पीएमसीएच के चिकित्सको ने ’सांसों’ को फिर से जोड़ा

BY — April 25, 2026

मौत को मात : जब चलती आरी ने चीर दिया सीना
उदयपुर। ज़िंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी सिर्फ चंद सेकंड का होता है। 56 वर्षीय पुरूष के लिए सोमवार की दोपहर किसी काल से कम नहीं थी, जब लकड़ी काटते समय अचानक इलेक्ट्रिक आरी का कटर उछला और सीधे उनके सीने और हाथ को चीरता हुआ निकल गया। लेकिन कहते हैं न कि ’जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’ पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अपनी निपुणता और तत्परता से पुरूष को मौत के मुँह से बाहर खींच लिया। इस सफल ऑपरेशन में सीटीवीएस सर्जन डॉ.अनुज मेहता,निश्चेतना विभाग के डॉ.समीर गोयल,डॉ.रक्षित,कुलदीप,ललित,संजय एवं परमेश्वर की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

दरअसल 56 वर्षीय पुरूष रोजाना की तरह अपने काम में मशगूल था। अचानक एक तकनीकी खराबी हुई और घूमता हुआ ब्लेड (कटर) अपनी धुरी से अलग होकर तेज रफ्तार से पुरूष की ओर बढ़ा। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, आरी उसके बाएं हाथ और छाती के हिस्से को गहरा काट चुकी थी। खून का फव्वारा छूटा और वह वहीं गिर पड़ा। परिजन जब मरीज को लेकर पीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, तो उसकी हालत देख सबकी रूह कांप गई। शरीर से काफी खून बह चुका था और घाव इतने गहरे थे कि अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचने का पूरा डर था। सीटीवीएस सर्जन डॉ.अनुज मेहता ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक पल भी नहीं गंवाया। उन्होंने तुरंत सर्जिकल टीम को अलर्ट किया। इलेक्ट्रिक आरी ने न केवल त्वचा को काटा था, बल्कि मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। लगभग 4 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने न केवल रक्तस्राव को रोका, बल्कि सीने और हाथ की नसों की बारीकी से मरम्मत की। डॉ. मेहता ने बताया कि मरीज की स्थिति बहुत नाजुक थी। हमारे पास सोचने का समय कम और करने को बहुत कुछ था। भारी रक्तस्राव के कारण ब्लड प्रेशर गिर रहा था। अगर सर्जरी में देरी होती तो मरीज की जान भी जा सकती थी।
पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल एवं ऐक्जिक्यूटिव डॉयरेक्टर अमन अग्रवाल ने कहा कि जब कोई मरीज इतनी गंभीर स्थिति में हमारे पास आता है, तो वह केवल एक केस नहीं होता, बल्कि एक परिवार की उम्मीद होता है। हमारे चिकित्सको ने बिना समय गंवाए त्वरित निर्णय लिया। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि पीएमसीएच में न केवल आधुनिक मशीनें हैं, बल्कि संवेदनशील और कुशल डॉक्टरों की एक ऐसी टीम है जो नामुमकिन को मुमकिन बनाने का जज्बा रखती है। सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को अब जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, वह अब खतरे से बाहर है और तेजी से रिकवर कर रहा है। मरीज पूरी तरह से ठीक है और चौथें ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया । परिजनों ने चिकित्सको की टीम एवं नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए इसे नया जीवन मिलना बताया है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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