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जीवन में क्षमा का बड़ा महत्व

BY — September 10, 2017

श्री महावीर युवा मंच संस्थान के तत्वावधान में सकल जैन समाज का सामूहिक क्षमापना समारोह

उदयपुर। संत तो क्षमा देते भी हैं और लेते भी हैं। जीवन में कुछ क्षण ऐसे संदेश देकर चले जाते हैं जिनमें ऐसे ही कुछ क्षण ये भी हैं। क्षमा का बड़ा महत्व है। श्वेताम्बर के संवत्सरी होती है तब दिगम्बर समाज के दशलक्षण पर्व उत्तम क्षमा के रूप में आरंभ होते हैं।

ये विचार उभरकर आए श्री महावीर युवा मंच संस्थान के तत्वावधान में रविवार को पंचायती नोहरा में आयोजित सकल जैन समाज के सामूहिक क्षमापना समारोह में जहां चातुर्मास के लिए शहर में विराजित विभिन्न पंथों की चारित्रात्माओं ने शिरकत की।
स्वागत उद्बोधन में संस्थान के संरक्षक राजकुमार फत्तावत ने कहा कि शहर में एक लाख से अधिक जैन धर्मावलम्बी हैं। कई बार अनुशासन के लिए कटु बातें भी कहनी पड़ती हैं। उन्होंने खमतखामणा करते हुए कहा कि यह संस्थान का 22वां वर्ष है जब सामूहिक क्षमापना पर्व सामूहिक रूप् से मनाया जा रहा है। आज समय की मांग है कि हम एक हों। आचार्य महाश्रमण ने कोलकाता में गत दिनों आह्वान किया कि आचार्य शिव मुनि और राम मुनि जो भी एक तिथि तय करें, तेरापंथ उस दिन संवत्सरी मनाने को तैयार है। हम जैन एकता के लिए कितनी आहूति दे सकते हैं, इस पर विचार करना होगा। मेवाड़ की धरा से यह आवाज निकली है तो निश्चय ही दूर तक जानी चाहिए। 29 सितम्बर को स्पेशल ट्रेन कोलकाता, सम्मेदशिखर तक के लिए संस्थान ले जा रहा है जिसमें सकल जैन समाज के बंधु आमंत्रित हैं। बहुत लिमिटेड सीट्स रह गई हैं।
आराधना भवन में विराजित रत्नचंद्र सूरिश्वर ने कहा कि एक मंच पर संस्थान ने सभी चारित्रात्माओं को बुलाकर भगवान महावीर के उपदेशों को सार्थक किया, वे धन्यवाद के पात्र हैं। क्षमापना सबकी होनी चाहिए। जैन धर्म ही ऐसा है जिसमें पशु, छोटे बच्चों से भी क्षमापना की जाती है कि गलती से भी कोई गलती हो गई हो तो क्षमायाचना। क्रोध नहीं करें। समस्या नमक के समान है। गिलास में डालेंगे तो खारा लगेगा लेकिन उसे समंदर के हिसाब से सोचेंगे तो समस्या गायब हो जाएगी।
सुदृढ़मति माताजी ने कहा कि मैं अपनी क्षमता के अनुसार स्वीकारने, क्षमा करने का भाव है। अपने मन से क्षमा मांगें जिसे बहुत भटकाया, घुमाया। कपड़ों पर लगे दाग जब हम हाथों हाथ साफ करते हैं तो मन में किसी की गलती को लम्बे समय तक क्यों रखते हैं, उसे भी हाथों हाथ समाप्त करें।
तेरापंथ के तपोमूर्ति मुनि पृथ्वीराज ने कहा कि हम प्रभु महावीर की जीवन यात्रा को देखें तो उसमें कई घुमावदार रोड, स्पीड ब्रेकर हैं। क्षमायाचना किससे करें, खुद से भी और दूसरों से भी। जिसके लिए मन में कुछ भी सोच रखा हो, जैन समुदाय ही ऐसा है जिसमें क्षमापना आती है। कर्म बंधन से मुक्त होना है तो क्षमापना करनी चाहिए।
दिगम्बर समाज के मुनि सुश्रुत सागर ने कहा कि क्षमावाणी आपस में वात्सल्य भावना दिवस है। भोजन पकवान है जिसमें नमक न हो तो खराब लगता है वैसा ही जीवन में क्षमापना नहीं आई तो जीवन फीका रह जाएगा। यह जरूर ध्यान रखें कि एक बार जिससे क्षमा मांग ली हो, उससे दूसरी बार क्षमा नहीं मांगनी पड़े। क्षमा भाव को धारण करें।
पंचायती नोहरा में विराजित साध्वी स्वाति श्री ने गीतिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि संतों के दर्शन से अंतरात्मा प्रसन्न हो जाती है। ऐसे समारोह से भी मन प्रसन्न होता है। सभी मोती हैं लेकिन मोती रूपी माला को जो धागा पिरोता है और माला का रूप देता है वह मैत्री का धागा है। जीवन बढ़ेगा, चलेगा लेकिन बिना उस धागे के जोड़ नहीं आएगा। आवेश नहीं, प्रेम से रहना सीखें।
साध्वी श्री हर्षप्रभा ने कहा कि 84 लाख जीव योनियों से क्षमापना की जाती है। पहले क्षमा लेनी है और फिर क्षमा देनी है। क्षमा को अपनाओगे तो खुद में क्षमा आ जाएगी।
तेरापंथ के मुनि मोहजीत कुमार ने कहा कि हमारा अहंभाव, वैचारिक क्षमता, इगो, बड़प्पन छोड़ देने को प्रेरित करता है। अपने मन को पवित्र बनाएं, संवत्सरी, खमतखामणा के दिन पूर्व भवों का नहीं तो कम से कम पिछले एक वर्ष की गलतियों के लिए तो क्षमा करें और क्षमा मांगें।
अहिंसापुरी में विराजित रितेश मुनि ने कहा कि संस्थान निस्संदेह बधाई का पात्र है जो ऐसा आयोजन कर समाज को एकता प्रदान कर रहा है।
महावीर युवा मंच संस्थान के अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश चोरडिया ने स्वागत करते हुए अल्प निवेदन पर सभी चारित्रात्माओं के एक स्थान पर एकत्र होने पर अभिवादन करते हुए आभार व्यक्त किया। आरंभ में मंगलाचरण विजयलक्ष्मी गलुण्डिया एवं समूह ने किया। आभार विजय सिसोदिया ने व्यक्त किया। संचालन महेन्द्र तलेसरा ने किया। संस्थान के पूर्व अध्यक्ष लोकेश कोठारी ने श्रावक-श्राविकाओं का आभार व्यक्त किया।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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