हरित रसायन के प्रयोग से ग्रीन प्रोसेस को गति : आहुजा

BY — October 20, 2016

सुविवि में हरित रसायन पर राष्ट्रीय सेमिनार

201001उदयपुर। वर्तमान में संपूर्ण विश्व में प्रदूषण की समस्या प्रमुख रूप से बनी हुई है। चाहे वह जल प्रदूषण, वायू प्रदूषण या ध्वनि प्रदूषण हो। हरित रसायन के उपयोग से वातावरण में लगातार बढ़ रहे विषैले रसायनों की मात्रा को हरित रसायन के उत्पादों द्वारा घटाया जा सकता है।

इन विषैले रसायनों से मानव जाति में अनेक बीमारियां पैदा हो रही हैं। हरित रसायन से जीवन को और अधिक बेहतर बनाया जा सकता है। पर्यावरण में शामिल जल एवं वायु सहित अन्य तत्वों का संरक्षण बिना रसायन के संभव नहीं है। देखा जाए तो इसके संरक्षण का केंद्र बिंदु रसायन ही है। इसलिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह जरूरी है कि रसायन क्षेत्र में अधिकाधिक रिसर्च हो। जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के कल्याण में अग्रणी हो।
201002उक्त विचार संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रो. एस. आहुजा ने गुरूवार को मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संघटक रसायन शास्त्र विभाग तथा रॉयल सोसायटी ऑफ  केमेस्ट्री, लन्दन नार्थ इण्डिया सेक्शन, दिल्ली वि.वि. की ओर से आयोजित एक दिवसीय केमिकल साइंस की नवीनतम तकनीकों एवं हरित रसायन पर राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता कही।
उन्होंने बताया कि हरित रसायन, रासायनिक विज्ञान विषय में तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। इसके जरिये ऐसे पदार्थ व उत्पाद बनाए जा रहे हैं जो पर्यावरण, पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं व स्वयं मानव के लिए हानिकारक न हो। इसमें ऐसी विधियां लगातार विकसित हो रही है जिसमें किसी प्रकार के हानिकारक पदार्थ, विषैले विलायक आदि का प्रयोग भी न हो और अनुपयोगी याने वेस्ट उत्पाद न बनें, लागत मूल्य कम हो सके। मुख्य अतिथि एमपीयूएटी के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कहा कि दक्षिण राजस्थान में हरित रसायन पर उत्कृष्ट शोध होना चाहिए। हरित रसायन ने जहां एक ओर रसायनों के दुष्प्रभावों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं दूसरी और पर्यावरण और स्वास्थ्य की ओर जागरूक भी किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आरके शर्मा ने कहा कि वर्तमान में हमारी दिनचर्या पूरी तरह से रसायनों पर निर्भर हो रही है व इसके घातक परिणाम जीवन पर पड़ रहे हैं। इससे हरित रसायन पर शोध करने तथा इन्हें आचरण में उतारने की आवश्यकता बढ़ गई है। प्रारंभ में सेमीनार समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रो. पिंकीबाला पंजाबी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो. पिंकीबाला पंजाबी, प्रो. सुरेश चन्द्र आमेटा, डीन बीएल आहूजा, प्रो. केआर देसाई ने विचार व्यक्त किये। संचालन आयोजन सचिव चेतना आमेटा ने किया। आयोजन सचिव चेतना आमेटा ने बताया कि सेमिनार में शोधार्थियों ने हरित रसायन पर प्रदर्शनी भी लगाई तथा सेमिनार में 115 से अधिक शोधार्थियों ने पेपर प्रस्तुत किये।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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