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Tag: muni sukumalnandi

दुखों की जड़ है राग-द्वेष : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 11, 2012

उदयपुर। संसार दुखों का सागर है। प्रत्येक व्यक्ति इस दुखों के सागर से पार पाना चाहता है, लेकिन…

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पूर्णावतार थे श्रीकृष्ण : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 10, 2012

udaipur. भगवान की जय-जयकार का गूंजायमान करने मात्र से ही हम सच्चे भक्त नहीं बन सकते। उसके लिए…

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समय की कीमत पहचानें : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • August 9, 2012

udaipur. समय का चक्र निरन्तर चलता रहता है, समय अपनी गति से प्रवाहमान हैं। इंसान  बचपन,जवानी व बुढ़ापा…

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गलती करके जो सुधर जाए वह इंसान: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 7, 2012

उदयपुर। गलती करना मानवीय स्वभाव है, गलती इंसान से ही होती है। जो गलती पर गलती करे उसे…

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कषायों पर विजय पाने वाला ईश्वर के समान : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • August 6, 2012

udaipur. आत्मा एक और कषाय चार है लेकिन जब आत्मा अपने में होती है तो कषाय भी उसका…

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सच्चा मित्र भगवान का रूप : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 5, 2012

udaipur. इस संसार में प्रत्येक जीव के कई मित्र होते हैं। यह अलग बात है कि कोई मित्र…

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पहले स्वयं को सुधारो: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 4, 2012

उदयपुर। प्रत्येक व्यक्ति अपने को सुधारने के बजाय दूसरों का सुधारना चाहता है। इंसान सौ फीसदी दूसरों को…

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त्योहार देते हैं एकता व नैतिकता की शिक्षा : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 3, 2012

udaipur. प्रत्येक त्यौहार वर्ष में एक बार ही आता है लेकिन वह हमारी जिन्दगी को संवारने के लिए…

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मन को मारें नहीं, समझाएं: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • August 1, 2012

udaipur. मन बहुत चंचल है। हम किसी के प्रति बुरा बर्ताव करते हैं तो सबसे पहले मन ही…

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कैशलोच वैराग्य का प्रतीक: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • July 29, 2012

उदयपुर। साधु की परीक्षा कैशलोच से हाती है। शरीर में कितना राग है, कितना वैराग्य है यह कैशलोच…

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