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`सखी’ से महिलाओं की आय में 43 प्रतिशत की वृद्धि

BY — October 24, 2026

हिंदुस्तान जिंक की माइक्रो एंटरप्राइज़ `सखी’
ले मार्शे के साथ साझेदारी से सखी उत्पाद अब शहरी बाजारों तक पहुंचे, दरीबा में मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित, महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, 420 से अधिक सखी दीदियां आजीविका से जुड़ीं
उदयपुर। कुछ वर्षो पहले तक मंजू देवी का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था। वर्ष 2019 में बीमारी के कारण पति के निधन के बाद उन पर दो बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी आ गई। परिवार का गुजारा करने के लिए वे मौसमी कृषि कार्य और अस्थायी मजदूरी पर निर्भर थीं। आज मंजू देवी हिन्दुस्तान जिं़क की सखी परियोजना से जुड़कर आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनों का संचालन कर हर माह लगभग 8 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं, आस पास के क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए मंजू देवी आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन चुकी हैं।

मंजू देवी की यह कहानी उन सैकड़ों महिलाओं में से एक है, जिनका जीवन हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की सखी उत्पादन समिति , सखी माइक्रोएंटरप्राइज के माध्यम से बदल रहा है। यह पहल महिलाओं को उनके कौशल के आधार पर स्थायी आजीविका और स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। वर्तमान में इस पहल से 426 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं की सामूहिक आय में पिछले वर्ष की तुलना में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्त वर्ष 2026 में 23 लाख रुपये से बढ़कर 32.84 लाख रुपये हो गई है।
सखी माइक्रोएंटरप्राइज का विस्तार इसके ब्रांड ‘दायची’ और ‘उपाया’ के बढ़ते उत्पादों में भी दिखाई देता है। दायची ब्रांड के तहत अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जबकि उपाया परिधान उत्पादों पर केंद्रित है। राजस्थान और उत्तराखंड में संचालित 14 उत्पादन इकाइयों के माध्यम से महिलाएं अब पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ क्रोशिया उत्पाद, मूंगफली तेल और मिलेट आधारित उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इससे उन्हें नए बाजारों तक पहुंचने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

इसी दिशा में दरीबा में एक नई मिलेट उत्पादन इकाई स्थापित की गई है। यह इकाई महिलाओं को मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्माण से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देगी। साथ ही पारंपरिक और स्थानीय अनाजों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करेगी। सखी माइक्रोएंटरप्राइज अपने उत्पादों को स्थानीय बाजारों से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रही है। ले मार्शे के साथ साझेदारी के तहत अब सखी के उत्पाद दिल्ली के तीन स्टोर्स में उपलब्ध हैं। इसके अलावा ये उत्पाद ब्लिंकिट, अमेजन, फ्लिपकार्ट, ओएनडीसी और सखी के स्वयं के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘हार्ट्स विद फिंगर्स’ पर भी उपलब्ध हैं। इससे महिला उद्यमियों को बड़े उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
सखी पहल का मूल उद्देश्य स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। स्थानीय कौशल, संसाधनों और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए यह पहल ग्रामीण समुदायों की आर्थिक मजबूती को बढ़ा रही है। साथ ही पारंपरिक कौशल और स्थानीय संसाधनों को भी संरक्षण दे रही है। अपने बढ़ते उत्पादन केंद्रों और उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से सखी माइक्रोएंटरप्राइज महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ने हेतु लगातार प्रयासरत है।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका जैसे क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक विकास कार्यक्रम संचालित कर रही है। 4,100 से अधिक गांवों में अपनी पहुंच के साथ कंपनी 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और वर्ष 2030 के अपने सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.