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मैं तेरे पिंजरे के पंछी नहीं हूं बाबुल मैं तय करती हूं…

| October 5, 2017 | 0 Comments

उदयपुर। रोटरी क्लब पन्ना ने हिसार के कॉलेज की प्राचार्या एवं मशहूर कवियित्री श्रीमती शमीम शर्मा के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी सौ फीट रोड़ स्थित अशोका पैलेस में आयोजित की गई।

जिसमें अपने मंगलसूत्र, कंगन, पीके और तगड़ी से अपने घर को सजा लिया है मैंने, किसी योद्धा की तरह अपने हिस्से के महावर मेहंदी लिपस्टिक से अपने सपने रंग लिए है मैंने, काजल और सुरमे की स्याही से लिख लिया अपना भाग्य मेरी कलम मेरे इशारे पर नाचती है आदि जैसी कविताओं की तीखे तेवर और गंभीर मुद्रा में रचना करने वाली हिसार के कॉलेज की प्राचार्या एवं मशहूर कवियित्री श्रीमती शमीम शर्मा ने इस अवसर पर कविता पाठ करते हुए ..बाबुल नाराज मत होना, मैं तेरे पिंजरे का पंछी नहीं हूं, बाबुल मैं तय करती हूं, अपने ख्वाबों को मैं तेरे कोटे की गाय नहीं हूं, सुनाकर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। श्रीमती शमीम ने इसी तरह की नारी पर रचित अनेक सुंदर कविताएं सुनाकर नारी संवेदना और स्पंदन के स्वरों को ताकत दी। इस अवसर पर युवा कवि महेंद्र साहू ने आरक्षण से जुड़ी अपनी रचना सुना कर सब को प्रभावित किया।
डीआईजी जेल श्रीमती प्रीति भार्गव ने नारी जिजीविषा की रचना सुनाते हुए प्रतिस्पर्धा का दौर है तो अर्जुन बन ससंधान करो…अपनी मशहूर कविता ’जहां लड़कियां अपंग अधिकारी बनकर खड़ी रहती है, दूसरों के दर्पण के सामने होने में सौ-सौ बार धिक्कार करती हूं’ सुनाकर गोष्ठी को नवीन ऊंचाईयां दी। डॉ. गोपाल राजगोपाल ने ’जाती हुई जवानियां बनी अमोलक चीज, जो जो जो जो तन हुआ क्यों क्यों नहीं कमीज नंगे पांव में चूहे तीखे तीखे शूल जूतों के तलवे तने मखमल किया कबूल…के साथ अपनी गजल सिक्के चिल्लर लोग यहां, बिखरे दर्द और लोग यहां, खुद मरने का पाप न कर, चाकू खंजर लोग यहां… सुनायी तो वहंा उपस्थित सभी सुधि श्रोता ने तालियों की दाद दी।
क्वियित्री डॉ. शकुंतला सरूपरिया ने औरत के हवाले से अपने संवेदना पूर्ण मुक्तक सुनाते हुए अपनी प्रसिद्ध नज्म बेटियों के जन्म पर बधाई दीजिए बधाई दीजिए अजी बधाई दीजिए सुना कर बेटियों के महत्व को चौगुना कर दिया।
संगोष्ठी में मशहूर शायर खुशी नवाब साहब ने अपनी बेटियों से जुड़ी गजल खिलते गुलाब जैसी निराली है बेटियां, घर घर में आज नाज की पाली हैं बेटियां,बेटी नहीं है सिर्फ यह लक्ष्मी का रुप है धड़कन में लचकती हुई डाली हैं बेटियां…रचना के अलावा इसके बाद हम तुम्हें अपना समझें मगर बा खुदा तुम भी अपना बना लो तो क्या बात है गज़ल सुनाकर महफिल में रंग जमाया। संगोष्ठी में क्लब अध्यक्ष राकेश सेन ने अतिथि कवियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर डॉ. मधु सरीन और डॉ.देवेंद्र सरीन ने सभी का अभिनंदन किया। संगोष्ठी में रोटरी क्लब के कई पदाधिकारी सचिव शैलेन्द्र गुर्जर, भानूप्रतापसिंह धाबाई,तारीका भानूप्रतापसिंह धाबाई,शुभंागी वरंगावकर, ज्योति गुर्जर, कुणाल यादव, नीरज बोलिया, आशीष पोरवाल, मेघना गौड,ज्योति बोलिया, राजेन्द्र कुमावत, राजेश शर्मा सहित अनेक सदस्य एंव अतिथि मौजूद थे।

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Category: News

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