‘दुख देकर सुखी नहीं हो सकते’

BY — July 4, 2014

आत्मरति विजय ससंघ का धूमधाम से हुआ प्रवेश

040706उदयपुर। जैनाचार्य श्री रामचंद्र सूरिश्वर महाराज के शिष्ट मुनि आत्मरति विजय और साध्वीश्री पूर्णदर्शना आदि का चातुर्मासिक प्रवेश धूमधाम से शुक्रवार को हिरण मगरी से.4 स्थित श्री शान्तिनाथ सोमचन्द्र आराधना भवन में हुआ।

श्री जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक जिनालय (संघ) के अध्यक्ष सुशील बांठिया ने बताया कि प्रात: 8.30 बजे तुलसी निकेतन से स्वागत यात्रा का वरघोड़ा आरंभ हुआ। यातायात में बाधक नहीं बनें, इस कारण दो-दो, तीन-तीन की कतार में समाजजन सेक्टर चार स्थित श्री जैन मूर्तिपूजक जिनालय पहुंचे जहां समूह प्रार्थना भक्ति, मंगल स्वागत गीत गान हुआ। संघ अध्यक्ष सुशील बांठिया ने श्रीसंघ व गुरु भगवंत का स्वागत व अभिनंदन किया।
040707धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन मुनि आत्मरति विजय एंव श्री हितरति विजय ने संघ के विकास विस्तार की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जो चांस लेता है, वही दुनिया को बदल सकता है। इसके लिए पहले स्वयं को बदलना जरूरी है। युवाओं को जिन शासन की सेवा और सुरक्षा का संकल्प दिया। मेरा संघ मेरा परिवार का सूत्र देते हुए चातुर्मास को यादगार बनाने के लिए एक बुरी आदत का निश्चयपूर्वक त्याग करने का आह्वान किया। समूह तपस्या में अठाई करने को कहा।
संघ के महामंत्री प्रभाषचंद्र नागौरी ने गुरु पूजन का लाभ लिया और अगले पखवाड़े के कार्यक्रम की रुपरेखा बताई। तपस्वी मुनि श्री आत्मरति विजय ने अपने मार्मिक प्रवचन में श्रवण कला सिखाते हुए श्रद्धा और संवेदना बढ़ाने को कहा। उन्होंने इंसान की चार कक्षाएं सुखी करके सुखी होना (उत्तम) सुखी देखकर सुखी होना (मध्यम), दुखी देखकर सुखी होना (अधम) तथा दुखी बनाकर सुखी होना (अधमाधम) बताईं। उन्होंने धर्मसभा में मैं किसी को भी दुखी नहीं करुंगा का संकल्प दिलाया। धर्मसभा में बैठने का सलीका बताते हुए धर्मसभा में मोबाइल रिंगटोन बजने पर 100 रुपए का दंड लगाना तय हुआ। दंड राशि जीवदया के उपयोग में आएगी।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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