सांसों की कोई गारन्टी नहीं होती : सुकुमालनन्दी
उदयपुर। मुस्कुराती सुबह शाम में ढली होती है,जिन्दगी की पीठ पर मौत लिखी होती है।बढ़ा लो कदम जितना…
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READ MOREudaipur. अर्थी उठने से पहले जीवन के अर्थ को समझ लेना चाहिये। मृत्यु की कोई तारीख निश्चित नहीं…
READ MOREudaipur. रक्षाबंधन मात्र भाई-बहिन का ही पर्व नहीं है। देव-शास्त्र-गुरु के ऊपर कोई आपत्ति आए तो उनकी रक्षा…
READ MOREउदयपुर। साधु की परीक्षा कैशलोच से हाती है। शरीर में कितना राग है, कितना वैराग्य है यह कैशलोच…
READ MOREउदयपुर। आज के समय में व्यक्ति सिर्फ स्वयं के हितों के बारे में ज्यादा सोचता है, दूसरों के…
READ MOREउदयपुर। जिस प्रकार पवन चक्की में बैठा तोता अपनी अज्ञानता से अपने आपको चक्की से बंधा हुआ समझता…
READ MOREकृत्रिम सम्मेद शिखर पर्वत पर 23 किलो का निर्वाण लड्डू चढ़ाया, हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ा रैला, जयकारों से…
READ MOREउदयपुर। प्रकृति बहुत ही संवेदनशील हैं। जैसा हम कर्म करेंगे फल वैसा ही मिलेगा, या यूं कह लीजिये…
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