जीरो ऑयल कुकिंग कर बचें हार्ट अटैक से : छाजेड़

BY — August 18, 2013

नि:शुल्क हृदय रोग निवारण शिविर आयोजित

180806udaipur. रोटरी क्लब उदयपुर एवं सओल हार्ट सेन्टर के सयुक्त तत्वाधान में निशुल्क हृदय रोग निवारण शिविर का आयोजन रोटरी बजाज भवन में रविवार को हुआ। शिविर में विश्ववि यात कॉडियोलोजिस्ट डॉ. बिमल छाजेड ने शिविर में लोगों को हार्ट अटैक, इसे रोकने, इससे बिना ऑपरेशन मुक्ति, अनावश्यक सर्जरी को नकारने, जीरो ऑयल कुकिंग के साथ जीवन शैली को बदलने के बारे में बडे ही सरल तरीके से उदाहरण के द्वारा समझाया।

डॉ. छाजेड ने हार्ट अटैक के सबन्ध में कहा कि भारत मे करीब 10 करोड़ ह्दय रोगी हैं तथा 50 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष हार्ट अटैक से मारे जाते हैं, 10 में से 9 पुरूषो को जहा हार्ट अटैक की समस्या रहती हैं वही महिलाओं में इसका ग्राफ बहुत कम हैं महिलाओं को हार्मोन्स की वजह से यह समस्या 45 वर्ष की उम्र के बाद आती हैं हालांकि आज-कल के रहन-सहन व खाने पीने से हार्ट अटैक का किसी भी उम्र में आ जाना संभावित हैं। डॉ. छाजेड ने बताया कि संपूर्ण भारत में साओल हार्ट के 32 सेन्टर स्थापित हैं, जिनको प्राकृतिक बाई पास तकनीक से जोड़ा गया हैं। उन्होने बताया कि जिस तरह मानव शरीर में दो किडनी होती हैं उसी तरह से हार्ट को संचालित करने के लिए भी दो ट्यूब होती हैं खिलाडी, मेहनतकश लोग अपनी इस दूसरी ट्यूब को चालू कर पाते है वही आम आदमी अपने आराम जीवन की वजह से यह नही कर पाता।
20 साल के बाद बढना शुरू होता हे ब्लोकेज :– छाजेड ने बताया कि बच्चे के पैदा होने के बाद 20 साल की उम्र तक शारीरिक विकास में आहार एवं खून का बाराबर बहाव काम आता हें वही 20 साल की उम्र के बाद से आहर की अत्यधिक्तता तथा रक्त का पूर्ण संचरण ना होने से ब्लोकेज की स्थित बनना शुरू हो जाती हैं जिसका पता व्यक्ति को 50 से 60 साल तक की उम्र में चलता हैं। उन्होने अपनी सं पूर्ण वार्ता में लाईफ स्टाईल को बदलने पर पूर्ण जोर दिया उन्होने कहा कि खाने में बिना तेल तथा बिना घी की सब्जी का उपयोग करना र्हाट अटैक से बचने का कारगर उपाय हैं। इस दौरान उन्होने स्लाई ड शॉ के माध्यम से घी,तेल की जगह पानी का उपयोग करते हुए सब्जी बनाने की क्लिप दिखाई तथा सभी को इस बात के लिये प्रेरित भी किया की तेल व घी का उपयोग पूर्ण तरह बन्द कर दे।
ह्दय की संरचना को बारीकी से समझाते हुए डॉ. छाजेड ने स्लाईड शॉ पर बताया कि ह्दय में 3 तरह की कोरोनरी आर्टरी होती हैं जो हार्ट को रक्त की उपलब्धता कराती हैं। हार्ट जब एक बार पंप करता हैं तो पूरे शरी में रक्त का संचार होता हैं, यह 1 मिनिट में 72 बार तथा पूरे 24 घण्टों में 1 लाख बार पंप करता हैं।
हार्ट अटैक के लक्षण :- हार्ट अटैक के लक्षणो के बोरे में बताते हुए छाजेड ने बताया कि सीने मे दर्द,बाएं हाथ में तकलीफ, खाने खाने के बाद चलने में तकलीफ, घबराहट, सांस फूलना यह सभी हार्ट अटैक के लक्षण हैं।
