सिर सिकुड़ने के रोगग्रस्त सर्वाधिक बच्चे जापान में

BY — October 24, 2013

पीडियाट्रिक न्यूरो सर्जरी पर राष्ट्रीय सेमिनार शुरू

241010Udaipur. हिन्दुजा हॉस्पिटल मुम्बई के न्यूरो सर्जन प्रमुख डॉ. बी. के मिश्रा, नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ मेन्टल हेल्थ एण्ड न्यूरो साईंस से डॉक्टर परितोष पाण्डे एवं चण्डीगढ से आये डाक्टर एस. के. गुप्ता ने मोया-मोया डिजीज़ (सिर का सिकुड़ जाना) के बारे में बताया कि यह बीमारी मुख्यत: 8 से 10 साल के बच्चे में देखी जाती है लेकिन अभी तक की सबसे कम उम्र में यह बीमारी 2 साल के एक बच्चे में देखी गई है। यह बीमारी सबसे ज्यादा जापान में हैं लेकिन भारत में भी इस बीमारी के मरीज पाए गए हैं।

यह जानकारी रविन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से रमाडा रिसोर्ट में गुरुवार से आरम्भ हुई इण्डियन सोसायटी फॉर पीडियाट्रिक न्यूरो सर्जरी की 24 वीं राष्ट्रीय सेमिनार ‘न्यूरोपिडिक्शन-2013’ में दी गई। इन्होंरने बताया कि इसमें अब तक की डॉक्टरी रिपोर्ट के अनुसार दिमाग को ब्लड की उपलब्धता कराने वाली नस के सिकुड़ जाने से मस्तिष्क के पूर्ण विकास में बाधा उत्पन्न होना माना गया है लेकिन इस बीमारी के असली कारण को पता करने में डाक्टर्स की रिसर्च चल रही हैं। मोया-मोया के उपचार सम्बन्धी जानकारी देते हुए डाक्टर्स ने बताया कि वेस्क्यूलर बाईपास सर्जरी के द्वारा उक्त बीमारी का इलाज किया जाता हैं जिसके अभी तक के ऑपरेशन के परिणाम अच्छे पाये गये हैं।
241011इटली से आये डॉ. जी. तम्बूरीनी ने बच्चों के सिर सिकुड़ जाने सम्बन्धी बीमारी के बारे में बताया कि बच्चों के सिर सिकुड़ जाने से ब्रेन के विकास में बाधा आती हैं जिसको दूर करने के लिए दूरबीन द्वारा ऑपरेशन कर सिर को बड़ा किया जाता है, जिसे मिनीमल इन्वूस्यू सर्जिकल तकनीक कहते हैं। फिल्हाल यह तकनीक भारत में उपलब्ध नही हैं लेकिन भारत में ओपन सर्जरी द्वारा बीमारी का निदान किया जाता है।
241012डॉ. संदीप चटर्जी एवं एम्स हॉस्पिटल दिल्ली से आये डॉ. ए. के. महापात्रा ने मिनींगों सील (महिलाओं में गर्भावस्था में होने वाली बीमारी) के बारे में बताया कि महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड की कमी से महिला के पैदा होने वाले बच्चे में यह बीमारी उत्पन्न होती हैं जिसमें बच्चे का मल-मूत्र पर नियंत्रण ना रहना एवं पांव में लकवा मार जाना जैसी बीमारी पैदा हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के इलाज के लिए ऑपरेशन द्वारा बच्चों में इस बीमारी को दूर किया जाता हैं। उदयपुर के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. मनीष पाठक ने डबल मिनींगो सील बीमारी के ही बारे में उनके द्वारा किये गये अभी तक के पांच सफल ऑपरेशनर्स के अनुभवों को सेमीनार में साझा किया।
आयोजन सचिव डॅा. तरूण गुप्ता ने बताया कि इस तीन दिवसीय नेशनल काँफ्रेस के प्रथम दिन न्यूरो सर्जरी से जुडे़ देश-विदेश के करीब 22 डाक्टर्स ने पीडियाट्रीक न्यूरो सर्जरी की विभिन्न बीमारियों के बारे में काफी जानकारी एवं उनके साथ ही उनके उपचार के बारे में व नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होनें बताया कि सेमीनार के दूसरे दिन विदेश से आये हुए डाक्टर्स पीडियाट्रीक न्यूरों सर्जरी पर नई तकनीकों के बारे में जानकारी उपलब्ध करायेंगे। उन्होनें बताया कि दूसरे दिन 2 विशेष सत्र नर्सिंग ट्रेनिंग के लिए आयोजित किये गये हैं जिसमें विदेश से आई 22 नर्से भाग लेंगी।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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