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Tag: muni sukumalnandi

जिसके पास पिच्छी, दुनिया उसके पीछे : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • October 25, 2012

udaipur. यदि गृहस्थी के पास बिलकुल भी धन नहीं तो वह गृहस्थी नहीं कहलाता है और जिसके पास…

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धार्मिक पुरूषों के बिना धर्म नहीं टिकता : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • October 8, 2012

udaipur. -न धर्मो धार्मिकै: बिना- धर्म है तो धर्मात्मा व्यक्ति है, धर्मात्मा व्यक्तित्व है तो इस जगत में…

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शरीर नहीं, आत्मा का सम्मान करें: सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • October 4, 2012

udaipur. शरीर तो पुद्गल है, जड़ है जबकि आत्मा चेतन हैं। जीव है। एक आदमी दो पात्र लेकर…

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दो मासोपवासी सहित 29 तपस्वियों ने किया पारणा

BY ADMIN • October 2, 2012

धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य आत्मा की विशुद्धि: आचार्य सुकुमालनन्दी udaipur. तप करना मानवता का दिव्य अनुष्ठान हैं। तप…

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क्षमा आत्मा की साधना है : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • September 30, 2012

पालकी यात्रा में उमड़े श्रद्धालु udaipur. क्षमा बडऩ को चाहिए, छोटन को उत्पात क्षमा आत्मा की उपासना है…

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ऐतिहासिक तपाराधना एवं पारणा महोत्सव

BY ADMIN • September 29, 2012

तप करने से होता है सभी पापों का नाश: आचार्य सुकुमालनंदी udaipur. जिस प्रकार मिट्टी तपस्या करके कुंभ…

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भीड़ में रह कर भी अकेले जीना सीखो : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • September 27, 2012

udaipur. दुनिया में चार प्रकार के लोग होते हैं। पहले वे जो अकेले में रहते हैं जीते हैं,…

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दूसरों की बुराई करना महान कार्य नहीं : सुकुमालनंदी

BY ADMIN • September 7, 2012

udaipur. इस संसार में जो व्यक्ति दूसरों के अवगुण न देख कर उसमें गुणों को देखता है वह…

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धर्म कार्य में बाधा डालने वाला मिथ्यादृष्टि : सुकुमालनन्दी

BY ADMIN • September 6, 2012

udaipur. भौतिकता की चकाचौंध से भरे आज के युग में धर्म में आस्था रखने वाले विरले ही पुरूष…

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शहद लपेटी तलवार जैसा है सांसारिक सुख: सुकुमालनंदी

BY ADMIN • September 4, 2012

udaipur. जो जीव सांसारिक सुखों में लिप्त रहता है, वह कभी भी आध्यात्मिक शान्ति को नहीं पा सकता,…

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