अब भी विदेशों से मंगवाना पड़ता है उर्वरक

BY — February 6, 2014

दो दिवसीय फर्टीलाइजर ओरियन्टेशन कोर्स का समापन

060205उदयपुर। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया नई दिल्ली के महानिदेशक सतीशचन्द्र ने कहा कि आज भी भारत को बहुत सारे उर्वरक दूसरे देशों से आयात करने पड़ रहे हैं। जिनकी लागत इतनी ज्यादा है कि देश की एक बड़ी धनराशि उसमें व्यय हो रही है, इसलिए उन्होंने खेती में उर्वरकों के बेहतर एवं समुचित उपयोग पर जोर दिया।

वे गुरुवार को राजस्थान कृषि महाविद्यालय एवं फर्टीलाइजर एसोसिएषन ऑफ इण्डिया (एफएआई) के तत्वावधान में फर्टिलाइजर ओरियन्टेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इसमें राजस्थान कृषि महाविद्यालय के चतुर्थ वर्ष, एमएससी एवं पीएचडी के अनुसंधान में अध्ययनरत करीब 120 विद्यार्थियों नें भाग लिया। अध्यक्षता करते हुए राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस. आर. मालू ने कोर्स की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अनुसंधान के माध्यम से यह पता लगाएं कि किस तरह उर्वरकों के न्यूनतम उपयोग से अधिकतम उपज प्राप्त की जा सकती है और खेती में उर्वरकों के लगातार उपयोग से मृदा में हो रहे नुकसान को कम किया जा सके।
कार्यशाला में फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के उत्तरी संभाग के संभाग अधिकारी डॉ. यू. एस. तेवतिया ने उर्वरकों के उपयोग के बारे में फैली बहुत सी अवधारणों एवं गलत मान्यताओं के बारे में प्रकाश डाला। डॉ. एन. के. पंजाबी, विभागाध्यक्ष, प्रसार शिक्षा विभाग ने धन्यवाद दिया। कार्यशाला में डॉ. राजीव बैराठी एवं डॉ. गजानन्द जाट ने विभिन्न गतिविधियों को संपादित करने में अपना अहम योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान एक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता भी हुई जिसमें मृदा रसायन विभाग के एमएससी के छात्र नवीन शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा जितेन्द्र एवं धर्मपाल क्रमश: द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे। समापन काजरी, जोधपुर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एन. एल. जोशी के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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