इस दिवाली उदयपुर का पैसा उदयपुर में : डार्क स्टोर्स से खतरे में स्थानीय रोजगार

BY — September 26, 2025

मेवाड़ बचाओ मंच ने स्थानीय व्यापारी के लिए चलाया अभियान
उदयपुर। मेवाड़ की विरासत काफी समृद्ध रही है विशेष कर पधारो म्हारे देश पंक्ति को हम लोग दिल से निभाते हैं उसे जीते हैं । हम सभी का स्वागत करते हैं लेकिन हमारी सहृदयता का हमें नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। राजस्थान में मेवाड़ की सांस्कृतिक राजधानी उदयपुर व मेवाड़ आज एक नई चुनौती का सामना कर रही है। हमारे सामने कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें हम नजरअंदाज कर देते हैं जिसके भविष्य में दुष्परिणाम हमारे सामने आ सकते हैं। यहां के हजारों लोग देश-दुनिया में बड़ी पदों पर और उद्योगपति के रूप में नाम कमा रहे हैं लेकिन यहां के स्थानीय लोग कई ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर हो सकता है लेकिन इस ओर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हमने मेवाड़ के स्थानीय मुद्दों को उठाकर इसका सकारात्मक समाधान ढूंढने के लिए मेवाड़ बचाओ मंच की स्थापना की है। हमारा लक्ष्य है कि लोगों को अपने साथ जोड़कर पॉजिटिव माहौल में समस्याओं का समाधान किया जाए। मंच का किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति से मतभेद नहीं है हमारा लक्ष्य है समस्याओं का समाधान सभी को साथ लेकर किया जाए। मंच के साथ मेवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोग जुड़ गये हैं और हमारी टीम ग्राउण्ड स्तर पर सर्वे व अन्य कार्य करके मुद्दे इकट्ठा कर रही है।

मेवाड़ बचाओ मंच के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि स्वतंत्रता सैनानी, संविधान सभा के सदस्य और प्रथम सांसद बलवंत सिंह जी मेहता के विचारों से प्रभावित होकर यह मेवाड़ बचाओ मंच की नींव रखी गयी है। वर्तमान कार्यकारिणी में मयंक जानी उपाध्यक्ष, दीपेश शर्मा सचिव, डॉ. शिखा दोषी, चिराग मेघवाल और निधि गुप्ता उपसचिव पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं । आगामी समय में कार्यकारिणी का विभिन्न स्तरों पर विस्तार किया जाएगा ताकि ज्यादा लोगों की टीम काम करके अधिक समस्याओं के समाधान के प्रति कदम उठा सके।
मेवाड़ बचाओ मंच के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने कहा कि मंच की पहली मुहिम “उदयपुर का पैसा उदयपुर में“ रखी गयी है। इस मुहिम के तहत स्थानीय व्यापारियों के संघर्ष और चुनौतियां जो कि ऑनलाइन खरीददारी के कारण उनके सामने आ रही है इस पर चर्चा करके, जनता को जागरूक करके समाधान ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगा। आज इंस्टेंट डिलीवरी कंपनियाँ और उनके डार्क स्टोर्स शहर के लगभग 30 प्रतिशत स्थानीय रोजगार को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। यह खतरा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि उदयपुर की सामाजिक और आर्थिक संरचना को भी हिला रहा है। पहले सामान खरीदने और बेचने में किसान, थोक व्यापारी, फुटकर विक्रेता, डिलीवरी बॉय सभी इस श्रृंखला का हिस्सा थे। लेकिन अब वही सामान सीधे डार्क स्टोर्स से ग्राहक तक पहुँच रहा है, और यह सारा पैसा उदयपुर के बाहर की जेबों में जा रहा है। इन डार्क स्टोर्स में सब्ज़ी, परचून, इलेक्ट्रॉनिक्स, यहाँ तक कि प्रिंट आउट जैसे छोटे व्यापार भी शामिल हैं। ग्राहक को लुभाने के लिए कम्पनी ऑफर्स देती हैं लेकिन ये कंपनियाँ मिनिमम ऑर्डर, सर्ज चार्ज और हैंडलिंग फीस जैसे जाल बिछाती हैं, जिससे हर ऑर्डर पर 30-40 प्रतिशत अधिक भुगतान करना होता है। हर ऑर्डर पर 10-12 रुपये अतिरिक्त हैंडलिंग चार्ज भी वसूला जाता है।
यह सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, यह उदयपुर की आत्मा पर चोट है। जब शहर के 30 प्रतिशत लोग बेरोजगार हो जाएँगे, तो किराया कौन देगा? बाजार कैसे चलेगा? शहर की अर्थव्यवस्था कैसे टिकेगी? इस दिवाली, मेवाड़ बचाओ मंच के माध्यम से हम एक भावनात्मक अपील कर रहे हैं यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। ये मुहिम तीन चरणों में कार्य करेगी, व्यापारियों में जागरूकता, जनता में जागरूकता, स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास। हम लोग शहर के विभिन्न चौराहों, मार्केट, रोड और पर्यटन स्थलों पर जाकर लोगों से बातचीत करेंगे, हमारे नम्बर भी लोगों के पास उपलब्ध होंगे, वे समस्या और समाधान के बारे में हमसे सीधे चर्चा कर सकते हैं। मेवाड़ बचाओ मंच में इस मुहिम के साथ में सीनियर सिटीजन की सुरक्षा, शिक्षा, डिजीटल अवेयरनेस, महिला रोजगार, सफाई, और हार्ट हेल्थ जैसे सामाजिक मुद्दों को भी शामिल किया गया है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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