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उदयपुर में दिखाई दी दुर्लभ तितली ‘इंडियन फिटीलरी’

BY — December 20, 2016

वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर नेहा को दिखाई दी तितली

उदयपुर। मेवाड़-वागड़ अंचल की प्रदूषणमुक्त आबोहवा जीव-जंतुओं और कीट-पतंगों को बेहद रास आ रही है और यही कारण है कि इस क्षेत्र में जहां शीतकाल बिताने के लिए प्रवासी परिंदे यहां का रूख करते है वहीं कई दुर्लभ प्रजातियों के प्राणी भी यहां दिखाई देते हैं।

शहर की वाईल्ड लाईफ फोटोग्राफर नेहा मनोहर को मंगलवार को केवड़ा की नाल में दुर्लभ प्रजाति ‘इंडियन फिटीलरी’ नाम की एक तितली दिखाई दी जिसे उन्होंने कैमेरे से क्लिक भी किया। तितलियों के जीवनचक्र पर शोधरत नेहा ने बताया कि ‘इंडियन फिटीलरी’ तितली इस क्षेत्र में पहली बार देखी गई है। उन्होंने बताया कि लेपर्ड के शरीर पर पाए जाने वाले रंगों और धब्बों वाली बहुत ही सुंदर यह तितली आमतौर पर ऊॅंचे पहाड़ी इलाकों मंे पाई जाती है। इस तितली के खुले पंखों में लेपर्ड जैसे स्पॉट दिखाई देते हैं और यह तितली कॉमन लेपर्ड प्रजाति की तितली की तरह ही दिखाई देती है परंतु इसके बंद पंखों में हल्की सफेदी इसकी विशिष्ट पहचान होती है।
तितलियों पर ही शोध कर रहे विशेषज्ञ मुकेश पंवार ने बताया कि यह तितली पहाड़ी इलाकों में मिलती है परंतु सर्दियों के दिनों में यह पहाड़ी इलाका छोड़ निचले मैदानी इलाकों की तरफ प्रवास करती है। आमतौर पर यह पुराने जंगलों में ही दिखाई देती है व जंगली फूलों के रस की शौकिन होती है। पंवार ने बताया कि रंग-रूप, आकार-प्रकार में इसका मेल कॉमन लेपर्ड जैसा और फिमेल प्लेन टाईगर तितली जैसी ही होती है। उन्होंने बताया कि यह तितली मेवाड़ और वागड़ के पहाड़ी इलाकों में वियोला सियाई परिवार के पौधों पर अपने अंडे देती है परंतु क्षेत्र में इस प्रजाति के पौधों की कमी के कारण अब यह दुर्लभ हो गई है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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