दुखों की जड़ है राग-द्वेष : सुकुमालनन्दी
उदयपुर। संसार दुखों का सागर है। प्रत्येक व्यक्ति इस दुखों के सागर से पार पाना चाहता है, लेकिन…
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READ MOREudaipur. भगवान की जय-जयकार का गूंजायमान करने मात्र से ही हम सच्चे भक्त नहीं बन सकते। उसके लिए…
READ MOREudaipur. समय का चक्र निरन्तर चलता रहता है, समय अपनी गति से प्रवाहमान हैं। इंसान बचपन,जवानी व बुढ़ापा…
READ MOREउदयपुर। गलती करना मानवीय स्वभाव है, गलती इंसान से ही होती है। जो गलती पर गलती करे उसे…
READ MOREudaipur. आत्मा एक और कषाय चार है लेकिन जब आत्मा अपने में होती है तो कषाय भी उसका…
READ MOREudaipur. इस संसार में प्रत्येक जीव के कई मित्र होते हैं। यह अलग बात है कि कोई मित्र…
READ MOREउदयपुर। प्रत्येक व्यक्ति अपने को सुधारने के बजाय दूसरों का सुधारना चाहता है। इंसान सौ फीसदी दूसरों को…
READ MOREudaipur. प्रत्येक त्यौहार वर्ष में एक बार ही आता है लेकिन वह हमारी जिन्दगी को संवारने के लिए…
READ MOREudaipur. मन बहुत चंचल है। हम किसी के प्रति बुरा बर्ताव करते हैं तो सबसे पहले मन ही…
READ MOREउदयपुर। साधु की परीक्षा कैशलोच से हाती है। शरीर में कितना राग है, कितना वैराग्य है यह कैशलोच…
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