ब्रह्ममुहूर्त में सूर्यदर्शन बनाता है निरोगी : सहजानंद

BY — December 21, 2014

गीतांजलि में राष्‍ट्रीय ज्‍योतिष व स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍मेलन

211207उदयपुर। देव वरूण शोध संस्थान व सार्वजनिक प्रन्यास तथा गीतांजली यूनिवर्सिटी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय ज्योतिष एवं स्वास्थ्य सम्मेलन 2014 का शुभारम्भ मुख्स अतिथि तपोनिष्ठ शैलेन्द्र नाथ, स्वामी सहजानन्द महाराज, गीतांजली ग्रुप के चेयरमेन जेपी अग्रवाल, वाईस चेयरमेन कपिल अग्रवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकित अग्रवाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

211208सम्मेलन के उद्घाटन सत्र से आरम्भ हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष पं निरंजन भट्ट ने अतिथियों का स्वागत किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि स्वामी सहजानंद ने बताया कि ज्योतिष के बिना पूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि गर्भाधान संस्कार यदि ज्योतिष के अनुसार हो यानि समय इत्यादि के अनुसार संतानोत्पति के लिए प्रयास किया जाए तो संतान पूर्ण स्वस्थ होती है। इसके अतिरिक्त जो मनुष्य ब्रह्ममुहूर्त में सूर्यदर्शन करता है वह सदैव निरोगी रहता है। उन्होंने ज्योतिष के ज्ञान को प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि यदि प्रत्येक मनुष्य ज्योतिष सीख ले तो उसे मानसिक अशांति नहीं होगी।
बाल योगेश्वर तपोनिष्ठ शैलेन्द्रनाथ महाराज ने ज्योतिष को मानव जीवन का दिशा सूचक यंत्र बताया। उन्होंने भगवान शब्द की व्याख्या करते हुए पंचतत्वों का उसमें तथा मानव शरीर में सामावेश (भ से भूमि, ग से गगन, व से वायु, वा (आ) से अग्नि तथा न से नीर) बताया। उन्होंने सूर्य नमस्कार से स्वास्थ्य लाभ का जोरदार समर्थन किया।
211209गीतांजली ग्रुप के चेयरमेन जेपी अग्रवाल ने ज्योतिष में अपना विश्वास जाताते हुए इसे पूर्ण विज्ञान बताया।
विशिष्ट अतिथि रजिस्ट्रार कृषि विश्वविद्यालय सत्यनारायण लाठी ने ज्योतिषियों से एक ऐसे साफ्टवेयर बनाने की अपील की जिसके माध्यम से चिकित्सक रोगों का निदान व चिकित्सा कर सकें।
विशिष्ट अतिथि रतलाम के राजज्योतिषी बालूलाल जोशी ने इस सम्मेलन को एक ऐतिहासिक घटना बताया तथा प्रातः उठने से लेकर रात्री में सोने तक सारी क्रियाएं ज्योतिष पर आधारित बताई। उन्होंने कुष्ठ रोग में आदित्य हृदय स्त्रोत को लाभदायक बताया।
तकनीकी सत्र में सर्वप्रथम गीतांजली के हृदय सर्जन डॉ. संजय गांधी ने हृदय रोग के बारे में बताया तथा ज्योतिष और जेनेटिक में संबंध स्थापित किया। उन्होंने सभी के लिए ज्योतिष विद्या को अनिवार्य बताया।
विनोद जोशी तथा उदयपुर के ज्योतिषी अनिल शर्मा ने जन्म कुण्डली में चिकित्सा व्यवसाय के योगों के बारे में बताया।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में डॉ. के.सी. व्यास ने ज्योतिषियों से आपसी संवाद कर बिमारियों के कारणों का विश्लेषण किया।
होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. मेघा जैन ने ज्योतिष का होम्योपैथी में महत्व को बताया।
आयुर्वेद कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. महेश दिक्षित ने आयुर्वेद के माध्यम से ज्योतिष एवं औषधियों के माध्यम से रोगों का निदान एवं उपचार बताया। जोधपुर से डॉ. मोनिका आर करल ने आत्मविश्वास के द्वारा असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त करने पर जोर दिया। कानपुर के अमिति तिवारी, पं अभिषेक जोशी, डॉ. ललित पंत, रवि जैन, दिल्ली के चेतन शर्मा ने असाध्य बीमारी पर विचार व्यक्त किए।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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