गरिमा, उल्लास और सांस्कृतिक सौंदर्य के अद्भुत संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। प्रातः 10 बजे आरंभ हुए इस भव्य आयोजन ने प्रारंभ से ही अपनी सुसंगठित व्यवस्था और भावपूर्ण वातावरण से सभी उपस्थित जनों को प्रभावित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन से हुआ, जिसके पश्चात दीप प्रज्वलन की मंगल परंपरा ने ज्ञान के प्रकाश का संदेश दिया और सरस्वती वंदना की मधुर स्वर-लहरियों ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लेफ्टिनेंट जनरल एन. के. सिंह ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला बताते हुए अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को सफलता का मूल मंत्र बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में उच्च आदर्श स्थापित करने तथा निरंतर परिश्रम के माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने उपस्थित युवाओं के मन में आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. हेमंत कोठारी, वाइस चांसलर, पेसिफिक यूनिवर्सिटी ने अपने विचारों में आधुनिक शिक्षा प्रणाली, नवाचार और तकनीकी उन्नति की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के साथ स्वयं को विकसित करने और ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में उतारने का संदेश दिया

कार्यक्रम में डॉ. कपिलेश तिवारी, प्राचार्य, पेसिफिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और “स्पंदनम्” के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य बताते हुए इस प्रकार के आयोजनों की उपयोगिता पर बल दिया।शिक्षा में गुणवत्ता, सांस्कृतिक गतिविधियो और नैतिक मूल्यों के समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज के उत्थान में उसका सार्थक उपयोग है। डॉ. हेमंत पंड्या, प्राचार्य, पेसिफिक शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय ने अपने विचारों में अनुशासन, स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली को सफलता का आधार बताया तथा विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनने की प्रेरणा दी। साथ ही डॉ. जितेंद्र सिंह चुंडावत, उप-प्राचार्य, पेसिफिक शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय ने शिक्षा और खेल के संतुलन को जीवन में आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को सक्रिय, अनुशासित एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के मध्य विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को जीवंतता प्रदान की। एकल एवं समूह नृत्य प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग, लय और भाव की इस सुंदर अभिव्यक्ति ने सभागार को तालियों की गूंज से भर दिया। इसके पश्चात आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। यह क्षण न केवल विजेताओं के लिए गौरवपूर्ण था, बल्कि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। सम्मानित विद्यार्थियों के चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास इस आयोजन की सार्थकता को प्रत्यक्ष रूप से अभिव्यक्त कर रहा था। साथ ही उत्कृष्ट खिलाडियो का सम्मान किया गया । जिसमें साउथ एशियन हैंडबाल चैम्पियनशिप विजेता विरभद्र सिंह चौहान एव जुजित्सु राष्ट्रिय पदक विजेता ईशान वैष्णव को विश्वविद्यालय क्रिड़ा मंडल की ओर से सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं सुसंगठित संचालन डॉ. कृपा जैन द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी वाणी और शैली से पूरे आयोजन को एक सूत्र में पिरोए रखा। अंत में डॉ. हेमंत पंड्या द्वारा आभार व्यक्त किया गया, जिसमें सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ, इसकी मधुर स्मृतियाँ लंबे समय तक सभी के हृदय में अंकित रहेंगी। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे “स्पंदनम्–2026” केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सृजनात्मकता का ऐसा सशक्त मंच सिद्ध हुआ, जिसने विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को नई उड़ान दी और उन्हें अपने व्यक्तित्व के समग्र विकास की दिशा में प्रेरित किया। यह आयोजन इस तथ्य का सजीव प्रमाण बना कि जब शिक्षा के साथ संस्कृति और सृजनशीलता का समन्वय होता है, तब एक उज्ज्वल और सशक्त भविष्य का निर्माण संभव होता है।














