ग्रामीण विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी जरूरी

BY — February 11, 2012

एकीकृत ग्रामीण विकास के लिए दो दिवसीय संगोष्ठी प्रारम्भ

पुस्तिका का विमोचन करते अतिथि.

udaipur. उदयपुर दूरसंचार मंडल के महाप्रबंधक आर.एन. माथुर ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी को बहुत आवश्यंक है। इसके बिना ग्रामीण विकास सम्भव नहीं है। ऑप्टिकल फाइबर तकनीक के माध्यम से सूचना संम्प्रेषण में असीमित वृद्धि हुई है। गांव के हर महाविद्यालय को सीमित समय में ब्राडबैण्ड कनेक्शन से जोड़ा गया है। देश के करीब 400 विश्वाविद्यालय नेशनल मिशन एजुकेशन—आई.सी.टी./एम.के.एन. से जुड गए हैं जो किसी भी गांव के महाविद्यालय के विधार्थी इस नेटवर्क में उपलब्ध सूचनाएं प्राप्त कर सकेंगे।

संगोष्ठी में उपस्थित गणमान्य.

वे यहां द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के स्थालनीय चैप्ट्र के सभागार में आयोजित संगोष्ठीग को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन दी इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स  इंडिया के उदयपुर सेंटर, सीटीएई, एसआईजी डब्लयू एन एस, ई—एग्रीकल्चर, कम्प्यूटर सोसाईटी ऑफ इंडिया, उदयपुर चेप्टर व टेक्नो इंडिया एन.जे.आर इंस्ट्टियूट ऑफ टेक्नोलोजी, उदयपुर के तत्वावधान में किया जा रहा है। इसका विषय एकीकृत ग्रामीण विकास के लिए सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी है।
विशिष्ट अतिथि इंजीनियर परियोजना प्रबन्धक मदन छाजेड़ ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण ग्रामीण विकास को नया आयाम मिला है जिसके कारण रियल टाईम सूचना के कारण ग्रामीण विकास की गति त्वरित हुई हैं एवं उसमें पारदार्शिता आई है। समारोह में सीटीएई के डीन डॉ. एन. एस. राठौड ने बताया कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए पंचवर्षीय योजना में विशेष प्रावधान कर रही है। तकनीकी संथानों में विकसित तकनीक को गॉवों तक पंहुचा कर गावों के सुनियोजित विकास किया जा सके।
मुख्य वक्ता कम्प्यूटर सोसाईटी ऑफ इंडिया उदयपुर चेप्टर के अध्य क्ष डॉ. अजीमुशीन खान ने कहा कि ग्रामीण विकास के विभिन्न घटकों शिक्षा, स्वास्थ्य, बैकिंग कृषि एवं स्वरोजगार में सूचना प्रोद्योगिकी के माध्यम से नई दिशा प्राप्त हुई है जैसे ई—बैंकिंग, बायोमैट्रिक एटीएम, सूचना प्रौद्योगिकी कियोस्क, ई—गर्वनेंस, एजुसेट, एग्रीकल्चर मार्केटिंग।
रियल टाईम सूचना के कारण ग्रामीण विकास के समस्त घटकों से समन्वय व नवाचारों का समावेश हुआ है व ग्रामीण समाज को नई तकनीकों की त्वरित उपलब्धता हुई है जिससे शहरी एवं ग्रामीण विकास में असमानता कम हुई है।
प्रारम्भ में दि इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स  इंडिया स्थातनीय अध्यक्ष डॉ. वाई. सी. भट्ट ने अतिथियों का स्वागत किया। इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स  इंडिया  की गतिविधियों  की जानकारी दी। आयोजन सचिव कम्पयूटर विज्ञान विभाग, अभियांत्रिकी महाविद्यालय के डॉ. धर्मसिंह ने बताया कि दो दिन की सेमिनार में कुल तीन तकनीकी सत्र ई—गवर्नेंस, ई—एग्रीकल्चर, ई—शिक्षा होंगे जिसमें कुल ३० पत्रों का वाचन होगा। संचालन कम्यू.रीबटर विज्ञान विभाग, अभियांत्रिकी महाविद्यालय की कल्पना जैन ने किया तथा धन्यवाद इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के स्थाननीय मानद सचिव सैयद इरशाद अली ने दिया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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