जिसके पास पिच्छी, दुनिया उसके पीछे : सुकुमालनंदी
udaipur. यदि गृहस्थी के पास बिलकुल भी धन नहीं तो वह गृहस्थी नहीं कहलाता है और जिसके पास…
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READ MOREudaipur. -न धर्मो धार्मिकै: बिना- धर्म है तो धर्मात्मा व्यक्ति है, धर्मात्मा व्यक्तित्व है तो इस जगत में…
READ MOREudaipur. शरीर तो पुद्गल है, जड़ है जबकि आत्मा चेतन हैं। जीव है। एक आदमी दो पात्र लेकर…
READ MOREधार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य आत्मा की विशुद्धि: आचार्य सुकुमालनन्दी udaipur. तप करना मानवता का दिव्य अनुष्ठान हैं। तप…
READ MOREपालकी यात्रा में उमड़े श्रद्धालु udaipur. क्षमा बडऩ को चाहिए, छोटन को उत्पात क्षमा आत्मा की उपासना है…
READ MOREतप करने से होता है सभी पापों का नाश: आचार्य सुकुमालनंदी udaipur. जिस प्रकार मिट्टी तपस्या करके कुंभ…
READ MOREudaipur. दुनिया में चार प्रकार के लोग होते हैं। पहले वे जो अकेले में रहते हैं जीते हैं,…
READ MOREudaipur. इस संसार में जो व्यक्ति दूसरों के अवगुण न देख कर उसमें गुणों को देखता है वह…
READ MOREudaipur. भौतिकता की चकाचौंध से भरे आज के युग में धर्म में आस्था रखने वाले विरले ही पुरूष…
READ MOREudaipur. जो जीव सांसारिक सुखों में लिप्त रहता है, वह कभी भी आध्यात्मिक शान्ति को नहीं पा सकता,…
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