ कहा गया है और गाय को तीर्थ कहते है और पृथ्वी पर जो भी है वह तीर्थ है क्योंकि पृथ्वी के कई ऐसे स्थानों एवं समुद्र की गहराई में जाना मुष्किल होता है। पृथ्वी पर कई तीर्थ है और सबका अपना तीर्थत्क है और उसकी तीर्थता है।
हनुमान विष्वास के प्रतीक है
मुरारी बापू ने कहा कि बिना विष्वास आदमी की बंदगी नही हो सकती है और भगवान हनुमान विष्वास के प्रतीक है। बापू ने पंच देव की पूजा की पद्धति बताते हुए कहा कि विवेक और विनय से जीना प्रतिदिन गणेष पूजा के समान है। हद्य को विषाल रखे यहीं विश्णु पूजा है। अश्रद्धा एवं अंध श्रद्धा ना हो और श्रद्धामय जीवन जीना दुर्गा पूजा है। जहां तक संभव हो उजाले में जिये और यही सूर्य पूजा है। मन, वचन एवं कर्म से दूसरों का कल्याण की भावना षिव पूजा है।
051110रामजन्म एवं राम चरित मानस का प्राकट्य रामनवमी के दिन
राम का प्राकट्य राम जन्म एवं राम चरित मानस का प्राकटय भी रामनवमी के दिन ही हुआ है। राम नवमी के दिन ही राम चरित मानस का प्राकट्य हुआ है। राम कथायें आपातकाल में भी होती रही है। बापू ने बताया कि रामचरित मानस में बालकाण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किश्किन्धा काण्ड, सुन्दर काण्ड, लंका काण्ड और उत्तर काण्ड है और सातों सोपान अपनी विषेशता रखते है। रामचरित मानस में एक एक षब्द परम विषेशता रखता है। मुरारी बापू ने कहा कि रामकथा सात प्रकार के बल प्रदान करती है। रामकथा से व्यक्ति में दैहिक, दृश्टि, दिल, दिमाग, दैव्य तथा दिव्य बल आता है। गुरू महिमा पर बोलते हुए उन्होने कहा कि गुरू मार्ग होता है और व्यक्ति उसके माध्यम से पार प्राप्त कर सकता है।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा के पहले दिन कथा स्थल पर कथा से पूर्व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अषोक गहलोत, रासासिंह रावत, कथा संयोजक मदन पालीवाल, प्रकाष पुरोहित, रविन्द्र जोषी, रूपेष व्यास, विकास पुरोहित सहित कई गणमान्य अतिथियों ने व्यासपीठ पर पुश्प अर्पित किये तथा कथा श्रवण का लाभ लिया।
बाबा रामदेव की चौखट पर पहला कदम
बाबा रामदेव की नगरी में आयोजित रामकथा के लिए मुरारी बापू षनिवार दोपहर को फलौदी एयरबेस पहुंचे जहां आयोजन समिति की ओर से मदन पालीवाल ने अगवानी की। एयरबेस से बापू सीधे बाबा के समाधि स्थल पहुंचे तथा आस्था के पुश्प अर्पित किये व चादर चढ़ाई।
कल होगा कवि सम्मेलन : रामदेवरा में आयोजित मुरारी बापू की रामकथा के आयोजन की श्रृंखला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत सोमवार षाम को कवि सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। इसमें देष के सुप्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र षर्मा, प्रसिद्ध गीतकार दुर्गादानसिंह गौड, अरूण जैमिनी, भगवान मकरन्द, महेन्द्र अजनबी, बुद्धिप्रकाष दाधीच सहित कई कविगण हिस्सा लेंगे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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