हार्ट अटैक रोकना एवं सामान्य स्थित में आना :-  लंबे समय तक कोलेस्ट्रोल एवं ट्राईग्लिसराईड की अधिकता से हार्ट अटैक की संभावना काफी हद तक बढ जाती हैं जिसके लिए जरूरी हैं कि उसकी रोकथाम कर र्हाट को सामान्य स्थिति में लाया जाये जिसके लिए डॉ. छाजेड ने बताया कि राकथाम के लिए जरूरी हैं कोलेस्ट्रोल एवं ट्राईग्लिसराईड बढाने वाले तत्वों को रोका जाये तथा सामान्य स्थ्तिि यानी रिवर्सल के लिए ब्लोकेज को कम किया जाये जिससे हार्ट का मरीज अगले 8-10 साल तकलीफ से दूर रहें। उन्होने एन्जियोग्राफी की जगह सीटी एन्जियोग्राफी एवं बाई पास सर्जरी की जगह नेचुरल बाई पास पर जोर देते हुए कहा कि मानव शरीर को चीर-फाड से बचाना अत्यन्त आवश्यक हैं इस लिए यह जरूरी हैं कि हार्ट अटैक की ब्लोकेज जानने के लिए सीटी एन्जियोग्राफी तथा हार्ट के द्वितीय ट्यूब को संचालित करने के लिए नेचुरल बाई पास चिकित्सा कराई जाये।
स्कूल कॉलेज में अनिवार्य हो स्वास्थ्य शिक्षा: –  स्कूल एवं कॉलेज में जिस तरह इतिहास, भूगोल अनिवार्य हैं उसी तरह स्वास्थ्य के लिए भी एक विषय अनिवार्य हो जिससे की छात्र स्कूली समय से ही हार्ट अटैक होने के कारण, खान-पान की बेहतर जानकारी सभी को समझ पाये।
180807मेडिकल भाषा नही समझने से मरीज होते भ्रमित : डॉ. बिमल छाजेड ने बताया कि अमुमन कॉर्डियोलोजिस्ट द्वारा मरीजो को हार्ट अटैक से स बन्धित जानकारी मेडिकल भाषा में दी जाती हैं या फिर दी ही नही जाती हैं जिसके पिछे डॉ. का यही मंतव्य रहता हैं कि मरीज ज्यादा अच्छे से हार्ट अटैक से स बन्धित उपायों को समझने लगे तो इलाज के लिए कोई अस्पताल नही आयेगा।
कार्यक्रम  के प्रारंभ में रोटरी अध्यक्ष बी. एल. मेहता ने उपस्थित अतिथियों परिचय दिया तथा डॉ. छाजेड का परिचय रोटरी के पूर्व अध्यक्ष द्वारा दिया गया। डॉ. छाजेड का परिचय देतें हुए पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ए स के पूर्व सलाहकार, साओल आर्ट सेन्टर के निदेशक एवं नॉन-इनवेन्सिव कार्डियोलॉजी के जनक डॉ. बिमल छाजेड़ एम.डी. 52 वर्ष के है तथा कलकत्ता से सन् 1996 मे एमबीबीएस पूरी की। उन्होने लागों को तेल एवं घी से देर रखने के लिए अब तक 150 तरह की सब्जियां, 50 तरह की दाले बनाना, 150 तरह की मिठाईयो सहीत करीब 800 तरह के व्यंजन बिना तेल एवं घी के बनाये हैं जिसके उपयोग से कोलेस्ट्रोल एवं ट्राईग्लिसराईड की मात्रा को कम कर हार्ट अटैक की बीमारी से बचा जा सकता हैं। कार्यक्रम में रो. अध्यक्ष बी. एल. मेहता, रोटरी सेवा ट्रस्ट पीडजी निर्मल सिंघवी, सामूदायिक सेवा के निदेशक रो. पी.एस. तलेसरा एवं सचिव सूरेन्द्र जैन सहीत कई रोटेरियन उपस्थित थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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