पाहेर में “सतत विकास में रसायन विज्ञान की भूमिका” पर अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

BY — October 8, 2025

पाहेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं रसायन विज्ञान विभाग द्वारा “सतत विकास में रसायन विज्ञान की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ 8 अक्टूबर को हुआ। इस प्रतिष्ठित अवसर पर शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विद्वानों और वैज्ञानिकों ने सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रोफेसर वी.एन.आर. पिल्लई, पूर्व चैयरमैन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली ने उद्घाटन सत्र में कहा कि रसायन विज्ञान सतत विकास की रीढ़ है। उन्होंने ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य में संतुलन बनाए रखने के लिए रसायन विज्ञान की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “हमें प्रयोगशालाओं से बाहर निकलकर समाज तक जाना आवश्यक है। तभी हम एक सुरक्षित, स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की कल्पना को साकार कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रसायन विज्ञान का प्रत्येक क्षेत्र आज मानव सभ्यता के संरक्षण और उन्नयन के लिए योगदान दे रहा है।

कुलपति प्रोफेसर हेमंत कोठारी ने सम्मेलन की प्रमुख बातों को साझा करते हुए बताया कि रसायन विज्ञान की भूमिका केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह अब सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक निर्णायक शक्ति बन गई है। ऊर्जा संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नवीकरणीय संसाधनों के विकास में रसायन विज्ञान ने नई प्रणालियों की दिशा दी है। प्रो. कोठारी ने रेखांकित किया कि इन क्षेत्रों में और अधिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है ताकि भारत 2047 तक विकसित देश बनने की दिशा में मजबूत कदम रख सके। पाहेर विश्वविद्यालय ने इस लक्ष्य में सहयोग का संकल्प लिया है और भविष्य के लिए नवाचार व अनुसंधान के मार्ग पर अग्रसर है।
सम्मेलन के गेस्ट ऑफ ऑनर प्रो. आर. वी. जसरा, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, रिलायंस टेक्नोलॉजी ग्रुप, वडोदरा तथा प्रोफेसर, आरएमआईटी, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया ने प्रतिभागियों को नवाचार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक सभ्यता की निरंतरता और समृद्धि में रसायन विज्ञान की भूमिका सबसे मुखर है। प्रो. जसरा को प्रथम सुरेश चंद्र आमेटा अवार्ड प्रदान किया गया, जिसमें प्रमाण पत्र, मोमेंटो और ₹10,000 की राशि शामिल थी। यह सम्मान उनके उत्कृष्ठ नवाचार और शोध कार्यों के लिए दिया गया, जिसने युवाओं को विज्ञान में नई दिशा देने की प्रेरणा दी. विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के चेयरमैन, प्रो. दिलेन्द्र हिरन ने भी सम्मेलन में अपना विचार साझा करते हुए बताया कि रसायन विज्ञान सतत विकास के लिए ऊर्जा, पर्यावरण और संसाधन संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने उपस्थित शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को संदेश दिया कि इन नवाचारों को तेजी से अपनाकर ही हम एक हरित और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। सम्मेलन के पहले दिन त्सुकुबा यूनिवर्सिटी, जापान के प्रो. काजुहिरो मारुमोटो ने कार्बनिक, अकार्बनिक और क्वांटम स्पिन टेक्नोलॉजी विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. नीलू चौहान ने ग्रेफीन आधारित नैनो-कॉम्पोजिट्स और उनके हाइड्रोजन उत्पादन व भंडारण में उपयोग की जानकारी साझा की, जिससे उपस्थित शोधकर्ता नवीन विज्ञान की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सके।
सम्मेलन की संयोजक प्रोफेसर सीमा कोठारी ने अतिथियों का अभिनंदन करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी प्रो. रक्षित आमेटा और प्रो. नीतू शोरगर ने जानकारी दी कि देश-विदेश से आये 300 से अधिक प्रोफेसर और शोधार्थियों ने अपने नवाचार एवं शोध कार्यों को ओरल व पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया, जिससे विज्ञान के क्षेत्र में सतत विकास के नवीन आयाम सामने आए। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन ने न केवल रसायन विज्ञान के सतत विकास में योगदान को बल दिया, बल्कि नए शोध, नवाचार व सहयोग के लिए एक उत्कृष्ट मंच भी प्रदान किया, जिसमें युवा शोधकर्ताओं का जोश और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन समाहित रहा।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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