प्रति वर्ष डेढ़ लाख लोग मरते है सडक़ हादसों में

BY — October 17, 2013

यातायात नियमों की अवहेलना व अनभिज्ञता से होते हैं सडक़ हादसे

171003Udaipur. यातायात निमयों की अवहेलना एवं अनभिज्ञता के कारण देश में प्रतिवर्ष सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्‍या बढ़ रही है यदि वाहनों की इंजीनियरिंग, सडक़ों की इंजिनियरिंग, बच्चों, बड़ों को सडक़ नियमों की जानकारी देकर शिक्षित करने, नियम तोडऩे वालों के खिलाफ कड़े नियम बनाए जाए, आपातकालीन सुरक्षा की जानकारी दी जाए,यातायात नियमों तोडऩे वाले वातावरण को रोका जाए तो सडक़ हादसों में कमी संभव है।

यह कहना है सडक़ सुरक्षा पर काम कर रही स्वंय सेवी संस्था मुस्कान की संचालिका निशा बग्गा का। वे कल लायन्स क्लब उदयपुर द्वारा हिरणमगरी से. 4 स्थित लायन्स सेवा सदन में उप प्रांतपाल द्वितीय क्लब अधिकारिक यात्रा के अवसर पर सडक़ सुरक्षा पर आयोजित वार्ता में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थी। उन्होनें बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रति वर्ष डेढ़ लाख से अधिक लोग सडक़ हादसों में मरते है तथा 5 लाख लोग घायल होते है। डेढ़ लाख में भी मरने वालों की उम्र 13 से 25 वर्ष के आयु के बीच अधिक होती है। राजस्थान में वर्ष 2012 में हुई 22969 सडक़ दुर्घटनाओं में 9528 लोग सडक़ हादसों में मारे गये थे। देश में प्रतिवर्ष साढ़े बारह लाख नए वाहन चालक भारतीय सडक़ों पर उतरते है यदि उन्हें यातायात नियमों की पालना के लिए शिक्षित किया जाए तो सडक़ दुर्घटनाओं में कमी लायी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि विश्व में अप्राकृतिक या रोगों से होने वाली मृत्यु के कारण जहां 1990 में सडक़ दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कर स्थान नौवां था वहीं वह 2020 तक ऊपर चढ़ते हुए 3 पर आ जाएगा, जो अत्यन्त चिन्तनीय है। बग्गा ने बताया कि बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं के कारण देश की जीडीपी पर 3 से 4 प्रतिशत तक प्रभाव पड़ता है। देश की कुल आय में से प्रतिवर्ष 1 हजार करोड़ रूपया सडक़ दुर्घटनाओं को रोके जाने पर पर व्यय हो रहा है।
उन्होंने बताया कि विदेशों में जहां 4 पहिया वाहन से अधिक तथा 2 पहिया वाहन से कम दुर्घटनाएं कारित होती है जबकि यह स्थिति भारत में बिलकुल विपरीत है। यहां सडक़ दुर्घटनाएं दुपहिया वाहन से अधिक तथा 4 पहिया वाहन से कम होती है। उन्होंने बताया कि गत 3 माह में 10 हजार बच्चों को सडक़ एवं सुरक्षा नियमों की जानकारी देकर उन्हें शिक्षित किया।
डेंजर जोन : उदयपुर में सुखेर, प्रतापनगर व गोवर्धनविलास स्थान सडक़ दुर्घटनाओं के लिए डेंजर जोन बन चुके है जहां सर्वाधिक सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं।
इस अवसर पर उप प्रातपाल द्वितीय बी. वी. माहेश्वरी ने नेतृत्व गुणों की व्याख्या करते हुए कहा कि कहा कि नेतृत्व देने वाले को घमण्ड त्याग कर अच्छा श्रोता बनना चाहिए। अपनी शक्ति का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए, जिम्मदारियों को बांटना, निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्लब को इस वर्ष नेत्रदान करने हेतु जनता में जागरूकता लाने के लिए रैली का आयोजन करना चाहिए। क्लब अध्यक्ष एन. एन. अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया जबकि अंत में धन्यवाद एवं कार्यक्रम का संचालन सचिव आर. एस. चौहान ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम चेयरमेन रोशनलाल जैन एवं कोषाध्यक्ष शंकरलाल काबरा भी उपस्थित थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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